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सीपरी बाजार ओवरब्रिज : अप्रैल तक काम पूरा होने की उम्मीद

Tue, 17 Oct 2017 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूराो
अमर उजाला ब्यूराो Updated Tue, 17 Oct 2017 01:05 AM IST
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sipri overbridge : work will be complete in april
administration news - फोटो : demo pic
सीपरी बाजार ओवरब्रिज के काम ने तेजी पकड़ ली है। रेलवे ने चारों पिलर बनाने का काम तेजी से शुरू कर दिया है। पिलर बनने पर उनके बीच बीम डाली जाएगी। इसके बाद अंडरब्रिज के दोनों रास्ते आवागमन के लिए खोल दिए जाएंगे। उम्मीद है कि अप्रैल महीने में ब्रिज के ऊपर से वाहन दौड़ने लगेंगे।
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सीपरी बाजार ओवरब्रिज निर्माण में सेतु निगम अपने हिस्से का काम पूरा कर चुका है, जबकि रेलवे का काम बाकी है। रेलवे ने नवंबर 2017 में काम पूरा होने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन काम की गति को देखते हुए अब अप्रैल 2018 के आखिर तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। दरअसल, रेलवे को सबसे ज्यादा दिक्कत पुराने पुल के पास चार पिलर बनाने में आ रही है। इन पिलरों को जमीन के नीचे 55 फुट तक गड्डा खोदकर कंक्रीट से मजबूत करना है। इसके बाद जमीन से 13 मीटर ऊंचाई तक ले जाना है। दूसरा कारण, मार्च से मई तक बालू की कमी के कारण रेलवे के हिस्से का काम गति नहीं पकड़ पाया। जून में बालू मिलने पर पिलर बनाने का काम शुरू हुआ, लेकिन शासन ने एक जुलाई से 30 सितंबर तक बालू के खनन पर रोक लगा रखी थी। इसका प्रभाव ब्रिज के काम पर भी पड़ा।
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हालांकि, पिछले दो हफ्तों से काम ने तेजी पकड़ ली है। तीन पिलरों को 13 मीटर ऊंचाई तक बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। जबकि, चौथे पिलर के लिए गड्ढा करने का काम भी अंतिम चरण में है। बताया गया है कि पिलर बनने के बाद उनके बीच बीम डाली जाएगी। बीम डलते ही अंडरब्रिज के दोनों रास्ते आवागमन के लिए खोल दिए जाएंगे। अभी एक तरफ के रास्ते से ही लोग निकल रहे हैं। दूसरी तरफ का रास्ता खोलने के लिए सड़क भी डाल दी गई है। कंपनी अभियंताओं की मानें तो अभी काम पूरा होने में छह माह का समय और लग जाएगा।
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ये काम बाकी
- चारों पिलर 13-13 मीटर तक की ऊंचाई तक बनना हैं
- दोनों तरफ 9-9 मीटर के गार्डर डालने का काम
- पटरियों के ऊपर 50-50 मीटर के गार्डर डालने का काम
- गार्डर डलने के बाद ब्रिज के बचे हिस्से में सड़क डालने का काम


इन कामों में लग रहा समय
- नीचे पथरीली जमीन है, जिसको ब्लास्टिंग कर नहीं तोड़ा जा सकता है। इस कारण पिलर के लिए गड्ढा खोदने में समय लग रहा है।
- ब्रिज निर्माण के स्थान पर बाजार का हेवी ट्रैफिक निकलता है। जरा सी गलती से कोई हादसा हो सकता है।
- पुल के नीचे दो रेल लाइन होने पर स्पाइन छोटे बनाने पड़ते हैं। मगर, यहां पटरियों की संख्या अधिक होने के कारण स्पाइन लंबे बनाना पड़ रहे हैं।
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