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Jhansi News: रेशम की खेती...15 साल में 13 करोड़ खर्च कर डाले, किसान ढूंढने के पड़े लाले

Fri, 15 Dec 2023 11:53 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 15 Dec 2023 11:53 PM IST
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Silk farming... spent Rs 13 crore in 15 years, had to find a farmer.
जिले में 2007-08 में हुई थी शुरुआत, विभाग से अब तक जुड़े सिर्फ 140 किसान
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मऊरानीपुर के बुखारा गांव में 27 एकड़ भूमि पर एक और फार्म खोला जा रहा

संवाद न्यूज एजेंसी



झांसी। जिले में रेशम की खेती को बढ़ावा देने के लिए 15 साल पहले फार्म खोले गए थे। इन फार्म पर किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ ही उन्हें इसके लाभ बताकर रेशम की खेती से जोड़ा जाना था। इस पूरे प्रोजेक्ट पर अब तक 13 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च हो चुका है लेकिन, बीते 15 साल में इस खेती से डेढ़ सौ किसान भी नहीं जुड़ सके हैं। वहीं, अब एक और फार्म विभाग को मिल गया है। ऐसे में जहां विभाग पर खर्च का बोझ बढ़ता जा रहा, वहीं किसानों को इससे जोड़ने के लाले पड़े हैं।

झांसी में रेशम की खेती की शुरूआत साल 2007-08 में हुई थी। इसके लिए शासन ने यहां जिला रेशम विभाग को तीन फार्म दिए हैं। इसमें 75 एकड़ में फैले बंगरा ब्लॉक के कटेरा फार्म पर 85,300 पौधे, बबीना ब्लॉक के बदनपुर गांव में 70 एकड़ के फार्म पर 85,150 पौधे और बबीना के घिसौली गांव में 45 एकड़ भूमि पर 63,100 रेशम के पौधे लगाए गए हैं।
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इस प्रोजेक्ट में शासन की ओर से अब तक इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर कीट और प्रोसेसिंग तक 13 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। यहां किसानों को आमंत्रित कर रेशम उत्पादन का प्रशिक्षण पिछले 15 साल से दिया जा रहा है। बावजूद इसके जिले के किसान इस व्यवसाय में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। बीते 15 साल में जिले के मात्र 140 किसान ही रेशम की खेती से जुड़े हैं।
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किसानों को इस ओर आकर्षित करने के लिए अब मऊरानीपुर के बुखारा गांव में 27 एकड़ भूमि पर एक और फार्म खोला जा रहा है। जिसके लिए शासन से 45 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस पैसे से यहां इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ पौधे लगाए जाने हैं।

तीन साल का समय लेती है रेशम की उपज



रेशम की खेती से यदि यहां के किसान नहीं जुड़ पाए हैं तो उसका सबसे बड़ा कारण इस फसल का अधिक समय लेना है। रेशम का पौधा परिपक्व होने में तीन साल का समय लेता है। ऐसे में किसान इतना लंबा इंतजार करने को तैयार नहीं हैं।



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एक बार की मेहनत 25 साल देती है उपज



रेशम उत्पादन के विशेषज्ञ बताते हैं कि एक बार रेशम के परवान चढ़ने के बाद आगामी 25 साल तक पौधों की छटाई-गुढ़ाई से काम चल जाता है। एक एकड़ भूमि पर रेशम की खेती पर 25 से 30 हजार रुपये का मुनाफा मिलता है।
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विभाग में इतने हैं अधिकारी-कर्मचारी

पिछले आठ साल से जिला रेशम विभाग में कुल चार कर्मचारी तैनात हैं। जिनमें जिला रेशम अधिकारी अनिल राव के अलावा विभागीय कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक, निरीक्षण कार्याें के लिए एक निरीक्षक और फार्म की निगरानी के लिए चतुर्थ श्रेणी का एक कर्मी भी तैनात है। विभाग ने इसके अलावा दो आउटसोर्स कर्मी भी तैनात किए हैं लेकिन, वह कम वेतन होने के चलते अब फार्म पर कार्य करने को तैयार नहीं हैं। बता दें कि तीन फार्म पर दो-दो कर्मी की तैनाती होनी चाहिए।




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वर्जन



रेशम की खेती में अधिक समय लगने से किसान इससे कन्नी काटते हैं। वह इस खेती को अपनाएं, इसलिए उन्हेंं 50 पैसे प्रति अंडा (रेशम का कीड़े का) भी उपलब्ध करा रहे हैं। लेकिन, फिर भी किसान अधिक रुचि नहीं दिखा रहे हैं। अबतक जिले के लगभग 140 किसान ही इस खेती से जुड़े हैं।



-अनिल राव, जिला रेशम उत्पादन अधिकारी।
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