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सिकमी किरायेदारों पर कसेगा शिकंजा
ब्यूरो
Updated Sat, 06 Feb 2016 12:45 AM IST
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झांसी। सिकमी किरायेदारों पर नगर निगम ने शिकंजा कसने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। बिल कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित नगर निगम की दुकानों के किरायेदारों का सत्यापन कर एक सप्ताह में रिपोर्ट दें। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
नगर निगम की परिसंपत्तियों पर गलत तरीके से काबिज सिकमी किरायेदारों की जांच शुरू हो गई है। अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह ने बिल कलेक्टरों के साथ बैठक कर निर्देश दिए कि उनके क्षेत्रों में नगर निगम की जो दुकानें हैं, उन पर काबिज किरायेदारों का सत्यापन करें।
सत्यापन के दौरान यह देखें कि दुकान जिन लोगों के नाम आवंटित है, उनमें वही व्यापार कर रहे हैं या नहीं। आवंटी या उसके वारिस के अलावा अन्य कोई व्यापार करते मिलते हैं तो उन्हें सिकमी श्रेणी में चिह्नित किया जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि आवंटन के समय दुकान का जो स्वरूप था वर्तमान में भी वही स्वरूप है या नहीं। यदि स्वरूप से छेड़छाड़ की गई है तो उसे भी सूचीबद्ध करें।
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यह पहला मौका नहीं है जब नगर निगम अपनी दुकानों के सिकमी किरायेदारों की जांच करा रहा हो। पूर्व में भी निगम अधिकारियों ने जांच कराई थी। जांच में तब14 किरायेदारों को सिकमी की श्रेणी में पाया गया था। जांच रिपोर्ट पर तरह-तरह के आरोप भी लगाए गए थे। बाद में जांच की फाइल नगर निगम की किसी अलमारी में रख दी गई और कोई कार्रवाई नहीं की गई।
क्या होते हैं सिकमी किरायेदार
नगर निगम अपनी दुकान जिस व्यापारी को किराए पर देता है, वह किराये की दुकान को किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर दे देता है। इस सेकेंड पार्टी को सिकमी किरायेदार कहा जाता है।
कार्यकारिणी लगा चुकी है नामांतरण पर रोक
नगर निगम से जुड़े सूत्रों की मानें तो सिकमी किरायेदारों का नामांतरण करने की पटकथा तैयार की जा रही है। इसके बदले में उनसे मोटी रकम मिलने की उम्मीद भी लगाई जा रही है। नगर निगम की कार्यकारिणी ने सर्वसहमति से प्रस्ताव पारित कर नामांतरण पर रोक लगा रखी है। लेकिन, यह रोक भी शायद अधिकारियों पर भारी न पड़े, क्योंकि कार्यकारिणी द्वारा पारित कई प्रस्तावों पर अभी तक अमल ही नहीं किया गया है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद विधिक राय लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सभी बिल कलेक्टरों को पारदर्शिता के साथ सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।
रोहन सिंह, अपर नगर आयुक्त, नगर निगम झांसी।
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नगर निगम की परिसंपत्तियों पर गलत तरीके से काबिज सिकमी किरायेदारों की जांच शुरू हो गई है। अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह ने बिल कलेक्टरों के साथ बैठक कर निर्देश दिए कि उनके क्षेत्रों में नगर निगम की जो दुकानें हैं, उन पर काबिज किरायेदारों का सत्यापन करें।
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सत्यापन के दौरान यह देखें कि दुकान जिन लोगों के नाम आवंटित है, उनमें वही व्यापार कर रहे हैं या नहीं। आवंटी या उसके वारिस के अलावा अन्य कोई व्यापार करते मिलते हैं तो उन्हें सिकमी श्रेणी में चिह्नित किया जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि आवंटन के समय दुकान का जो स्वरूप था वर्तमान में भी वही स्वरूप है या नहीं। यदि स्वरूप से छेड़छाड़ की गई है तो उसे भी सूचीबद्ध करें।
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यह पहला मौका नहीं है जब नगर निगम अपनी दुकानों के सिकमी किरायेदारों की जांच करा रहा हो। पूर्व में भी निगम अधिकारियों ने जांच कराई थी। जांच में तब14 किरायेदारों को सिकमी की श्रेणी में पाया गया था। जांच रिपोर्ट पर तरह-तरह के आरोप भी लगाए गए थे। बाद में जांच की फाइल नगर निगम की किसी अलमारी में रख दी गई और कोई कार्रवाई नहीं की गई।
क्या होते हैं सिकमी किरायेदार
नगर निगम अपनी दुकान जिस व्यापारी को किराए पर देता है, वह किराये की दुकान को किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर दे देता है। इस सेकेंड पार्टी को सिकमी किरायेदार कहा जाता है।
कार्यकारिणी लगा चुकी है नामांतरण पर रोक
नगर निगम से जुड़े सूत्रों की मानें तो सिकमी किरायेदारों का नामांतरण करने की पटकथा तैयार की जा रही है। इसके बदले में उनसे मोटी रकम मिलने की उम्मीद भी लगाई जा रही है। नगर निगम की कार्यकारिणी ने सर्वसहमति से प्रस्ताव पारित कर नामांतरण पर रोक लगा रखी है। लेकिन, यह रोक भी शायद अधिकारियों पर भारी न पड़े, क्योंकि कार्यकारिणी द्वारा पारित कई प्रस्तावों पर अभी तक अमल ही नहीं किया गया है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद विधिक राय लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सभी बिल कलेक्टरों को पारदर्शिता के साथ सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।
रोहन सिंह, अपर नगर आयुक्त, नगर निगम झांसी।