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Jhansi News: मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों का टोटा, इलाज कराने दूसरे शहरों में जा रहे कैंसर के मरीज

Tue, 18 Jun 2024 02:32 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 18 Jun 2024 02:32 AM IST
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Shortage of doctors in medical college, cancer patients going to other cities for treatment
- मेडिकल कॉलेज के कैंसर विभाग में न ऑकोलॉजी सर्जन और न ऑकोलॉजी फिजिशियन, रेडियोथैरेपिस्ट कर रहे कीमोथैरेपी
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड में कैंसर का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी जांच में छह माह के अंदर 270 से ज्यादा रोगियों में कैंसर की पुष्टि हुई है। अधिकांश रोगी मेडिकल कॉलेज के बजाय बाहर उपचार कराने चले जाते हैं। इसका कारण है कि मेडिकल कॉलेज के कैंसर विभाग में न ऑन्कोलॉजी फिजिशियन है और न ऑन्कोलॉजी सर्जन। रेडियो थैरेपिस्ट हैं, जो दवाओं व कीमोथैरेपी से उपचार करते हैं।

कैंसर रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन माहुर और पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मयंक सिंह मानते हैं कि बुंदेलखंड में तेजी से कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ रही है। उम्रदराज ही नहीं युवा भी तेजी से कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। इसकी बायोप्सी अथवा साइटो पैथोलॉजी से पुष्टि हो चुकी है। यह आंकड़ा तो सिर्फ मेडिकल कॉलेज का है, यदि प्राइवेट पैथोलॉजी का शामिल किया जाए तो काफी चिंताजनक होगा। मेडिकल कॉलेज में कैंसर विभाग होने के बावजूद अधिकांश रोगी अपना उपचार कराने के लिए ग्वालियर, भोपाल, वाराणसी आदि जगह पर चले जाते हैं। इसकी वजह कैंसर विभाग में सिर्फ रेडियोथैरेपिस्ट की तैनाती होना है। यह डॉक्टर रेडियोथैरेपी के मूल काम के बजाय कीमोथैरेपी आदि से उपचार करते हैं।
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0- एक नजर में कैंसर विभाग
- विभागाध्यक्ष डाॅ. सचिन माहुर व डॉ. देव यादव
- 17 बेड का वार्ड, जिनमें कीमो थैरेपी के भर्ती होते हैं रोगी
- रोगियों की देखरेख के लिए तैनात रहती हैं चार नर्स


0- ऑन्कोलॉजी फिजिशन:- ये कीमोथैरेपी, हार्मोनल थैरेपी या इम्यूनोथैरेपी से उपचार करके कैंसर के निदान, उपचार और प्रबंधन पर केंद्रित होते हैं।
0- ऑन्कोलॉजी सर्जन:- सामान्य सर्जनों को कैंसर से संबंधित सर्जरी के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जो कैंसर रोगी के लिए हितकारी होता है।

0- रेडियोथैरेपिस्ट:- कैंसर रोगी का कोबाल्ट मशीन के माध्यम से उपचार किया जाता है। कोबाल्ट मशीन कैंसर की कोशिकाओं का खत्म करती है।



0- वर्जन -----
कैंसर विभाग में ऑन्कोलॉजी फिजिशियन और ऑन्कोलॉजी सर्जन की जरूरत है। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को निर्णय लेना है।
- डॉ. सचिन माहुर, कैंसर रोग विभागाध्यक्ष मेडिकल कॉलेज
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