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यौन संक्रमण को न करें नजरअंदाज, सही जानकारी और जागरूकता से करें खत्म
Fri, 12 Feb 2021 01:44 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 12 Feb 2021 01:44 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
किशोरावस्था में किशोर, किशोरियों के शरीर में शारीरिक परिवर्तन के साथ कुछ ऐसी समस्याएं भी हो जाती हैं, जिससे सही जानकारी और जागरूकता के साथ उबरा जा सकता है। इसमें से एक है प्रजनन मार्ग और यौन संचारी संबंधी संक्रमण। जनपद में स्थापित साथिया क्लीनिक के काउंसलर के अनुसार बहुत से किशोर, किशोरी क्लीनिक पर इस समस्या के साथ आते हैं। हालांकि, उनको यह पता नहीं होता है कि यह समस्या क्या है।
किशोर साथिया क्लीनिक के काउंसलर शिवेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि वर्ष 2020 में जनवरी में 112, फरवरी 117, मार्च में 106 किशोर आरटीआई, एसटीआई संबंधी समस्या के आए। वहीं, कोविड में कार्यरत रहने के कारण जनवरी 2021 में फिर से क्लीनिक शुरू हुआ है, जहां 86 किशोर इस समस्या को लेकर आए। वहीं, किशोरी साथिया क्लीनिक की काउंसलर हेमलता ने बताया कि कोविड के पहले हर माह करीब 60-70 किशोरियां, आरटीआई, एसटीआई संबंधी समस्या को लेकर क्लीनिक पर आती थी। कोविड के बाद से 25-30 लड़कियां ही आ रही हैं। इन समस्याओं का मुख्य कारण साफ-सफाई, असुरक्षित यौन संबंध और जागरूकता की कमी है।
प्रजनन, यौन स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने की है जरूरत
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के मैनेजर डॉ. रामबाबू ने बताया कि अक्सर किशोर, किशोरियां प्रजनन और यौन संबंधी समस्याओं पर खुलकर बात नहीं कर पाते हैं। इसका मुख्य कारण उनका शर्म महसूस करना या निजी जानकारी किसी को बता देने का भय होता है। जबकि, हमें ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है कि इस विषय पर खुलकर बात हो सके।
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परामर्श के लिए यहां करें संपर्क
परामर्श के लिए किशोरियां जनपद के जिला महिला अस्पताल के कमरा नंबर 10 में संचालित साथिया क्लीनिक की काउंसलर से मिल सकती हैं। वहीं, किशोर जिला अस्पताल के कमरा नंबर 16 में संचालित साथिया क्लीनिक के काउंसलर से मिल सकते हैं।
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किशोर साथिया क्लीनिक के काउंसलर शिवेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि वर्ष 2020 में जनवरी में 112, फरवरी 117, मार्च में 106 किशोर आरटीआई, एसटीआई संबंधी समस्या के आए। वहीं, कोविड में कार्यरत रहने के कारण जनवरी 2021 में फिर से क्लीनिक शुरू हुआ है, जहां 86 किशोर इस समस्या को लेकर आए। वहीं, किशोरी साथिया क्लीनिक की काउंसलर हेमलता ने बताया कि कोविड के पहले हर माह करीब 60-70 किशोरियां, आरटीआई, एसटीआई संबंधी समस्या को लेकर क्लीनिक पर आती थी। कोविड के बाद से 25-30 लड़कियां ही आ रही हैं। इन समस्याओं का मुख्य कारण साफ-सफाई, असुरक्षित यौन संबंध और जागरूकता की कमी है।
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प्रजनन, यौन स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने की है जरूरत
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के मैनेजर डॉ. रामबाबू ने बताया कि अक्सर किशोर, किशोरियां प्रजनन और यौन संबंधी समस्याओं पर खुलकर बात नहीं कर पाते हैं। इसका मुख्य कारण उनका शर्म महसूस करना या निजी जानकारी किसी को बता देने का भय होता है। जबकि, हमें ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है कि इस विषय पर खुलकर बात हो सके।
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परामर्श के लिए किशोरियां जनपद के जिला महिला अस्पताल के कमरा नंबर 10 में संचालित साथिया क्लीनिक की काउंसलर से मिल सकती हैं। वहीं, किशोर जिला अस्पताल के कमरा नंबर 16 में संचालित साथिया क्लीनिक के काउंसलर से मिल सकते हैं।