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मेंहदी फीकी पड़ने से पहले हुई विधवा: शादी के सात दिन बाद युवक ने दी जान, नौ संतान में इकलौता बचा था शिवम

Wed, 18 Dec 2024 09:49 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, झांसी/मोंठ
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी/मोंठ Published by: आकाश दुबे Updated Wed, 18 Dec 2024 09:49 PM IST
सार

शिवम माता-पिता की नौ संतानों में इकलौता पुत्र बचा था। उनके शेष संतानों की असमय मौत हो चुकी। सभी बच्चों की असमय मौत हो जाने से परिवार के लोग अंधविश्वास पर यकीन करने लगे थे।

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Seven days after marriage in Jhansi groom committed suicide by being run over by train
शादी के सात दिन बाद युवक ने दी जान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झांसी के मोंठ के भरोसा गांव निवासी युवक ने शादी के महज सात दिन बाद ट्रेन से कटकर जान दे दी। बुधवार सुबह उसका शव भरोसा ओवरब्रिज से कुछ दूर रेल पटरी से बरामद हुआ। सूचना पर परिजन भी रोते-बिलखते पहुंच गए। परिजन उसके सुसाइड करने की वजह नहीं बता सके। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

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मोंठ के भरोसा गांव निवासी शिवम (21) पुत्र ठाकुरदास अहिरवार अपने जीजा के साथ रहकर गोल गप्पे की दुकान चलता था। 11 दिसंबर को उसकी शादी दतिया निवासी युवती से हुई थी। शादी के बाद से बहू घर में थी। परिजनों ने बताया कि बुधवार सुबह वह दुकान से सामान लाने की बात कहकर निकला था। काफी देर तक वापस न लौटने पर जब फोन किया तब वह स्विच ऑफ बताने लगा। 

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दोपहर में उसका शव ओवर ब्रिज से कुछ दूर रेलवे ट्रैक पर खंभा संख्या 1180/12 के पास पड़ा मिला। सूचना मिलने पर थाना प्रभारी सरिता मिश्रा भी पुलिस फोर्स के साथ पहुंच गईं। परिवार के लोग भी वहां आ गए। शिवम की मौत की खबर लगते ही मां कुंवर एवं पत्नी काजल रोते-रोते अचेत हो गईं। दुकान चलाने के साथ ही पढ़ाई भी करता था। थाना प्रभारी सरिता मिश्रा के मुताबिक उसके बीमार रहने की बात मालूम चली है। वह दवा भी लेकर आया था हालांकि परिजनों ने सुसाइड की वजह नहीं बताई है। मामले की छानबीन कराई जा रही है।

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नौ संतान में इकलौता बचा था शिवम
शिवम माता-पिता की नौ संतानों में इकलौता पुत्र बचा था। उनके शेष संतानों की असमय मौत हो चुकी। शिवम के साथ सिर्फ एक बहन जीवित बची है। सभी बच्चों की असमय मौत हो जाने से परिवार के लोग अंधविश्वास पर यकीन करने लगे थे। शिवम की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। महज सात दिन पहले शादी करके आई बहू के हाथ की अभी मेंहदी भी नहीं छूटी थी कि उसके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

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