{"_id":"5ff4aca58ebc3e30b80b2f8d","slug":"school-building-damage-students-future-in-problem-jhansi-news-jhs1852971190","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘भविष्य’ संवारने वाले स्कूल हुए बूढ़े, जर्जर भवन कभी भी हो सकते धराशायी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘भविष्य’ संवारने वाले स्कूल हुए बूढ़े, जर्जर भवन कभी भी हो सकते धराशायी
विज्ञापन
सागर गेट अंदर के प्राथमिक विद्यालय की छत की दरारे बताते शिक्षक जो बरसात में टपकती है। अमर उजाला
झांसी। जिले में देश का भविष्य संवारने वाले कई माध्यमिक, पूर्व माध्यमिक स्कूल काफी बूढ़े हो चुके हैं। हालात ये हैं कि जर्जर भवन कभी भी जवाब दे सकते हैं। ऐसे में यहां पढ़ने वाले नौनिहालों का जीवन खतरे में है। किसी ने सोचा भी नहीं था कि गाजियाबाद में चंद महीनों पहले हुआ निर्माण, इतने लोगों की जान ले लेगा। ऐसे में झांसी में तो दशकों पुराने भवनों में छात्र-छात्राएं पढ़ने को मजबूर हैं। अमर उजाला ने जब स्कूलों की हकीकत परखी तो सरकारी मशीनरी के दावों से इतर बदहाल तस्वीर नजर आई।
इमारत सालों पुरानी, बारिश में छत से गिरता पानी
सागर गेट अंदर स्थित प्राइमरी और पूर्व माध्यमिक विद्यालय एक ही परिसर में संचालित है। अगल-बगल स्थित होने के कारण दोनों स्कूलों की छत मिली हुई है। इस इमारत में निर्माण कई दशकों में पहले हुआ था। अब यहां की छत बेहद कमजोर हो गई हैं। कुछ समय पहले स्कूल की रंगाई-पुताई का तो काम किया गया लेकिन बारिश में यहां की छतें टपकने लगती हैं। बरसात में बच्चों की छुट्टी करनी पड़ जाती है। स्टाफ का कहना है कि हर समय हादसे का डर सताता रहता है। ऐसे में इमारत का जीर्णोद्धार जल्द होना चाहिए। इन विद्यालयों में प्रवेश करने वाले मुख्य द्वार के बगल में भी पुरानी जर्जर स्कूल की इमरत बनी हुई हैं, जो कभी भी धराशायी हो सकती हैं। बच्चे इसी जर्जर इमारत के पास से गुजरते हैं।
पिलर कमजोर, छत में आ गई ढलान
बड़ागांव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय भोजला की स्थिति भी बेहद खराब है। स्कूल की दीवारों में दरार आ चुकी है। इसके अलावा पिलर भी बेहद कमजोर हो चुके है। बरामद की छत में तो ढलान तक आ गई है। कक्षाओं की छत भी जर्जर है। ऐसे में यहां पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। परिसर में ही क्रिकेट खेल रहे युवकों ने बताया कि यहां पर स्कूल की देखरेख के नाम पर भी खानापूरी की गई। कभी भी यहां पर गाजियाबाद जैसा हादसा हो सकता है।
विज्ञापन
आंगनबाड़ी केंद्र में बंधी मिलीं बकरियां
लहरगिर्द के आंगनबाड़ी केंद्र में दोपहर तीन बजे अमर उजाला की टीम पहुंची तो यहां पर बकरियां बंधी हुई थीं। इसके अलावा आसपास चारा भी दिखा। आसपास काफी गंदगी भी थी। इमारत भी बेहद पुरानी और जर्जर हालात में है। आसपास के लोगों ने बताया कि यहां पर लगभग 50 बच्चे पंजीकृत हैं। मगर केंद्र की हालत बेहद दयनीय है।
बरसात में स्कूल परिसर हो जाता लबालब
सिमरधा कापूर्व माध्यमिक कंपोजिट विद्यालय दोपहर तीन बजे तक बंद हो चुका था। गेट के पास ही खड़े वृद्ध गणेश ने बताया कि स्कूल में बारिश के समय स्थिति बेहद खराब हो जाती है। जमीन समतल न होने की वजह से बारिश के दौरान परिसर में पानी भर जाता है। इससे बच्चों को काफी परेशानी होती है। यदि यहां पर एपेक्स लग जाएं तो विद्यार्थियों को पढ़ने में दिक्कत नहीं होगी।
चार विद्यालयों के जीर्णोद्धार का काम चल रहा है। इसके अलावा 12 विद्यालय भी स्मार्ट सिटी के तहत संवारे जाने हैं। जहां भी भवन पुराने हैं, जल्द ही दुरुस्त करा दिए जाएंगे। - हरिवंश कुमार, बीएसए।
विज्ञापन
इमारत सालों पुरानी, बारिश में छत से गिरता पानी
सागर गेट अंदर स्थित प्राइमरी और पूर्व माध्यमिक विद्यालय एक ही परिसर में संचालित है। अगल-बगल स्थित होने के कारण दोनों स्कूलों की छत मिली हुई है। इस इमारत में निर्माण कई दशकों में पहले हुआ था। अब यहां की छत बेहद कमजोर हो गई हैं। कुछ समय पहले स्कूल की रंगाई-पुताई का तो काम किया गया लेकिन बारिश में यहां की छतें टपकने लगती हैं। बरसात में बच्चों की छुट्टी करनी पड़ जाती है। स्टाफ का कहना है कि हर समय हादसे का डर सताता रहता है। ऐसे में इमारत का जीर्णोद्धार जल्द होना चाहिए। इन विद्यालयों में प्रवेश करने वाले मुख्य द्वार के बगल में भी पुरानी जर्जर स्कूल की इमरत बनी हुई हैं, जो कभी भी धराशायी हो सकती हैं। बच्चे इसी जर्जर इमारत के पास से गुजरते हैं।
विज्ञापन
पिलर कमजोर, छत में आ गई ढलान
बड़ागांव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय भोजला की स्थिति भी बेहद खराब है। स्कूल की दीवारों में दरार आ चुकी है। इसके अलावा पिलर भी बेहद कमजोर हो चुके है। बरामद की छत में तो ढलान तक आ गई है। कक्षाओं की छत भी जर्जर है। ऐसे में यहां पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। परिसर में ही क्रिकेट खेल रहे युवकों ने बताया कि यहां पर स्कूल की देखरेख के नाम पर भी खानापूरी की गई। कभी भी यहां पर गाजियाबाद जैसा हादसा हो सकता है।
विज्ञापन
आंगनबाड़ी केंद्र में बंधी मिलीं बकरियां
लहरगिर्द के आंगनबाड़ी केंद्र में दोपहर तीन बजे अमर उजाला की टीम पहुंची तो यहां पर बकरियां बंधी हुई थीं। इसके अलावा आसपास चारा भी दिखा। आसपास काफी गंदगी भी थी। इमारत भी बेहद पुरानी और जर्जर हालात में है। आसपास के लोगों ने बताया कि यहां पर लगभग 50 बच्चे पंजीकृत हैं। मगर केंद्र की हालत बेहद दयनीय है।
बरसात में स्कूल परिसर हो जाता लबालब
सिमरधा कापूर्व माध्यमिक कंपोजिट विद्यालय दोपहर तीन बजे तक बंद हो चुका था। गेट के पास ही खड़े वृद्ध गणेश ने बताया कि स्कूल में बारिश के समय स्थिति बेहद खराब हो जाती है। जमीन समतल न होने की वजह से बारिश के दौरान परिसर में पानी भर जाता है। इससे बच्चों को काफी परेशानी होती है। यदि यहां पर एपेक्स लग जाएं तो विद्यार्थियों को पढ़ने में दिक्कत नहीं होगी।
चार विद्यालयों के जीर्णोद्धार का काम चल रहा है। इसके अलावा 12 विद्यालय भी स्मार्ट सिटी के तहत संवारे जाने हैं। जहां भी भवन पुराने हैं, जल्द ही दुरुस्त करा दिए जाएंगे। - हरिवंश कुमार, बीएसए।