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Jhansi News: हार के बाद अपनों ने दिखाया आईना, संगठन में आत्ममंथन की जरूरत
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में भाजपा की हार के बाद पार्टी की महिला नेताओं ने संगठन की कार्यप्रणाली और जमीनी स्तर पर संपर्क को लेकर सवाल उठाए हैं। नेताओं ने कार्यकर्ताओं की नाराजगी, युवाओं से संवाद की कमी, यूजीसी, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों को हार के संभावित कारणों में शामिल बताया। साथ ही संगठन में आत्ममंथन करने और समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान देने की जरूरत पर जोर दिया।
महिला नेताओं का मानना है कि चुनाव में केवल संगठनात्मक सक्रियता पर्याप्त नहीं, बल्कि मतदाताओं से सीधा संपर्क और उनकी समस्याओं को समझना भी जरूरी है। कार्यकर्ताओं की सुनवाई और मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने जैसे पहलुओं को भी चुनावी परिणाम के संदर्भ में अहम बताया गया।
जमीनी संपर्क की कमी पड़ी भारी
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की सदस्य कंचन जायसवाल ने कहा कि युवाओं को मतदान केंद्र तक लाने के लिए जमीनी स्तर पर संपर्क और व्यक्तिगत संवाद की कमी रही। मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने और उनसे बेहतर तालमेल बनाने की जरूरत थी।
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भाजपा की निवर्तमान महिला जिलाध्यक्ष प्रीति शर्मा ने कहा कि धरातल पर मतदाताओं तक पहुंच बनाने के प्रयास पर्याप्त नहीं रहे। इसका नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा। उन्होंने यूजीसी के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि इसका असर मतदाताओं के उत्साह पर पड़ा।
कार्यकर्ताओं की नाराजगी और मुद्दों का असर
भाजपा महिला मोर्चा की महामंत्री नीलम सकरैया ने कहा कि कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं होना और उनकी नाराजगी भी हार की वजहों में शामिल रही। उन्होंने यूजीसी, पेपर लीक और मतदाता सूची में नाम नहीं जुड़ पाने की समस्या का जिक्र किया। उनका आरोप था कि विपक्ष ने एसआईआर के मामले में लोगों के बीच भ्रम फैलाया, जिसका असर भी चुनाव पर पड़ा।
भाजपा महिला मोर्चा की शोध प्रमुख रूबी कुशवाह ने संगठन में आत्ममंथन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि संगठन में पद से ज्यादा दायित्व महत्वपूर्ण है। समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान देने, उन्हें समय देने और उनकी बात सुनने की जरूरत है। संगठन को अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा कर जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से जुड़ाव मजबूत करना चाहिए।
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झांसी। इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में भाजपा की हार के बाद पार्टी की महिला नेताओं ने संगठन की कार्यप्रणाली और जमीनी स्तर पर संपर्क को लेकर सवाल उठाए हैं। नेताओं ने कार्यकर्ताओं की नाराजगी, युवाओं से संवाद की कमी, यूजीसी, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों को हार के संभावित कारणों में शामिल बताया। साथ ही संगठन में आत्ममंथन करने और समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान देने की जरूरत पर जोर दिया।
महिला नेताओं का मानना है कि चुनाव में केवल संगठनात्मक सक्रियता पर्याप्त नहीं, बल्कि मतदाताओं से सीधा संपर्क और उनकी समस्याओं को समझना भी जरूरी है। कार्यकर्ताओं की सुनवाई और मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने जैसे पहलुओं को भी चुनावी परिणाम के संदर्भ में अहम बताया गया।
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जमीनी संपर्क की कमी पड़ी भारी
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की सदस्य कंचन जायसवाल ने कहा कि युवाओं को मतदान केंद्र तक लाने के लिए जमीनी स्तर पर संपर्क और व्यक्तिगत संवाद की कमी रही। मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने और उनसे बेहतर तालमेल बनाने की जरूरत थी।
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भाजपा की निवर्तमान महिला जिलाध्यक्ष प्रीति शर्मा ने कहा कि धरातल पर मतदाताओं तक पहुंच बनाने के प्रयास पर्याप्त नहीं रहे। इसका नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा। उन्होंने यूजीसी के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि इसका असर मतदाताओं के उत्साह पर पड़ा।
कार्यकर्ताओं की नाराजगी और मुद्दों का असर
भाजपा महिला मोर्चा की महामंत्री नीलम सकरैया ने कहा कि कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं होना और उनकी नाराजगी भी हार की वजहों में शामिल रही। उन्होंने यूजीसी, पेपर लीक और मतदाता सूची में नाम नहीं जुड़ पाने की समस्या का जिक्र किया। उनका आरोप था कि विपक्ष ने एसआईआर के मामले में लोगों के बीच भ्रम फैलाया, जिसका असर भी चुनाव पर पड़ा।
भाजपा महिला मोर्चा की शोध प्रमुख रूबी कुशवाह ने संगठन में आत्ममंथन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि संगठन में पद से ज्यादा दायित्व महत्वपूर्ण है। समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान देने, उन्हें समय देने और उनकी बात सुनने की जरूरत है। संगठन को अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा कर जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से जुड़ाव मजबूत करना चाहिए।