{"_id":"636bf6cec8d33f3c5545b231","slug":"sarkari-yojna-old-man-disturb-jhansi-news-jhs2325678133","type":"story","status":"publish","title_hn":"ड्डा में मकान के लिए फरियाद लेकर भटक रहा 78 साल का बुजुर्ग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ड्डा में मकान के लिए फरियाद लेकर भटक रहा 78 साल का बुजुर्ग
विज्ञापन
झांसी। सरकारी योजनाओं का हाल किसी से छिपा नहीं है। योजनाओं का लाभ लेने के लिए जहां तमाम लोग भटक रहे हैं। उन्हीं में से एक हैं 78 साल के बुजुर्ग रामजी। ये कई महीनों से डूडा योजना में मकान पाने के लिए भटक रहे हैं। स्थिति यह है कि रामजी को इनके बेटों ने भी घर से निकाल दिया है।
मुंबई में पैदा हुए रामजी के दादा 1968 में बबीना आए थे। यहां उनकी जमीन मिलेट्री ने कवर कर ली और उनाव बालाजी रोड स्थित केशवपुर में जमीन का पट्टा दे दिया। रामजी बताते हैं कि 1996 में उनके हिस्से में तीन एकड़ जमीन आई थी। उधर, मुंबई में शादी के बाद उनके दो बेटे और एक बेटी हुई। अपना परिवार चलाने के लिए वह एक फाइबर फैक्टरी में काम करते थे। जिसके चलते उन्हें बीमारी हो गई। इसी के चलते अब तक वह पांच बार एंजियोप्लास्टी करवा चुके हैं। इसके चलते उनका काम छूट गया और वे बेकार हो गए।
चार साल पहले मुंबई में उनके बेटों ने उन्हें घर निकाल दिया। वह इधर-उधर भटकते रहे तो झांसी पहूज नदी के पास रहने वाले उनके चचेरे भाई उन्हें अपने साथ ले आए। अप्रैल 2022 में उन्होंने डूडा योजना में मकान के लिए आवेदन किया था। रामजी का रहना है कि जुलाई 2022 में उनके कागजातों का सत्यापन भी हो गया। तहसील और लखनऊ से कई बार कॉल भी आ चुकी लेकिन मकान मिलने के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी जा रही। वह हफ्ते में कई बार डीएम कार्यालय में अपनी अर्जी लगाते हैं, तहसील दिवस में फरियाद कर चुके लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि इस बुुढ़ापे में बची हुई जिंदगी पत्नी के साथ गुजारना चाहते हैं।
विज्ञापन
कार्यालय में आने वाले हर आवेदन की जांच की जाती है। पात्र आवेदकों को आवास आवंटित कर दिए जाते हैं। यह मामला अभी संज्ञान में आया है। पात्र होने पर आवास आवंटित किया जाएगा।
- राजीव शुक्ला, परियोजना अधिकारी - डूडा
विज्ञापन
मुंबई में पैदा हुए रामजी के दादा 1968 में बबीना आए थे। यहां उनकी जमीन मिलेट्री ने कवर कर ली और उनाव बालाजी रोड स्थित केशवपुर में जमीन का पट्टा दे दिया। रामजी बताते हैं कि 1996 में उनके हिस्से में तीन एकड़ जमीन आई थी। उधर, मुंबई में शादी के बाद उनके दो बेटे और एक बेटी हुई। अपना परिवार चलाने के लिए वह एक फाइबर फैक्टरी में काम करते थे। जिसके चलते उन्हें बीमारी हो गई। इसी के चलते अब तक वह पांच बार एंजियोप्लास्टी करवा चुके हैं। इसके चलते उनका काम छूट गया और वे बेकार हो गए।
विज्ञापन
चार साल पहले मुंबई में उनके बेटों ने उन्हें घर निकाल दिया। वह इधर-उधर भटकते रहे तो झांसी पहूज नदी के पास रहने वाले उनके चचेरे भाई उन्हें अपने साथ ले आए। अप्रैल 2022 में उन्होंने डूडा योजना में मकान के लिए आवेदन किया था। रामजी का रहना है कि जुलाई 2022 में उनके कागजातों का सत्यापन भी हो गया। तहसील और लखनऊ से कई बार कॉल भी आ चुकी लेकिन मकान मिलने के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी जा रही। वह हफ्ते में कई बार डीएम कार्यालय में अपनी अर्जी लगाते हैं, तहसील दिवस में फरियाद कर चुके लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि इस बुुढ़ापे में बची हुई जिंदगी पत्नी के साथ गुजारना चाहते हैं।
विज्ञापन
कार्यालय में आने वाले हर आवेदन की जांच की जाती है। पात्र आवेदकों को आवास आवंटित कर दिए जाते हैं। यह मामला अभी संज्ञान में आया है। पात्र होने पर आवास आवंटित किया जाएगा।
- राजीव शुक्ला, परियोजना अधिकारी - डूडा