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समाज और कानून साथ आकर रोकें बाल यौन शोषण: डीआईजी

Thu, 04 Oct 2018 02:25 AM IST
amarujala
amarujala Updated Thu, 04 Oct 2018 02:25 AM IST
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samaj or kanun ke saht roke yon sosan
sangosti, jhansi news - फोटो : amar ujala, jhansi news
‘बाल यौन शोषण रोकने में समाज एवं कानून की भूमिका’ विषय पर बोलते हुए डीआईजी सुभाष सिंह बघेल ने कहा कि बाल यौन शोषण रोकने के लिए समाज और कानून साथ आएं। एक तरफ जहां देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है, तो वहीं दूसरी तरफ समाज दूषित और नैतिक रूप से पतित हो रहा है। महिलाओं और पुरुषों मेें असमानता की गहरी खाई है। समाज, कानून औैर सामाजिक संस्थाओं को एकजुट होकर समाज में फैली बुराइयों को दूर करने की आवश्यकता है, ताकि देश का भविष्य सुरक्षित हो सके।
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राजकीय संग्रहालय में परमार्थ समाजसेवी संस्था व चाइल्ड लाइन द्वारा आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में अपराधों की श्रेणी एवं कारणों पर गहन अध्ययन किया, जिसमें पाया कि अब नाबालिगों के साथ शारीरिक एवं यौनिक हिंसा के आपराधिक मामले बढ़े हैं।
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बाल कल्याण समिति की सदस्य डॉ. ममता जैन ने कहा कि समाज में विकृतियां बढ़ रही हैं। परिवार टूट रहे हैं, जिसके कारण बच्चों को सही दिशा और मार्गदर्शन प्राप्त नहीं हो पा रहा है। परमार्थ संस्था के सचिव संजय सिंह ने कहा कि कल तक देश में महिलाएं असुरक्षित थीं, आज बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के उपाचार्य डॉ. सीपी पैन्युली ने कहा कि बाल यौन हिंसा आज समाज में महामारी की तरफ फैल रहा है। अभिभावकों को अपने बच्चों को सही और गलत के बारे में बताना चाहिए।
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कला संकाय के अधिवक्ता प्रो. सीबी सिंह ने कहा कि हमारा आचरण बच्चों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनता है। पूर्व महापौर किरन राजू बुकसेलर ने कहा कि यौन हिंसा समाज में फैली गंभीर बुराई है। जीआरपी थानाध्यक्ष एके सिंह ने कहा कि समाज और कानून एक श्रृंखला की दो कड़ियां हैं। इसी समाज से कानून निकला है। कानून से ज्यादा जरूरी है कि समाज जागरूक हो और बच्चों को जागरूक करें।

इस मौके पर डॉ. एस के राय, बाल कल्याण समिति के सदस्य आबिद खान, साहित्यकार डॉ. कुंती हरिराम कुमार, बाल संरक्षण अधिकारी अभिषेक मिश्रा, डॉ. श्वेता पांडेय, नेहा मिश्रा, संध्या सिंह, एसआई राजकुमारी गुर्जर, संतोष द्विवेदी मौजूद रहे।
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