फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Salute to the magicians of the game, the world is knowing their names

Jhansi News: खेल के जादूगरों को सलाम, दुनिया जान रही इनका नाम

Wed, 05 Apr 2023 11:47 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 05 Apr 2023 11:47 PM IST
विज्ञापन
Salute to the magicians of the game, the world is knowing their names
झांसी। मराठों का शहर झांसी इतिहास के पन्नों में आज भी सुर्खियों में है। रानी लक्ष्मीबाई की वीरगाथा यहां युगों तक जिंदा रहेगी। लेकिन, झांसी की स्वर्णिम गाथा यहीं तक सीमित नहीं है। यहां खेल जगत में भी कई ऐसे खिलाड़ी निकले हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसा मुकाम हासिल किया जिसने झांसी को दुनिया के मानचित्र पर हमेशा के लिए बुलंदियों पर पहुंचा दिया। इनमें हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का नाम सबसे ऊपर है। इनके नाम पर सरकार ने मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार भी शुरू किया। इनके पुत्र अशोक ध्यानचंद ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिक्का जमाया। इसके अलावा शहर की आबोहवा में पले-बढ़े अब्दुल अजीज, सुबोध खांडेकर, नेहा सिंह, जमशेर खान, तुषार खांडेकर, केपी यादव, रिषभ आनंद, सौरभ आनंद, अब्दुल अहद और आसिफ अली ने भी हॉकी में अपने नाम का सितारा बुलंद किया। इनके अलावा एथलेटिक्स में भी खिलाड़ी शैली सिंह ने दुनिया भर में झांसी का परचम लहराया है। ऐसा नहीं है कि ये उपलब्धि इन्हें हाथों-हाथ मिल गई, इनमें से कई ने भूख-प्यास और बड़े-बड़े आर्थिक संकटों से जूझकर खुद को इस काबिल बनाया है। युवा खिलाड़ी शैली सिंह भी इन्हीं में से एक हैं। इनका कहना है कि दिल कदम-कदम पर संकटों से घबराता है, लेकिन मुकाम हासिल करने के लिए अपना हौसला कभी न खोने दें। हौसले के बल पर ही नन्हा पक्षी भी आसमान पर उड़कर दिखाता है। उधर, अब्दुल हमीद ने 1962 में बैंकाक में आयोजित एशियन गेम्स में बेहतर प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल हासिल किया था। वहीं, तालपुरा निवासी जगदीश यादव ने सन 1976 में पाकिस्तान में आयोजित कायदे आजम चैंपियंस ट्रॉफी में प्रतिभाग किया था।
विज्ञापन

पिता-पुत्र ने बनाया मुकाम, बच्चा-बच्चा जानता है नाम
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का नाम ही काफी है, बेटे अशोक ध्यानचंद को मिल चुका अर्जुन पुरस्कार
झांसी। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को यूं तो प्रयागराज में हुआ था, लेकिन 10 साल की उम्र में वह पिता के साथ झांसी के मोहल्ला रायगंज सीपरी बाजार आ गए थे। इनके पिता सूबेदार थे। 16 साल की उम्र में इन्हें बच्चा प्लाटून में भर्ती करा दिया गया था। इन्हें बचपन से ही हॉकी खेलने का शौक था। जहां भी उन्हें जब मौका मिलता था वह हॉकी खेलते थे। सन 1926 में इन्होंने भारतीय हॉकी में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहला गोल किया था। वहीं, 1928 में इन्होंने ओलंपिक खेला था, इसमें उन्होंने 15 गोल किए थे। यही से इन्हें हॉकी के जादूगर का खिताब मिला। भारत सरकार ने इन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया था। इनके पुत्र अशोक ध्यानचंद भी भारतीय टीम की ओर से तीन विश्व कप खेल चुके हैं। 1975 में विश्व कप जीतने वाली इंडिया टीम के सदस्य भी रहे। हॉकी के खेल में महारथ हासिल करने पर इन्हें 1974 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
विज्ञापन

--
पिता-पुत्र अब्दुल अजीज और अब्दुल अहद की जोड़ी रोशन कर रही नाम
झांसी। सैंयर गेट निवासी अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी अब्दुल अजीज सन 1984 से 1990 तक इंडिया की टीम में शामिल रहे। इस दौरान उन्होंने कोरिया में आयोजित एशियन गेम्स, पाकिस्तान और आस्ट्रेलिया में चैंपियंस ट्रॉफी के साथ ही सन 1986 में लंदन में आयोजित वर्ल्ड कप में अपने खेल का प्रदर्शन किया था। अब्दुल अजीज रेलवे में सेवारत हैं। ये बच्चों को हॉकी की बारीकियां भी सिखाते हैं। इनके बेटे अब्दुल अहद ने वर्ष 2023 में कोरिया और इंडिया एवं इंडिया बनाम सिंगापुर जूनियर इंडिया कैंप में अपने खेल का प्रदर्शन किया। अब्दुल अहद ने अभी भी अपनी प्रैक्टिस जारी रखी है। यह अपने पिता से भी हॉकी की बारीकियां सीखते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

एशिया कप में किया था खेल का शानदार प्रदर्शन
झांसी। रेलवे में इन दिनों टीटीई जमशेर खान ने सन 1990 में हिरोशिमा में आयोजित एशिया कप में अपने खेल का शानदार प्रदर्शन किया था। इन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। जमशेर खान अपने परिवार के साथ खातीबाबा मोहल्ले में रहते हैं। खाली समय में ये मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण भी देते हैं। नए-नए खिलाड़ी इनके बारे में जानकर गर्व महसूस करते हैं।
---
लंदन ओलंपिक के दौरान हॉकी टीम का किया था प्रतिनिधित्व
झांसी। तुषार खांडेकर ने 2012 में लंदन ओलंपिक के दौरान भारत की हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व किया था। तुषार के पिता, चाचा और बडे़ भाई भी हॉकी खेल के प्रख्यात खिलाड़ी रहे हैं। तुषार जूनियर हॉकी इंडिया की विजेता टीम के सदस्य भी रहे हैं। तुषार नरसिंह राव टौरिया इलाके में परिवार के साथ रहते हैं।
--
भारतीय महिला जूनियर हॉकी टीम में जगह बनाई

झांसी। सीपरी बाजार निवासी एथलीट धीरज सिंह परिहार की पुत्री ज्योति सिंह ने राष्ट्रीय हॉकी खेलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर भारतीय महिला जूनियर हॉकी टीम में जगह बनाई है। नई दिल्ली में आयोजित सब जूनियर नेहरू कप में इन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है। ज्योति ने अब भी अपना अभ्यास जारी रखा है।

शैली के जज्बे को सलाम
झांसी। अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल करने वाली शैली सिंह का बचपन बड़ी ही परेशानियों में गुजरा है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उनकी मां ने कपड़े सिलकर बच्चों को पाल पोसकर बड़ा किया। गांव में खेल का मैदान नहीं होने के कारण शैली ने खेतों में ही अभ्यास शुरू किया था। रस्सी नहीं होने पर मां की साड़ी पर लकड़ी बांधकर अपने खेल को निखारा। आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैली झांसी का नाम रोशन कर रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed