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परीक्षा के लिए 20 लाख रुपये मिले
झांसी/ब्यूरो
Updated Tue, 16 Feb 2016 01:31 AM IST
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झांसी। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में प्रश्न पत्र एवं उत्तर पुस्तिकाओं के लिए शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को अब चिंता नहीं करनी पडे़गी। क्योंकि शासन ने स्कूलोें की वार्षिक परीक्षा के लिए 20 लाख 26 हजार रुपये की धनराशि आवंटित की है।
उल्लेखनीय है कि परिषद के स्कूलों में 14 मार्च से 21 मार्च तक बोर्ड की तर्ज पर परीक्षाएं संपादित होंगी। विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं जहां दूसरे विद्यालय के शिक्षक जांचेंगे, वहीं इन विद्यार्थियों को उनका रिजल्ट कार्ड भी उपलब्ध कराया जाएगा। यह रिजल्ट कार्ड सर्व शिक्षा अभियान के तहत व्यय किया जाएगा।
विभाग के अनुसार परीक्षा के दौरान प्राइमरी छात्र के लिए दस रुपया निर्धारित है, जिसमें से ढाई रुपया प्रश्न पत्र के मुद्रण में एवं साढे़ सात रुपये उत्तर पुस्तिकाओं के लिए हैं। वहीं, उच्च प्राथमिक स्कूल के प्रति छात्र के लिए 20 रुपये निर्धारित हैं, जिसमेें से 5 रुपये प्रश्न पत्र के मुद्रण में एवं 15 रुपये उत्तर पुस्तिकाओं के लिए हैं। प्रश्न पत्रों को लोकल स्तर पर शासन द्वारा गठित समिति मुद्रित कराएगी।
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समिति में डायट प्राचार्य, बीएसए व वरिष्ठ बीईओ शामिल किए गए हैं। वहीं, उत्तर पुस्तिकाओं के लिए धनराशि विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में जाएगी, जो उत्तर पुस्तिकाओं का इंतजाम करेगी। विभाग के मुताबिक उत्तर पुस्तिकाओं क ी
मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत कक्षा पांच एवं आठवीं की उत्तर पुस्तिकाओं को छोड़कर शेष कक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन संबंधित विद्यालयों के शिक्षक ही करेंगे। वहीं, परीक्षा में डेढ़ लाख से ज्यादा विद्यार्थी शामिल होंगे।
परीक्षाएं अब नहीं बनेंगी मजाक
वर्ष 2009 में नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों की परीक्षाएं मजाक बन गईं थीं। क्योंकि अधिनियम के तहत किसी भी विद्यार्थी से कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता था।
जबकि, अधिनियम के लागू होने से पूर्व परीक्षार्थियों से परीक्षा शुल्क लिया जाता था और परीक्षा शुल्क की दम पर ही विभाग प्रश्न पत्र मुद्रित करवाकर उसे परीक्षार्थियों में वितरित कराता था।
हालांकि, परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिकाएं स्वयं अपने धन से जुगाड़ कर लानी पड़ती थीं। विभाग के अनुसार पहली बार शासन ने प्रश्न पत्रों एवं उत्तर पुस्तिकाओं के लिए धनराशि आवंटित की है, जिससे न अब शिक्षकों को परेशान होना पडे़गा और न ही विद्यार्थियों को।
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उल्लेखनीय है कि परिषद के स्कूलों में 14 मार्च से 21 मार्च तक बोर्ड की तर्ज पर परीक्षाएं संपादित होंगी। विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं जहां दूसरे विद्यालय के शिक्षक जांचेंगे, वहीं इन विद्यार्थियों को उनका रिजल्ट कार्ड भी उपलब्ध कराया जाएगा। यह रिजल्ट कार्ड सर्व शिक्षा अभियान के तहत व्यय किया जाएगा।
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विभाग के अनुसार परीक्षा के दौरान प्राइमरी छात्र के लिए दस रुपया निर्धारित है, जिसमें से ढाई रुपया प्रश्न पत्र के मुद्रण में एवं साढे़ सात रुपये उत्तर पुस्तिकाओं के लिए हैं। वहीं, उच्च प्राथमिक स्कूल के प्रति छात्र के लिए 20 रुपये निर्धारित हैं, जिसमेें से 5 रुपये प्रश्न पत्र के मुद्रण में एवं 15 रुपये उत्तर पुस्तिकाओं के लिए हैं। प्रश्न पत्रों को लोकल स्तर पर शासन द्वारा गठित समिति मुद्रित कराएगी।
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समिति में डायट प्राचार्य, बीएसए व वरिष्ठ बीईओ शामिल किए गए हैं। वहीं, उत्तर पुस्तिकाओं के लिए धनराशि विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में जाएगी, जो उत्तर पुस्तिकाओं का इंतजाम करेगी। विभाग के मुताबिक उत्तर पुस्तिकाओं क ी
मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत कक्षा पांच एवं आठवीं की उत्तर पुस्तिकाओं को छोड़कर शेष कक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन संबंधित विद्यालयों के शिक्षक ही करेंगे। वहीं, परीक्षा में डेढ़ लाख से ज्यादा विद्यार्थी शामिल होंगे।
परीक्षाएं अब नहीं बनेंगी मजाक
वर्ष 2009 में नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों की परीक्षाएं मजाक बन गईं थीं। क्योंकि अधिनियम के तहत किसी भी विद्यार्थी से कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता था।
जबकि, अधिनियम के लागू होने से पूर्व परीक्षार्थियों से परीक्षा शुल्क लिया जाता था और परीक्षा शुल्क की दम पर ही विभाग प्रश्न पत्र मुद्रित करवाकर उसे परीक्षार्थियों में वितरित कराता था।
हालांकि, परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिकाएं स्वयं अपने धन से जुगाड़ कर लानी पड़ती थीं। विभाग के अनुसार पहली बार शासन ने प्रश्न पत्रों एवं उत्तर पुस्तिकाओं के लिए धनराशि आवंटित की है, जिससे न अब शिक्षकों को परेशान होना पडे़गा और न ही विद्यार्थियों को।