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मंदी की चपेट में जमीन का कारोबार
ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2015 01:06 AM IST
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झांसी। जिले में जमीन का कारोबार मंदी की चपेट में है। इसका अंदाजा निबंधन विभाग के बैनामों के आंकड़ों को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। पिछले वर्ष के मुकाबले चालू वित्तीय वर्ष की प्रथम छमाही में जनपद में 1,765 बैनामे कम हुए हैं। इससे निबंधन विभाग को तय राजस्व लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो रहा है।
जमीन के कारोबार में अब पहले जैसी बूम की स्थिति नहीं रही है। हालांकि, नित नई कालोनियां तो विकसित हो रही हैं, साथ ही प्लाटिंग भी जारी है। लेकिन, इनमें खरीददारों का टोटा बना हुआ है। इससे बैनामों की संख्या में खासी गिरावट आई है। पिछले वित्तीय वर्ष 2014 - 15 के अप्रैल से लेकर सितंबर माह तक जनपद में निबंधन विभाग द्वारा 29,397 दस्तावेज पंजीकृत किए गए थे।
जबकि, चालू वित्तीय वर्ष 2015 - 16 की इसी अवधि में 27,632 दस्तावेज पंजीकृत हुए हैं। बैनामों की संख्या में आई गिरावट से निबंधन विभाग के लिए शासन द्वारा तय राजस्व लक्ष्य हासिल करना मुश्किल साबित हो रहा है। शासन ने निबंधन विभाग को सितंबर माह तक के लिए 91.01 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य दिया था, जिसके सापेक्ष विभाग 77.25 करोड़ रुपये ही हासिल कर पाया है।
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कंप्यूटरीकृत होंगे रजिस्ट्री कार्यालय
झांसी। निबंधन विभाग ने रजिस्ट्री कार्यालयों को कंप्यूटरीकृत करने की तैयारी कर ली है। हालांकि, झांसी सदर तहसील के कार्यालय में तो यह व्यवस्था पहले से ही है, परंतु अब गरौठा, टहरौली, मोंठ व मऊरानीपुर रजिस्ट्री कार्यालयों को भी कंप्यूटरीकृत कर दिया जाएगा। इसके लिए एक नवंबर तक का समय तय किया गया है। कार्यालयों के कंप्यूटराइज्ड होने से सभी अभिलेख कंप्यूटराइज्ड तैयार होंगे। साथ ही कैमरे से क्रेता - विक्रेता की फोटो ली जाएंगी। साथ ही थंब इंप्रेसन भी लिए जाएंगे। रजिस्ट्री कार्यालयों के कंप्यूटरीकृत होने से बैनामों में घालमेल की गुंजाइश नहीं रहेगी।
‘पिछले साल के मुकाबले इस साल बैनामों की संख्या में खासी कमी आई है। इससे विभाग का राजस्व भी घटा है। हालांकि, साल के आने वाले महीनों में इसमें बढ़ोत्तरी की पूरी संभावना है।’
- ए के पासवान, सहायक महानिरीक्षक (निबंधन)
सरकारी नीतियां हैं जिम्मेदार
झांसी। कंफेडरेशन ऑफ रियल इस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) के झांसी चैप्टर के अध्यक्ष सुरेंद्र राय के अनुसार जमीन /मकान की खरीद - फरोख्त में आई कमी के लिए सरकारी नीतियां भी जिम्मेदार हैं। जमीनों के सर्किल रेट बेतहाशा रूप से बढ़ा दिए गए हैं। कई स्थानों पर कृषि भूमि पर भी वर्ग फीट के हिसाब से सर्किल रेट अदा करना पड़ रहा है। वहीं, आयकर विभाग द्वारा अब जमीन के सर्किल रेट के अनुसार क्रेता - विक्रेता दोनों से आयकर वसूल किया जा रहा है। जबकि, पूर्व में खरीद - फरोख्त की वास्तविक राशि पर कर लिया जाता था। इससे कारोबार में कमी आई है। हालांकि, आने वाले दिनों में इसमें संभावनाएं बहुत हैं। मध्यम वर्ग में प्लाट /मकान की डिमांड व्यापक रूप से बनी हुई है।
कृत्रिम मांग ने बढ़ाए दाम
झांसी। जानकारों की मानें तो जमीन /मकान की खरीद फरोख्त में आई कमी की वजह इनकी कीमत में भारी बढ़ोत्तरी है। पहले लोगों ने निवेश के उद्देश्य से जमीनें खरीद लीं और अब दाम बढ़ाकर उन्हें बेचा जा रहा है। पूर्व में जिस हिसाब से जमीनों की खरीद फरोख्त हुई, उतनी यहां मांग नहीं थीं। लेकिन, निवेश के उद्देश्य से इसकी कृत्रिम मांग पैदा कर दी गई और अब दाम बढ़ने से खरीदारों का टोटा पैदा हो गया है।
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जमीन के कारोबार में अब पहले जैसी बूम की स्थिति नहीं रही है। हालांकि, नित नई कालोनियां तो विकसित हो रही हैं, साथ ही प्लाटिंग भी जारी है। लेकिन, इनमें खरीददारों का टोटा बना हुआ है। इससे बैनामों की संख्या में खासी गिरावट आई है। पिछले वित्तीय वर्ष 2014 - 15 के अप्रैल से लेकर सितंबर माह तक जनपद में निबंधन विभाग द्वारा 29,397 दस्तावेज पंजीकृत किए गए थे।
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जबकि, चालू वित्तीय वर्ष 2015 - 16 की इसी अवधि में 27,632 दस्तावेज पंजीकृत हुए हैं। बैनामों की संख्या में आई गिरावट से निबंधन विभाग के लिए शासन द्वारा तय राजस्व लक्ष्य हासिल करना मुश्किल साबित हो रहा है। शासन ने निबंधन विभाग को सितंबर माह तक के लिए 91.01 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य दिया था, जिसके सापेक्ष विभाग 77.25 करोड़ रुपये ही हासिल कर पाया है।
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कंप्यूटरीकृत होंगे रजिस्ट्री कार्यालय
झांसी। निबंधन विभाग ने रजिस्ट्री कार्यालयों को कंप्यूटरीकृत करने की तैयारी कर ली है। हालांकि, झांसी सदर तहसील के कार्यालय में तो यह व्यवस्था पहले से ही है, परंतु अब गरौठा, टहरौली, मोंठ व मऊरानीपुर रजिस्ट्री कार्यालयों को भी कंप्यूटरीकृत कर दिया जाएगा। इसके लिए एक नवंबर तक का समय तय किया गया है। कार्यालयों के कंप्यूटराइज्ड होने से सभी अभिलेख कंप्यूटराइज्ड तैयार होंगे। साथ ही कैमरे से क्रेता - विक्रेता की फोटो ली जाएंगी। साथ ही थंब इंप्रेसन भी लिए जाएंगे। रजिस्ट्री कार्यालयों के कंप्यूटरीकृत होने से बैनामों में घालमेल की गुंजाइश नहीं रहेगी।
‘पिछले साल के मुकाबले इस साल बैनामों की संख्या में खासी कमी आई है। इससे विभाग का राजस्व भी घटा है। हालांकि, साल के आने वाले महीनों में इसमें बढ़ोत्तरी की पूरी संभावना है।’
- ए के पासवान, सहायक महानिरीक्षक (निबंधन)
सरकारी नीतियां हैं जिम्मेदार
झांसी। कंफेडरेशन ऑफ रियल इस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) के झांसी चैप्टर के अध्यक्ष सुरेंद्र राय के अनुसार जमीन /मकान की खरीद - फरोख्त में आई कमी के लिए सरकारी नीतियां भी जिम्मेदार हैं। जमीनों के सर्किल रेट बेतहाशा रूप से बढ़ा दिए गए हैं। कई स्थानों पर कृषि भूमि पर भी वर्ग फीट के हिसाब से सर्किल रेट अदा करना पड़ रहा है। वहीं, आयकर विभाग द्वारा अब जमीन के सर्किल रेट के अनुसार क्रेता - विक्रेता दोनों से आयकर वसूल किया जा रहा है। जबकि, पूर्व में खरीद - फरोख्त की वास्तविक राशि पर कर लिया जाता था। इससे कारोबार में कमी आई है। हालांकि, आने वाले दिनों में इसमें संभावनाएं बहुत हैं। मध्यम वर्ग में प्लाट /मकान की डिमांड व्यापक रूप से बनी हुई है।
कृत्रिम मांग ने बढ़ाए दाम
झांसी। जानकारों की मानें तो जमीन /मकान की खरीद फरोख्त में आई कमी की वजह इनकी कीमत में भारी बढ़ोत्तरी है। पहले लोगों ने निवेश के उद्देश्य से जमीनें खरीद लीं और अब दाम बढ़ाकर उन्हें बेचा जा रहा है। पूर्व में जिस हिसाब से जमीनों की खरीद फरोख्त हुई, उतनी यहां मांग नहीं थीं। लेकिन, निवेश के उद्देश्य से इसकी कृत्रिम मांग पैदा कर दी गई और अब दाम बढ़ने से खरीदारों का टोटा पैदा हो गया है।