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Jhansi News: राम वनगमन पथ को पर्यटन का मॉडल बनाने के लिए हो रहा शोध
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पर्यटन एवं होटल प्रबंधन विभाग के शोधार्थी सत्येंद्र चौधरी प्रभु श्रीराम के वनगमन पथ को पर्यटन का मॉडल बनाने के लिए शोध कर रहे हैं। यहां आवासीय इकाइयों, धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण कैसे तैयार किया जा सकता है, इसको लेकर शोध कार्य जारी है।
सत्येंद्र ने बताया कि प्रभु राम वनवास के दौरान अयोध्या से होकर श्रृंगवेरपुर, प्रयागराज से होते हुए चित्रकूट पहुंचे। यहां से मध्य प्रदेश के चित्रकूट होते हुए अन्य स्थानों पर गए। उनका शोध कार्य उत्तर प्रदेश के जिलों में चल रहा है। कहा कि राम वनगमन पथ पर श्रद्धालु आध्यात्मिक और धार्मिक सुख की प्राप्ति के लिए आएंगे। ऐसे में यहां के होटल, अतिथि गृह, धर्मशाला, पांच सितारा होटलों में ऐसा वातावरण हो, जिससे लोग श्रीराम के जीवन की अनुभूति कर पाएं। शोध कार्य में देखा जा रहा है कि अभी इन क्षेत्रों में राममय माहौल की कितनी अनुभूति हो रही है। साथ ही भविष्य में इसे और बेहतर बनाने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है। ये क्षेत्र यूपी के पर्यटन का मॉडल बने, ताकि, देश भर में लागू किया जा सके। इसको लेकर शोध कार्य कर रहे हैं। ये शोध कार्य 2025 तक पूर्ण हो जाएगा।
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पर्यटन एवं होटल प्रबंधन विभाग के शोधार्थी सत्येंद्र चौधरी प्रभु श्रीराम के वनगमन पथ को पर्यटन का मॉडल बनाने के लिए शोध कर रहे हैं। यहां आवासीय इकाइयों, धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण कैसे तैयार किया जा सकता है, इसको लेकर शोध कार्य जारी है।
सत्येंद्र ने बताया कि प्रभु राम वनवास के दौरान अयोध्या से होकर श्रृंगवेरपुर, प्रयागराज से होते हुए चित्रकूट पहुंचे। यहां से मध्य प्रदेश के चित्रकूट होते हुए अन्य स्थानों पर गए। उनका शोध कार्य उत्तर प्रदेश के जिलों में चल रहा है। कहा कि राम वनगमन पथ पर श्रद्धालु आध्यात्मिक और धार्मिक सुख की प्राप्ति के लिए आएंगे। ऐसे में यहां के होटल, अतिथि गृह, धर्मशाला, पांच सितारा होटलों में ऐसा वातावरण हो, जिससे लोग श्रीराम के जीवन की अनुभूति कर पाएं। शोध कार्य में देखा जा रहा है कि अभी इन क्षेत्रों में राममय माहौल की कितनी अनुभूति हो रही है। साथ ही भविष्य में इसे और बेहतर बनाने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है। ये क्षेत्र यूपी के पर्यटन का मॉडल बने, ताकि, देश भर में लागू किया जा सके। इसको लेकर शोध कार्य कर रहे हैं। ये शोध कार्य 2025 तक पूर्ण हो जाएगा।
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