{"_id":"6196b6718e985966f7692dd7","slug":"reduced-demand-for-electricity-saved-coal-worth-crores-jhansi-news-jhs209091089","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिजली की घटी मांग ने बचाया करोड़ों रुपये का कोयला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिजली की घटी मांग ने बचाया करोड़ों रुपये का कोयला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। प्रदेश में बिजली की मांग कम होने से पारीछा थर्मल पावर प्लांट की चारों इकाइयों का उत्पादन पिछले एक महीने से बंद चल रहा है। इससे प्लांट में अभी तक करोड़ों रुपये के कोयले की बचत की जा चुकी है। वहीं, लगातार मालगाड़ियां मिलने से प्लांट के पास भरपूर कोयला उपलब्ध हो गया है। कोयला रखने वाला क्षेत्र आधे से ज्यादा भर गया है। वर्तमान में प्लांट के पास 2.25 लाख टन कोयला उपलब्ध है।
सितंबर के आखिर में कोयला संकट गहराने से प्रदेश में बिजली संकट खड़ा हो गया था। गनीमत रही कि प्रतिदिन एक दो मालगाड़ी के रैक मिलने से उत्पादन इकाइयों में बिजली बराबर बनती रही। इससे हालात नहीं बिगड़ सके। इसके बाद 17 अक्तूबर से प्रदेश में बिजली की मांग लगातार कम चल रही है। बुधवार को भी प्रदेश में दिन के वक्त 10 हजार 500 मेगावाट और रात में 13 हजार मेगावाट बिजली की मांग रही। जबकि आम दिनों में यह मांग 20 हजार मेगावाट तक रहती थी। वहीं, मांग कम होने से लोड डिस्पेच सेंटर लखनऊ (एसएलडी) के आदेश पर पारीछा समेत कई यूनिटों में उत्पादन बंद कर दिया गया था। यह स्थिति आज तक नहीं हुई है। पारीछा में 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयों से कुल 920 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
वहीं, प्लांट को प्रतिदिन एक से दो मालगाड़ी कोयला लगातार मिल रहा है। स्टॉक में 2.25 हजार टन कोयला इकट्ठा हो गया है। इस कोयले से 20 से अधिक बिजली बनाई जा सकती है।
विज्ञापन
- प्रदेश में बिजली की मांग चल रही है। इस कारण स्टेट लोड डिस्पेच सेंटर लखनऊ के आदेश पर इकाइयों को बंद किया गया है। आदेश आने पर ही अब एक- एक कर इकाइयों को चालू किया जाएगा।
एमके सचान, मुख्य महाप्रबंधक (पारीछा थर्मल पावर प्लांट)।
चार प्लांटों में होता है उत्पादन
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के प्रदेश में चार उत्पादन प्लांट हैं। इनमें पारीछा में 920 मेगावाट, अनपरा में 2630 मेगावाट, ओबरा में पांच सौ मेगावाट और हरदुआ गंज में पांच सौ मेगावाट की इकाइयां लगीं हैं। इसके बाद प्रदेश सरकार निजी कंपनियों से बिजली खरीदती है।
विज्ञापन
सितंबर के आखिर में कोयला संकट गहराने से प्रदेश में बिजली संकट खड़ा हो गया था। गनीमत रही कि प्रतिदिन एक दो मालगाड़ी के रैक मिलने से उत्पादन इकाइयों में बिजली बराबर बनती रही। इससे हालात नहीं बिगड़ सके। इसके बाद 17 अक्तूबर से प्रदेश में बिजली की मांग लगातार कम चल रही है। बुधवार को भी प्रदेश में दिन के वक्त 10 हजार 500 मेगावाट और रात में 13 हजार मेगावाट बिजली की मांग रही। जबकि आम दिनों में यह मांग 20 हजार मेगावाट तक रहती थी। वहीं, मांग कम होने से लोड डिस्पेच सेंटर लखनऊ (एसएलडी) के आदेश पर पारीछा समेत कई यूनिटों में उत्पादन बंद कर दिया गया था। यह स्थिति आज तक नहीं हुई है। पारीछा में 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयों से कुल 920 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
विज्ञापन
वहीं, प्लांट को प्रतिदिन एक से दो मालगाड़ी कोयला लगातार मिल रहा है। स्टॉक में 2.25 हजार टन कोयला इकट्ठा हो गया है। इस कोयले से 20 से अधिक बिजली बनाई जा सकती है।
विज्ञापन
- प्रदेश में बिजली की मांग चल रही है। इस कारण स्टेट लोड डिस्पेच सेंटर लखनऊ के आदेश पर इकाइयों को बंद किया गया है। आदेश आने पर ही अब एक- एक कर इकाइयों को चालू किया जाएगा।
एमके सचान, मुख्य महाप्रबंधक (पारीछा थर्मल पावर प्लांट)।
चार प्लांटों में होता है उत्पादन
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के प्रदेश में चार उत्पादन प्लांट हैं। इनमें पारीछा में 920 मेगावाट, अनपरा में 2630 मेगावाट, ओबरा में पांच सौ मेगावाट और हरदुआ गंज में पांच सौ मेगावाट की इकाइयां लगीं हैं। इसके बाद प्रदेश सरकार निजी कंपनियों से बिजली खरीदती है।