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पानी के रूप में बरसा ‘अमृत’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Jan 2017 12:40 AM IST
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rain, jhansi news
- फोटो : demo
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सोमवार को हुई एक घंटे की बरसात से किसानों को बड़ा फायदा हुआ है। असिंचित क्षेत्र में खड़ी दलहनी फसलों के लिए पानी का बेहतर प्रभाव पड़ेगा और उत्पादन बढ़ जाएगा। पानी बरसने से तापमान में मामूली गिरावट आई है। अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
सोमवार की सुबह से ही बादल छाए हुए थे। दोपहर होने पर मंद धूप निकली, लेकिन कुछ देर बाद फिर से बादल छा गए। तकरीबन तीन बजे आसमान में गहरे बादल छा गए और बूंदाबांदी शुरू हो गई। कुछ देर बाद तेज पानी बरसने लगा। करीब आधा घंटे तक बरसात होने के बाद फिर से सवा चार बजे धूप खिल गई। लेकिन, पांच बजे फिर से मौसम का मिजाज बदल गया और पानी बरसने लगा। पानी बरसने से दलहनी फसलों को बहुत फायदा होगा।
मौसम वैज्ञानिक डा. मुकेश चंद्र ने बताया कि बुंदेलखंड में पानी की कमी है। किसान खेतों में सिंचाई नहीं कर पाते हैं। इसलिए पानी बरसने से दलहनी फसलों को काफी फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि चना, मटर, मसूर और अलसी की फसल को ताकत मिलेगी। बरसात के पानी के साथ नाइट्रोजन होता है, जो फसल को सीधा मिलता है। पानी बरसने से किसानों को सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी।
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सोमवार की सुबह से ही बादल छाए हुए थे। दोपहर होने पर मंद धूप निकली, लेकिन कुछ देर बाद फिर से बादल छा गए। तकरीबन तीन बजे आसमान में गहरे बादल छा गए और बूंदाबांदी शुरू हो गई। कुछ देर बाद तेज पानी बरसने लगा। करीब आधा घंटे तक बरसात होने के बाद फिर से सवा चार बजे धूप खिल गई। लेकिन, पांच बजे फिर से मौसम का मिजाज बदल गया और पानी बरसने लगा। पानी बरसने से दलहनी फसलों को बहुत फायदा होगा।
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मौसम वैज्ञानिक डा. मुकेश चंद्र ने बताया कि बुंदेलखंड में पानी की कमी है। किसान खेतों में सिंचाई नहीं कर पाते हैं। इसलिए पानी बरसने से दलहनी फसलों को काफी फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि चना, मटर, मसूर और अलसी की फसल को ताकत मिलेगी। बरसात के पानी के साथ नाइट्रोजन होता है, जो फसल को सीधा मिलता है। पानी बरसने से किसानों को सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी।
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