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Jhansi News: बारिश ने बिगाड़ा किसान का गणित, एक हेक्टेयर उड़द में 17 हजार का घाटा
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ललितपुर/बिरधा। सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है, लेकिन लगातार बारिश ने किसानों का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। जिले में उड़द की फसल को बारिश से भारी नुकसान हुआ है। खेतों में खड़ी फसल में अंकुरण होने से दाने काले पड़ गए और उपज भी काफी कम हो गई। किसानों के मुताबिक एक हेक्टेयर में उड़द की फसल तैयार करने में करीब 27 हजार रुपये खर्च हुए, जबकि खराब गुणवत्ता के कारण मंडी में उपज की बिक्री करीब 10 हजार रुपये में ही हो सकी। इस तरह किसानों को एक हेक्टेयर में करीब 17 हजार रुपये का सीधा घाटा उठाना पड़ा।
किसानों के अनुसार एक हेक्टेयर में उड़द की बोआई से लेकर कटाई और थ्रेसिंग तक करीब 27 हजार रुपये की लागत आती है। इसमें जुताई, बीज, बोहनी, खाद, दवा, कटाई, मजदूरी, थ्रेसिंग और भाड़ा शामिल है। लगातार बारिश के कारण खेत में खड़ी उड़द की फसल में ही अंकुरण हो गया। इससे दाने काले और दागी हो गए। गुणवत्ता प्रभावित होने से किसानों को मंडी में भी उचित भाव नहीं मिल रहा है।
किसानों का कहना है कि एक हेक्टेयर में सामान्य तौर पर एक से ढाई क्विंटल तक उड़द की पैदावार होती है। वर्तमान में दागी फसल के कारण मंडी में करीब चार से साढ़े चार हजार रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। ऐसे में कई किसानों को पूरी फसल बेचने के बाद भी करीब नौ से दस हजार रुपये ही मिल पा रहे हैं। किसानों ने सरकार से फसल का सर्वे कराकर राहत देने की मांग की है। साथ ही मंडी में कम कीमत पर बिक रही बची हुई उड़द को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने की मांग की है, ताकि उन्हें कुछ आर्थिक राहत मिल सके।
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एक हेक्टेयर में उड़द की फसल पर खर्च
उड़द बीज, 20 किलोग्राम - 2,000 रुपये
खेत की जुताई - 2,000 रुपये
बोहनी - 2,000 रुपये
खरपतवारनाशक की दवा, दो बार - 3,000 रुपये
कीटनाशक और पोषक तत्व - 2,500 रुपये
उड़द की कटाई, 22 मजदूर - 8,800 रुपये
फसल एकत्रित कराने का खर्च - 2,000 रुपये
थ्रेसर का खर्च - 3,000 रुपये
थ्रेसर में मजदूरी - 1,200 रुपये
भाड़ा - 500 रुपये
कुल खर्च : 27,000 रुपये
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फोटो-47
कर्ज लेकर उड़द की फसल लगाई थी, लेकिन बारिश में पूरी फसल सड़ गई। अब बैंक का कर्ज कैसे चुकाएं, समझ नहीं आ रहा। सरकार सर्वे कराकर मुआवजा दे तो रबी की फसल की लागत जुटाने में मदद मिलेगी।
- रघुपत पटेल, किसान, कलौथरा
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फोटो-48
एक हेक्टेयर में 27 हजार रुपये की लागत लगाने के बाद बची उड़द की बिक्री से केवल नौ हजार रुपये मिले हैं। इससे फसल की लागत तक नहीं निकल पाई।
- धीरज सिंह लोधी, किसान, करमरा
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फोटो-49
बारिश से बची उड़द मंडी में सस्ती बिक रही है। सरकार इसे एमएसपी पर खरीदे तो किसानों को कुछ राहत मिल सकती है।
- दौलतराम विश्वकर्मा, किसान, बिरधा
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फोटो-50
लगातार बारिश ने उड़द की फसल पूरी तरह चौपट कर दी है। इससे किसान घाटे में चला गया है। सरकार किसानों को निशुल्क खाद और बीज उपलब्ध कराए, ताकि वे रबी की बुआई कर सकें।
- मुन्नीलाल, किसान, रीछपुरा
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राजस्व, कृषि और बीमा कंपनी के संयुक्त दलों ने खरीफ की फसलों को हुए नुकसान का सर्वे पूरा कर लिया है। बारिश से फसलों पर पड़े प्रभाव की सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेज दी गई है।
- अख्तर हुसैन, उप कृषि निदेशक
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किसानों के अनुसार एक हेक्टेयर में उड़द की बोआई से लेकर कटाई और थ्रेसिंग तक करीब 27 हजार रुपये की लागत आती है। इसमें जुताई, बीज, बोहनी, खाद, दवा, कटाई, मजदूरी, थ्रेसिंग और भाड़ा शामिल है। लगातार बारिश के कारण खेत में खड़ी उड़द की फसल में ही अंकुरण हो गया। इससे दाने काले और दागी हो गए। गुणवत्ता प्रभावित होने से किसानों को मंडी में भी उचित भाव नहीं मिल रहा है।
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किसानों का कहना है कि एक हेक्टेयर में सामान्य तौर पर एक से ढाई क्विंटल तक उड़द की पैदावार होती है। वर्तमान में दागी फसल के कारण मंडी में करीब चार से साढ़े चार हजार रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। ऐसे में कई किसानों को पूरी फसल बेचने के बाद भी करीब नौ से दस हजार रुपये ही मिल पा रहे हैं। किसानों ने सरकार से फसल का सर्वे कराकर राहत देने की मांग की है। साथ ही मंडी में कम कीमत पर बिक रही बची हुई उड़द को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने की मांग की है, ताकि उन्हें कुछ आर्थिक राहत मिल सके।
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एक हेक्टेयर में उड़द की फसल पर खर्च
उड़द बीज, 20 किलोग्राम - 2,000 रुपये
खेत की जुताई - 2,000 रुपये
बोहनी - 2,000 रुपये
खरपतवारनाशक की दवा, दो बार - 3,000 रुपये
कीटनाशक और पोषक तत्व - 2,500 रुपये
उड़द की कटाई, 22 मजदूर - 8,800 रुपये
फसल एकत्रित कराने का खर्च - 2,000 रुपये
थ्रेसर का खर्च - 3,000 रुपये
थ्रेसर में मजदूरी - 1,200 रुपये
भाड़ा - 500 रुपये
कुल खर्च : 27,000 रुपये
फोटो-47
कर्ज लेकर उड़द की फसल लगाई थी, लेकिन बारिश में पूरी फसल सड़ गई। अब बैंक का कर्ज कैसे चुकाएं, समझ नहीं आ रहा। सरकार सर्वे कराकर मुआवजा दे तो रबी की फसल की लागत जुटाने में मदद मिलेगी।
- रघुपत पटेल, किसान, कलौथरा
फोटो-48
एक हेक्टेयर में 27 हजार रुपये की लागत लगाने के बाद बची उड़द की बिक्री से केवल नौ हजार रुपये मिले हैं। इससे फसल की लागत तक नहीं निकल पाई।
- धीरज सिंह लोधी, किसान, करमरा
फोटो-49
बारिश से बची उड़द मंडी में सस्ती बिक रही है। सरकार इसे एमएसपी पर खरीदे तो किसानों को कुछ राहत मिल सकती है।
- दौलतराम विश्वकर्मा, किसान, बिरधा
फोटो-50
लगातार बारिश ने उड़द की फसल पूरी तरह चौपट कर दी है। इससे किसान घाटे में चला गया है। सरकार किसानों को निशुल्क खाद और बीज उपलब्ध कराए, ताकि वे रबी की बुआई कर सकें।
- मुन्नीलाल, किसान, रीछपुरा
राजस्व, कृषि और बीमा कंपनी के संयुक्त दलों ने खरीफ की फसलों को हुए नुकसान का सर्वे पूरा कर लिया है। बारिश से फसलों पर पड़े प्रभाव की सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेज दी गई है।
- अख्तर हुसैन, उप कृषि निदेशक