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Jhansi News: सहयात्री के खर्राटों से रेलयात्री परेशान, किसी के पास नहीं है समाधान
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। कन्फर्म सीट बुक कराते समय यात्री यही सोचते हैं कि पूरी यात्रा आराम से सो सकेंगे। लेकिन, कोच में कुछ यात्री ऐसे भी मिल जाते हैं, जिनके खर्राटे दूसरे यात्रियों की नींद उड़ा देते हैं। झांसी मंडल में ऐसी शिकायतें प्रतिदिन आ रही हैं। हालांकि, शिकायत करने वाले खर्राटे लेने वाले यात्री को इसके लिए दोषी नहीं मान रहे।
हर यात्री का यह अनुभव है कि उन्होंने एसी कोच में सुकून से सोने के लिए टिकट बुक कराई लेकिन, रात होते ही उनकी नींद बगल वाली सीट पर गहरी नींद में सो रहे दूसरे यात्री ने उड़ा दी। झांसी मंडल से रात को गुजरने वालीं ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्री भी अपना अनुभव शिकायत की शक्ल में साझा कर रहे हैं। रेल मदद और 139 हेल्पलाइन नंबर पर प्रतिदिन औसतन 2 से 3 कॉल और मेसेज आ रहे हैं कि उनकी सीट के साथ वाली सीट पर सो रहे यात्री जोर-जोर से खर्राटे ले रहे हैं, जिससे वह सो नहीं पा रहे हैं। हालांकि, वह इस बात को लेकर रेलवे से भी नाराज नहीं हैं। वहीं, इस शिकायत का समाधान रेलवे के पास भी नहीं है।
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डॉक्टर दे रहे यह सुझाव
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. डीएस गुप्ता रेलयात्रा में यह अनुभव ले चुके हैं। उनका कहना है कि खर्राटे लेना एक बीमारी है। जिसमें ऑक्सीजन मरीज के फेफड़ों तक सही तरीके से नहीं जा पाती। जब ऐसे यात्री को जगाया जाता है तो उसके फेफड़ों में ऑक्सीजन पहुंचाने वाली धमनियां सक्रिय हो जाती हैं और खर्राटे बंद हो जाते हैं। लेकिन, यात्री के गहरी नींद में जाते ही खर्राटे शुरू हो जाते हैं।
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- यह अपनाएं उपाय
डॉ. डीएस गुप्ता बताते हैं कि यह समस्या अक्सर अधिक वजन वाले लोगों के साथ होती है। उन्होंने सलाह दी है कि जब भी ऐसे यात्री ट्रेन में सफर करें तो इस बात का ध्यान रखें कि उनकी गर्दन पीछे की ओर न झुके। गर्दन टेढ़ी होने से ऑक्सीजन फ्लो कम हो जाता है।
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वर्जन
यात्रियों द्वारा खर्राटे लेने की शिकायतें बहुत कम आती हैं। क्योंकि, खर्राटे लेना एक बीमारी है। इसके लिए कुछ खास नहीं किया जा सकता।
मनोज कुमार सिंह, मंडल रेल जनसंपर्क अधिकारी।
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झांसी। कन्फर्म सीट बुक कराते समय यात्री यही सोचते हैं कि पूरी यात्रा आराम से सो सकेंगे। लेकिन, कोच में कुछ यात्री ऐसे भी मिल जाते हैं, जिनके खर्राटे दूसरे यात्रियों की नींद उड़ा देते हैं। झांसी मंडल में ऐसी शिकायतें प्रतिदिन आ रही हैं। हालांकि, शिकायत करने वाले खर्राटे लेने वाले यात्री को इसके लिए दोषी नहीं मान रहे।
हर यात्री का यह अनुभव है कि उन्होंने एसी कोच में सुकून से सोने के लिए टिकट बुक कराई लेकिन, रात होते ही उनकी नींद बगल वाली सीट पर गहरी नींद में सो रहे दूसरे यात्री ने उड़ा दी। झांसी मंडल से रात को गुजरने वालीं ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्री भी अपना अनुभव शिकायत की शक्ल में साझा कर रहे हैं। रेल मदद और 139 हेल्पलाइन नंबर पर प्रतिदिन औसतन 2 से 3 कॉल और मेसेज आ रहे हैं कि उनकी सीट के साथ वाली सीट पर सो रहे यात्री जोर-जोर से खर्राटे ले रहे हैं, जिससे वह सो नहीं पा रहे हैं। हालांकि, वह इस बात को लेकर रेलवे से भी नाराज नहीं हैं। वहीं, इस शिकायत का समाधान रेलवे के पास भी नहीं है।
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डॉक्टर दे रहे यह सुझाव
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. डीएस गुप्ता रेलयात्रा में यह अनुभव ले चुके हैं। उनका कहना है कि खर्राटे लेना एक बीमारी है। जिसमें ऑक्सीजन मरीज के फेफड़ों तक सही तरीके से नहीं जा पाती। जब ऐसे यात्री को जगाया जाता है तो उसके फेफड़ों में ऑक्सीजन पहुंचाने वाली धमनियां सक्रिय हो जाती हैं और खर्राटे बंद हो जाते हैं। लेकिन, यात्री के गहरी नींद में जाते ही खर्राटे शुरू हो जाते हैं।
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डॉ. डीएस गुप्ता बताते हैं कि यह समस्या अक्सर अधिक वजन वाले लोगों के साथ होती है। उन्होंने सलाह दी है कि जब भी ऐसे यात्री ट्रेन में सफर करें तो इस बात का ध्यान रखें कि उनकी गर्दन पीछे की ओर न झुके। गर्दन टेढ़ी होने से ऑक्सीजन फ्लो कम हो जाता है।
वर्जन
यात्रियों द्वारा खर्राटे लेने की शिकायतें बहुत कम आती हैं। क्योंकि, खर्राटे लेना एक बीमारी है। इसके लिए कुछ खास नहीं किया जा सकता।
मनोज कुमार सिंह, मंडल रेल जनसंपर्क अधिकारी।