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Jhansi News: तकनीशियन की सतर्कता से दूसरी बार बचा रेल हादसा
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। डीजल लोको शेड के यांत्रिक विभाग में तैनात तकनीशियन-1 की सतर्कता से बड़ा हादसा होने से बच गया। तकनीशियन राम कुमार राय ने इंजन के अंडर ट्रक के निरीक्षण के दौरान एमआर-1 टैंक के होल्डिंग ब्रैकेट को क्षतिग्रस्त देख तत्काल इसकी जानकारी देते हुए ठीक कराया। इसका पता न चलने पर एमआर-1 टैंक पटरी पर गिर सकता था। डीआरएम अनिरुद्ध कुमार ने रामकुमार को एम्प्लाई ऑफ मंथ के अवार्ड से सम्मानित किया है।
पीआरओ मनोज कुमार ने बताया कि 21 मार्च को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे की शिफ्ट में तकनीशियन-1 राम कुमार राय इंजन संख्या 70532 की जांच कर रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर इंजन के नीचे लगे एमआर-1 टैंक के होल्डिंग ब्रैकेट पर पड़ी। जिसके सहारे पूरा एमआर-1 टैंक लगा था। इसके पहले रामकुमार ने इंजन संख्या 12325 में एमआर टैंक के ब्रैकेट की जांच कर संभावित खतरे को समय रहते समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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यह होता है एमआर टैंक
गाड़ी में ब्रेक सिस्टम प्रेशर पर निर्भर होता है। इंजन में दो एमआर टैंक लगे होते हैं, जिसमें चार्जिंग कर प्रेशर बनता है। इंजन में एमआर टैंक होल्डिंग ब्रैकेट के सहारे लगाया जाता है। तेज रफ्तार इंजन से होल्डिंग ब्रैकेट टूट जाता तो भारी भरकर एमआर टैंक पटरी के बीच में गिरता। जिससे बड़े रेल हादसे होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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झांसी। डीजल लोको शेड के यांत्रिक विभाग में तैनात तकनीशियन-1 की सतर्कता से बड़ा हादसा होने से बच गया। तकनीशियन राम कुमार राय ने इंजन के अंडर ट्रक के निरीक्षण के दौरान एमआर-1 टैंक के होल्डिंग ब्रैकेट को क्षतिग्रस्त देख तत्काल इसकी जानकारी देते हुए ठीक कराया। इसका पता न चलने पर एमआर-1 टैंक पटरी पर गिर सकता था। डीआरएम अनिरुद्ध कुमार ने रामकुमार को एम्प्लाई ऑफ मंथ के अवार्ड से सम्मानित किया है।
पीआरओ मनोज कुमार ने बताया कि 21 मार्च को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे की शिफ्ट में तकनीशियन-1 राम कुमार राय इंजन संख्या 70532 की जांच कर रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर इंजन के नीचे लगे एमआर-1 टैंक के होल्डिंग ब्रैकेट पर पड़ी। जिसके सहारे पूरा एमआर-1 टैंक लगा था। इसके पहले रामकुमार ने इंजन संख्या 12325 में एमआर टैंक के ब्रैकेट की जांच कर संभावित खतरे को समय रहते समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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यह होता है एमआर टैंक
गाड़ी में ब्रेक सिस्टम प्रेशर पर निर्भर होता है। इंजन में दो एमआर टैंक लगे होते हैं, जिसमें चार्जिंग कर प्रेशर बनता है। इंजन में एमआर टैंक होल्डिंग ब्रैकेट के सहारे लगाया जाता है। तेज रफ्तार इंजन से होल्डिंग ब्रैकेट टूट जाता तो भारी भरकर एमआर टैंक पटरी के बीच में गिरता। जिससे बड़े रेल हादसे होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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