{"_id":"575880284f1c1b17489c5186","slug":"prayer-does-not-feel-fatigue","type":"story","status":"publish","title_hn":"इबादत से महसूस नहीं होती थकान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इबादत से महसूस नहीं होती थकान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jun 2016 01:59 AM IST
विज्ञापन
rojadar, jhansi news
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। अल्लाह से मोहब्बत एवं इबादत का अवसर देता है पाक रमजान और हम इस अवसर को गंवाना नहीं चाहेंगे। यह शब्द उन महिलाओं व युवतियों के हैं, जो नौकरी भी करती है, घर को भी संभालती हैं और रमजान में रोजा रखकर खुदा की इबादत में पांचों वक्त की नमाज अदा कर कुरान पाक को भी पढ़ती हैं।
ट्यूशन पढ़ाकर घर का संचालन करने वाली मेवातीपुरा निवासी रोजी के मुताबिक रोजा रखने से जीवन में बुराइयां दूर रहती है। रोजा अहसास कराता है कि विपरीत परिस्थितियों में कैसे आगे बढ़ें। रोजी के अनुसार वह नियमित रूप से पांचों वक्त की नमाज पढ़ती है और अल्लाह को सदैव अपने पास पाती है।
स्वास्थ विभाग में कार्यरत फाखरा तरन्नुम के अनुसार रोजा रखना जीवन में जरूरी है और इससे उनके काम काज पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है, जिस तरह से घर के काम संभालना जरूरी है, उसी प्रकार से धर्म भी बेहद जरूरी है। रमजान के दौरान उनमें विशेष उत्साह रहता है।
विज्ञापन
बेसिक शिक्षा विभाग के एक स्कूल में प्रधानाध्यापिका शफीका परवीन जो हज कर चुकी है, के मुताबिक वह पूरे माह के रोजे रखती है। विभागीय व घर के कामकाज से होने वाली थकान इबादत करने पर स्वत: दूर हो जाती है। रोजा रखना और इबादत करना जरूरी है, जो भूख का अहसास नहीं होने देती है।
एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका सोनम राइन के मुताबिक वह सहरी के समय उठ कर अल्लाह की इबादत करती है। इसके पश्चात स्कूल एवं घर का काम देखना पड़ता है। वहीं, पांचों वक्त की नमाज पढ़ती हूं। इनके अनुसार रोजा रखने से उन्हें सदैव अच्छा लगता है।
जूनियर हाईस्कूल में अनुदेशक अंजुम के मुताबिक विभागीय और घरेलू कामकाज से थकान तो होती है। वहीं बिजली की जबरदस्त कटौती भी लगातार परेशान किए हुए है। लेकिन, इन सभी हालतों के बाद भी वह अल्लाह की इबादत करती हैं।
विज्ञापन
ट्यूशन पढ़ाकर घर का संचालन करने वाली मेवातीपुरा निवासी रोजी के मुताबिक रोजा रखने से जीवन में बुराइयां दूर रहती है। रोजा अहसास कराता है कि विपरीत परिस्थितियों में कैसे आगे बढ़ें। रोजी के अनुसार वह नियमित रूप से पांचों वक्त की नमाज पढ़ती है और अल्लाह को सदैव अपने पास पाती है।
विज्ञापन
स्वास्थ विभाग में कार्यरत फाखरा तरन्नुम के अनुसार रोजा रखना जीवन में जरूरी है और इससे उनके काम काज पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है, जिस तरह से घर के काम संभालना जरूरी है, उसी प्रकार से धर्म भी बेहद जरूरी है। रमजान के दौरान उनमें विशेष उत्साह रहता है।
विज्ञापन
बेसिक शिक्षा विभाग के एक स्कूल में प्रधानाध्यापिका शफीका परवीन जो हज कर चुकी है, के मुताबिक वह पूरे माह के रोजे रखती है। विभागीय व घर के कामकाज से होने वाली थकान इबादत करने पर स्वत: दूर हो जाती है। रोजा रखना और इबादत करना जरूरी है, जो भूख का अहसास नहीं होने देती है।
एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका सोनम राइन के मुताबिक वह सहरी के समय उठ कर अल्लाह की इबादत करती है। इसके पश्चात स्कूल एवं घर का काम देखना पड़ता है। वहीं, पांचों वक्त की नमाज पढ़ती हूं। इनके अनुसार रोजा रखने से उन्हें सदैव अच्छा लगता है।
जूनियर हाईस्कूल में अनुदेशक अंजुम के मुताबिक विभागीय और घरेलू कामकाज से थकान तो होती है। वहीं बिजली की जबरदस्त कटौती भी लगातार परेशान किए हुए है। लेकिन, इन सभी हालतों के बाद भी वह अल्लाह की इबादत करती हैं।