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Jhansi News: जमानत नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपियों को चिह्नित करने में जुटी पुलिस
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ललितपुर। अपराधियों को जमानत दिलाने के लिए फर्जी संपत्ति दस्तावेज और कूटरचित जमानत प्रपत्रों का उपयोग करने के दर्ज मामले में पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस इस मामले की गहनता से जांच करते हुए इसमें शामिल अन्य लोगों को चिह्नित करने में जुट गई है।
कोतवाली सदर अंतर्गत चौकी नईबस्ती प्रभारी आलोक कुमार सिंह की तहरीर पर पेशेवर जमानतदार प्रमोद निवासी मोहल्ला आजादपुरा और देवी प्रसाद निवासी मोहल्ला नेहरू नगर के खिलाफ फर्जी संपत्ति दस्तावेज व कूटरचित जमानत प्रपत्रों का उपयोग करके कई लोगों की जमानत देने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। आरोपी प्रमोद ने करीब 18 आरोपियों की और देवी प्रसाद ने करीब 13 आरोपियों की जमानत कूटरचित दस्तावेजों, फर्जी संपत्ति दस्तावेजों से कराई थी। आरोपियों ने जिले के अपराधियों के अलावा झांसी, सागर, दमोह, राजगढ़, सतना, समस्तीपुर, नागपुर, कानपुर देहात और हरियाणा के मेवात क्षेत्र के रहने वाले आरोपियों की भी जमानत कराई। इन आरोपियों के खिलाफ चोरी, मारपीट, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट, पशु क्रूरता अधिनियम, धोखाधड़ी, सड़क दुर्घटना, गुंडा नियंत्रण अधिनियम जैसे मुकदमे शामिल थे। जमानत सत्यापन में यह मामला उजागर होने के बाद कोतवाली पुलिस ने इस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। जिसमें पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों को चिह्नित करने में जुट गई है। इसके लिए पुलिस जमानत के दौरान लगाए गए संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की गहनता से जांच करने में जुटी है। पुलिस राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मदद से दस्तावेजों के वास्तविक स्वामी, उनकी वैधता और जमानत प्रपत्रों में दर्ज विवरण तलाश किया जा रहा है। साथ में इस षड्यंत्र में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए तकनीकी मदद ली जा रही है। सीओ सदर अजय कुमार ने बताया कि पेशेवर जमानतदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उनको चिह्नित करने के लिए पुलिस गहनता से जांच कर रही है। जांच में जो भी तथ्य आएंगे उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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कोतवाली सदर अंतर्गत चौकी नईबस्ती प्रभारी आलोक कुमार सिंह की तहरीर पर पेशेवर जमानतदार प्रमोद निवासी मोहल्ला आजादपुरा और देवी प्रसाद निवासी मोहल्ला नेहरू नगर के खिलाफ फर्जी संपत्ति दस्तावेज व कूटरचित जमानत प्रपत्रों का उपयोग करके कई लोगों की जमानत देने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। आरोपी प्रमोद ने करीब 18 आरोपियों की और देवी प्रसाद ने करीब 13 आरोपियों की जमानत कूटरचित दस्तावेजों, फर्जी संपत्ति दस्तावेजों से कराई थी। आरोपियों ने जिले के अपराधियों के अलावा झांसी, सागर, दमोह, राजगढ़, सतना, समस्तीपुर, नागपुर, कानपुर देहात और हरियाणा के मेवात क्षेत्र के रहने वाले आरोपियों की भी जमानत कराई। इन आरोपियों के खिलाफ चोरी, मारपीट, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट, पशु क्रूरता अधिनियम, धोखाधड़ी, सड़क दुर्घटना, गुंडा नियंत्रण अधिनियम जैसे मुकदमे शामिल थे। जमानत सत्यापन में यह मामला उजागर होने के बाद कोतवाली पुलिस ने इस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। जिसमें पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों को चिह्नित करने में जुट गई है। इसके लिए पुलिस जमानत के दौरान लगाए गए संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की गहनता से जांच करने में जुटी है। पुलिस राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मदद से दस्तावेजों के वास्तविक स्वामी, उनकी वैधता और जमानत प्रपत्रों में दर्ज विवरण तलाश किया जा रहा है। साथ में इस षड्यंत्र में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए तकनीकी मदद ली जा रही है। सीओ सदर अजय कुमार ने बताया कि पेशेवर जमानतदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उनको चिह्नित करने के लिए पुलिस गहनता से जांच कर रही है। जांच में जो भी तथ्य आएंगे उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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