{"_id":"96cc4e91d973e3a39cdb7727fd836636","slug":"photography-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फोटो प्रदर्शनी में दिखी बुंदेलखंड की संपदा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फोटो प्रदर्शनी में दिखी बुंदेलखंड की संपदा
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Mon, 28 Sep 2015 01:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। प्रकृति के मनोरम दृश्य हों अथवा बुंदेलखंड के दूरस्थ अंचलों
विज्ञापन
में मौजूद ऐतिहासिक संपदा, इनके छायाचित्रों की प्रस्तुति का केंद्र बना
राजकीय संग्रहालय। रविवार को विश्व पर्यटन दिवस पर लगी फोटो प्रदर्शनी में
हर फोटो छायाकारों की मेहनत व काबलियत को बयां कर रही थी। खोज परक फोटो
आकर्षण का केंद्र रहीं।
प्रेस छायाकारों, स्वतंत्र छायाकारों, प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा अपने - अपने कैमरे से उतारे गए छायाचित्र बुंदेलखंड की ऐतिहासिक व प्राकृतिक संपदा को प्रदर्शित कर रहे थे। अनुकृति सिंह क े छायाचित्र ने जहां गढ़कुंडार के खंगार राजवंश की महिलाओं के बलिदान को स्मरण कराते हुए जौहर कुंड को दिखाया, तो भेल के कृष्ण गोपाल ने प्रकृति के विभिन्न रूपों को अपने कैमरे में कैद कर ओरछा के चतुर्भुज मंदिर को प्रदर्शित किया। यही नहीं, हरियाली की चादर में लिपटा ललितपुर का विलेज डोंगरी भी लोगों को बरबस खींच रहा था। वहीं प्रशांत पांडेय द्वारा ओरछा स्थित बुंदेला राजाओं की समाधियां, डीएफओ एन रविंद्रा व अशोक सरवरिया की प्रकृति व वन्य जीव से नजदीकी ते चित्र भी आकर्षक थे। इनके अलावा नगरीय व प्रकृति के आंचल में लुत्फ उठाते मानव जीवन को प्रदर्शित करते एम खान, श्याम, विनोद नामदेव अजय आदि के छायाचित्र प्रबुद्ध वर्ग के अलावा आम लोगों को स्वत: खींच रहे थे।
इससे पूर्व जिला प्रशासन, राजकीय संग्रहालय, राज्य पुरातत्व विभाग, पर्यटन विभाग, पुलिंद कला दीर्घा एवं झांसी एडवेंचर क्लब के संयुक्त तत्वावधान में लगाई गई फोटो प्रदर्शनी एवं फोटो प्रतियोगिता का शुभारंभ सीडीओ संजय कुमार व मुख्य अतिथि पूर्व सांसद डा. पं. विश्वनाथ शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस मौके पर राजकीय संग्रहालय में संगोष्ठी हुई। सीडीओ ने कहा कि आपाधापी से भरी जिंदगी में पर्यटन के शौक से शांति मिलती है। पूर्व सांसद ने फोटो वर्कशाप एवं कोचिंग सेंटर अपने विद्यालय में प्रारंभ करने की बात कही। प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. एसके दुबे ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से पर्यटन विकास को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी 30 सितंबर तक अवलोकन के लिए नि:शुल्क खुली रहेगी।
इस अवसर पर पर्यटन विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक आर प्रसाद, रमेश प्रसाद श्रीवास, मुकुंद महरोत्रा, ममता जैन, सुधा गुप्ता, जानकी शरण वर्मा, रमाकांत पाराशर, राजेंद्र पटैरिया, विकास वैभव, सुविधा पांडेय, अभिलाषा, भानु प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन डा. नीति शास्त्री ने किया, जबकि आभार संग्रहालय की प्रभारी डा. उमा पाराशर ने जताया।
एम खान ने जीती प्रतियोगिता
विश्व पर्यटन दिवस पर आयोजित मीडिया फोटोग्राफर की प्रतियोगिता में एम खान ने पहला स्थान पाया। वहीं रामनरेश यादव ने दूसरा, अजय झा ने तीसरा एवं श्याम, एस झा व विनोद नामदेव को सांत्वना पुरस्कार मिले। इसके अलावा जन सामान्य वर्ग में अशोक अग्रवाल ने पहला, कृष्ण गोपाल ने दूसरा, नवल कुशवाहा ने तीसरा, मोहन नेपाली, धीरज साहू, मृदुभाषिनी जैन को सांत्वना, राजकीय कर्मचारी वर्ग में प्रमोद कुमार सिंह को पहला, प्रशांत पांडेय को दूसरा व वैशाली यादव को तीसरा स्थान मिला। सुधीर कुमार जैन व देवेंद्र सिंह को सांत्वना पुरस्कार मिला। 32 छायाकारों द्वारा 100 से अधिक छायाचित्र प्रदर्शनी में लगाए गए हैं। अधिकारी वर्ग से डीएफओ एन रविंद्रा के चित्र भी उल्लेखनीय रहे। निर्णायकों में राजेश श्रीवास्तव, अविनाश पांडेय व एस के दुबे रहे।
प्रेस छायाकारों, स्वतंत्र छायाकारों, प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा अपने - अपने कैमरे से उतारे गए छायाचित्र बुंदेलखंड की ऐतिहासिक व प्राकृतिक संपदा को प्रदर्शित कर रहे थे। अनुकृति सिंह क े छायाचित्र ने जहां गढ़कुंडार के खंगार राजवंश की महिलाओं के बलिदान को स्मरण कराते हुए जौहर कुंड को दिखाया, तो भेल के कृष्ण गोपाल ने प्रकृति के विभिन्न रूपों को अपने कैमरे में कैद कर ओरछा के चतुर्भुज मंदिर को प्रदर्शित किया। यही नहीं, हरियाली की चादर में लिपटा ललितपुर का विलेज डोंगरी भी लोगों को बरबस खींच रहा था। वहीं प्रशांत पांडेय द्वारा ओरछा स्थित बुंदेला राजाओं की समाधियां, डीएफओ एन रविंद्रा व अशोक सरवरिया की प्रकृति व वन्य जीव से नजदीकी ते चित्र भी आकर्षक थे। इनके अलावा नगरीय व प्रकृति के आंचल में लुत्फ उठाते मानव जीवन को प्रदर्शित करते एम खान, श्याम, विनोद नामदेव अजय आदि के छायाचित्र प्रबुद्ध वर्ग के अलावा आम लोगों को स्वत: खींच रहे थे।
इससे पूर्व जिला प्रशासन, राजकीय संग्रहालय, राज्य पुरातत्व विभाग, पर्यटन विभाग, पुलिंद कला दीर्घा एवं झांसी एडवेंचर क्लब के संयुक्त तत्वावधान में लगाई गई फोटो प्रदर्शनी एवं फोटो प्रतियोगिता का शुभारंभ सीडीओ संजय कुमार व मुख्य अतिथि पूर्व सांसद डा. पं. विश्वनाथ शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस मौके पर राजकीय संग्रहालय में संगोष्ठी हुई। सीडीओ ने कहा कि आपाधापी से भरी जिंदगी में पर्यटन के शौक से शांति मिलती है। पूर्व सांसद ने फोटो वर्कशाप एवं कोचिंग सेंटर अपने विद्यालय में प्रारंभ करने की बात कही। प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. एसके दुबे ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से पर्यटन विकास को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी 30 सितंबर तक अवलोकन के लिए नि:शुल्क खुली रहेगी।
इस अवसर पर पर्यटन विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक आर प्रसाद, रमेश प्रसाद श्रीवास, मुकुंद महरोत्रा, ममता जैन, सुधा गुप्ता, जानकी शरण वर्मा, रमाकांत पाराशर, राजेंद्र पटैरिया, विकास वैभव, सुविधा पांडेय, अभिलाषा, भानु प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन डा. नीति शास्त्री ने किया, जबकि आभार संग्रहालय की प्रभारी डा. उमा पाराशर ने जताया।
एम खान ने जीती प्रतियोगिता
विश्व पर्यटन दिवस पर आयोजित मीडिया फोटोग्राफर की प्रतियोगिता में एम खान ने पहला स्थान पाया। वहीं रामनरेश यादव ने दूसरा, अजय झा ने तीसरा एवं श्याम, एस झा व विनोद नामदेव को सांत्वना पुरस्कार मिले। इसके अलावा जन सामान्य वर्ग में अशोक अग्रवाल ने पहला, कृष्ण गोपाल ने दूसरा, नवल कुशवाहा ने तीसरा, मोहन नेपाली, धीरज साहू, मृदुभाषिनी जैन को सांत्वना, राजकीय कर्मचारी वर्ग में प्रमोद कुमार सिंह को पहला, प्रशांत पांडेय को दूसरा व वैशाली यादव को तीसरा स्थान मिला। सुधीर कुमार जैन व देवेंद्र सिंह को सांत्वना पुरस्कार मिला। 32 छायाकारों द्वारा 100 से अधिक छायाचित्र प्रदर्शनी में लगाए गए हैं। अधिकारी वर्ग से डीएफओ एन रविंद्रा के चित्र भी उल्लेखनीय रहे। निर्णायकों में राजेश श्रीवास्तव, अविनाश पांडेय व एस के दुबे रहे।