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मेडिसिन, गायनी, सर्जरी के डॉक्टर भी बनेंगे ‘बाल रोग विशेषज्ञ’
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झांसी। कोरोना की तीसरी लहर में पीडियाट्रीशियन की कमी आड़े न आए, इसलिए शासन ने दूसरे विभागों के डॉक्टरों को भी बाल रोग विशेषज्ञ के तौर पर तैयार करने का फैसला लिया है। इसके लिए मेडिसिन, गायनी, सर्जरी, एनेस्थीसिया आदि विभाग के डॉक्टरों को पीडियाट्रिक कोविड सेंटर में मरीजों के इलाज के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। ताकि, जरूरत पड़ने पर ये बच्चों का इलाज कर सकें।
कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक बताई जा रही है। सबसे बड़ी समस्या बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है। इसको मद्देनजर रखते हुए शासन ने अब पीडियाट्रिक के अलावा दूसरे विभागों के डॉक्टरों को बतौर बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में तैयार करने का फैसला किया है। इसके तहत डॉक्टरों, नर्सेस का पीडियाट्रिक कोविड सेंटर में मरीजों के इलाज के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग होगी। इसके लिए पंजीकरण भी शुरू हो गए हैं। मेडिकल कॉलेज के क्रिटिकल केयर इंचार्ज डॉ. रामबाबू ने बताया कि पीडियाट्रिक्स के साथ-साथ अन्य विशिष्टताओं के विशेषज्ञ, एमबीबीएस डॉक्टर और नर्सेज की ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रशिक्षण में हिस्सा लेने के लिए सभी प्रतिभागियों को संलग्न गूगल फॉर्म के जरिए पंजीकरण करना है। यह पंजीकरण केवल एक ही बार किया जाएगा। ट्रेनिंग के लिए प्रतिभागी सिर्फ अपने मोबाइल नंबर से ही लॉगइन कर सकेगा। प्रशिक्षण से पहले ट्रेनिंग टीम द्वारा रजिस्ट्रेशन फॉर्म में अंकित मोबाइल नंबर व ई-मेल पर प्रशिक्षण की लिंग शेयर की जाएगी। सभी रजिस्टर्ड प्रतिभागियों के ट्रेनिंग में प्रतिभाग करने पर ई-प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।
झांसी में हैं महज 50 पीडियाट्रीशियन
सरकारी और निजी अस्पतालों को मिलाकर झांसी में सिर्फ 50 बाल रोग विशेषज्ञ हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में शून्य से 14 साल तक के पांच लाख से ज्यादा बच्चे हैं। यानी कि बाहर हजार बच्चों पर सिर्फ एक बाल रोग विशेषज्ञ है।
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आठ में से एक सीएचसी पर विशेषज्ञ
जिले में आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सिर्फ मऊरानीपुर सीएचसी पर ही बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। बबीना, बड़ागांव, चिरगांव, मोंठ, गुरसराय, बामौर और बंगरा में एक भी पीडियाट्रीशियन नहीं है।
किस उम्र के कितने बच्चे
आयु वर्ग लड़के लड़कियां कुल
0 से 4 94370 81684 176054
5 से 14 108339 94282 202621
5 से 9 118060 120692 220752
(नोट: आंकड़े 2011 जनगणना के अनुसार हैं।)
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कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक बताई जा रही है। सबसे बड़ी समस्या बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है। इसको मद्देनजर रखते हुए शासन ने अब पीडियाट्रिक के अलावा दूसरे विभागों के डॉक्टरों को बतौर बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में तैयार करने का फैसला किया है। इसके तहत डॉक्टरों, नर्सेस का पीडियाट्रिक कोविड सेंटर में मरीजों के इलाज के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग होगी। इसके लिए पंजीकरण भी शुरू हो गए हैं। मेडिकल कॉलेज के क्रिटिकल केयर इंचार्ज डॉ. रामबाबू ने बताया कि पीडियाट्रिक्स के साथ-साथ अन्य विशिष्टताओं के विशेषज्ञ, एमबीबीएस डॉक्टर और नर्सेज की ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रशिक्षण में हिस्सा लेने के लिए सभी प्रतिभागियों को संलग्न गूगल फॉर्म के जरिए पंजीकरण करना है। यह पंजीकरण केवल एक ही बार किया जाएगा। ट्रेनिंग के लिए प्रतिभागी सिर्फ अपने मोबाइल नंबर से ही लॉगइन कर सकेगा। प्रशिक्षण से पहले ट्रेनिंग टीम द्वारा रजिस्ट्रेशन फॉर्म में अंकित मोबाइल नंबर व ई-मेल पर प्रशिक्षण की लिंग शेयर की जाएगी। सभी रजिस्टर्ड प्रतिभागियों के ट्रेनिंग में प्रतिभाग करने पर ई-प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।
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झांसी में हैं महज 50 पीडियाट्रीशियन
सरकारी और निजी अस्पतालों को मिलाकर झांसी में सिर्फ 50 बाल रोग विशेषज्ञ हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में शून्य से 14 साल तक के पांच लाख से ज्यादा बच्चे हैं। यानी कि बाहर हजार बच्चों पर सिर्फ एक बाल रोग विशेषज्ञ है।
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आठ में से एक सीएचसी पर विशेषज्ञ
जिले में आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सिर्फ मऊरानीपुर सीएचसी पर ही बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। बबीना, बड़ागांव, चिरगांव, मोंठ, गुरसराय, बामौर और बंगरा में एक भी पीडियाट्रीशियन नहीं है।
किस उम्र के कितने बच्चे
आयु वर्ग लड़के लड़कियां कुल
0 से 4 94370 81684 176054
5 से 14 108339 94282 202621
5 से 9 118060 120692 220752
(नोट: आंकड़े 2011 जनगणना के अनुसार हैं।)