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पराली जलाने में किसानों पर सख्ती, जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई से इनकार
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झांसी। धान की कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे। अब तक जनपद में साठ से अधिक मामले सामने आ चुके, जिनमें 37 किसानों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा दी गई। लेकिन किसी जिम्मेदार अफसर के खिलाफ प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। किसानों से ही एक लाख से अधिक का जुर्माना भी वसूला गया है।
पराली जलाने पर रोकथाम के लिए एनजीटी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त निर्देश दिए हैं। अफसर भी पिछले कई माह से लगातार रणनीति तैयार कर रहे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी रणनीति का असर होता नहीं दिखता। धान की फसल की कटाई शुरू होने के बाद से ही पराली जलने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
पराली जलने पर किसानों के साथ ही संबंधित लेखपाल, तहसीलदार के खिलाफ भी कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया गया था। लेकिन अभी तक जितनी भी कार्रवाई हुई वह सिर्फ किसानों तक सीमित है। जिला कृषि अधिकारी कमलेश कुमार सिंह का कहना है रिपोर्ट के मुताबिक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
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मोंठ में सर्वाधिक मामले
पराली जलाने के सर्वाधिक मामले मोंठ तहसील में सामने आए हैं। यहां अब तक 33 घटनाएं सामने आईं। लेकिन सिर्फ 10 मामलों में ही एफआईआर दर्ज कराई गई। इसी तरह सदर तहसील में कुल 18 मामले सामने आए लेकिन, इनमें भी सिर्फ तीन मामले ही दर्ज किए गए। दोषियों से जुर्माना वसूलने में मोंठ सबसे पीछे है।
सेटेलाइट निगरानी का भी फायदा नहीं
एनजीटी की फटकार के चलते पराली जलाने की निगरानी सेटेलाइट से की जा रही। इसके किराए पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं लेकिन, इसके बावजूद पराली जलाने के मामलों में कमी नहीं आ रही है। पिछले वर्ष जिन इलाकों में सर्वाधिक पराली जलाए जाने के मामले सामने आए थे वहीं, इस बार भी पराली जलाई जा रही लेकिन, इसे रोक पाने में नाकाम अफसर इसे कूड़ा जलने से पैदा हो रहा धुआं बता रहे हैं।
मशीनरी बैंक नहीं जा बनाए सके
पराली जलाने से रोकने को ग्राम पंचायत स्तर पर मशीनरी बैंक स्थापित किए जाने थे। सरकार ने इसके लिए लाखों रुपये आवंटित किए लेकिन, पंचायतों ने इसे स्थापित करने में दिलचस्पी हीं नहीं दिखाई। गिनी-चुनी पंचायतों में यह स्थापित भी हुआ लेकिन, किसानों तक इसकी पहुंच नहीं है। इस वजह से आसान रास्ते की तलाश में किसान सीधे अवशेषों में आग लगा दे रहे हैं।
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पराली जलाने पर रोकथाम के लिए एनजीटी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त निर्देश दिए हैं। अफसर भी पिछले कई माह से लगातार रणनीति तैयार कर रहे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी रणनीति का असर होता नहीं दिखता। धान की फसल की कटाई शुरू होने के बाद से ही पराली जलने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
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पराली जलने पर किसानों के साथ ही संबंधित लेखपाल, तहसीलदार के खिलाफ भी कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया गया था। लेकिन अभी तक जितनी भी कार्रवाई हुई वह सिर्फ किसानों तक सीमित है। जिला कृषि अधिकारी कमलेश कुमार सिंह का कहना है रिपोर्ट के मुताबिक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
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मोंठ में सर्वाधिक मामले
पराली जलाने के सर्वाधिक मामले मोंठ तहसील में सामने आए हैं। यहां अब तक 33 घटनाएं सामने आईं। लेकिन सिर्फ 10 मामलों में ही एफआईआर दर्ज कराई गई। इसी तरह सदर तहसील में कुल 18 मामले सामने आए लेकिन, इनमें भी सिर्फ तीन मामले ही दर्ज किए गए। दोषियों से जुर्माना वसूलने में मोंठ सबसे पीछे है।
सेटेलाइट निगरानी का भी फायदा नहीं
एनजीटी की फटकार के चलते पराली जलाने की निगरानी सेटेलाइट से की जा रही। इसके किराए पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं लेकिन, इसके बावजूद पराली जलाने के मामलों में कमी नहीं आ रही है। पिछले वर्ष जिन इलाकों में सर्वाधिक पराली जलाए जाने के मामले सामने आए थे वहीं, इस बार भी पराली जलाई जा रही लेकिन, इसे रोक पाने में नाकाम अफसर इसे कूड़ा जलने से पैदा हो रहा धुआं बता रहे हैं।
मशीनरी बैंक नहीं जा बनाए सके
पराली जलाने से रोकने को ग्राम पंचायत स्तर पर मशीनरी बैंक स्थापित किए जाने थे। सरकार ने इसके लिए लाखों रुपये आवंटित किए लेकिन, पंचायतों ने इसे स्थापित करने में दिलचस्पी हीं नहीं दिखाई। गिनी-चुनी पंचायतों में यह स्थापित भी हुआ लेकिन, किसानों तक इसकी पहुंच नहीं है। इस वजह से आसान रास्ते की तलाश में किसान सीधे अवशेषों में आग लगा दे रहे हैं।