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पन्नालाल और ओमशंकर की उपलब्धि पर झांसी वाले गदगद

Sun, 28 Feb 2021 02:11 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 28 Feb 2021 02:11 AM IST
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pannalal or omprkash ki uplavdhi pa jhansi bale gadgad
लोकभूषण सम्मान से सम्मानित - ओमशंकर खरे ‘असर’। - फोटो : REPORTERS
पन्नालाल और ओमशंकर की उपलब्धि पर झांसी वाले गदगद
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झांसी। हिंदी साहित्य में झांसी का इतिहास समृद्ध रहा है। इस विरासत को झांसी के इतिहासकार अब भी बेहतर ढंग से संभाले हुए हैं। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर दिए गए दो पुरस्कार झांसी के खाते में आए हैं। पन्नालाल असर को लोकभूषण तथा ओमशंकर खरे ‘असर’ को साहित्य भूषण पुरस्कार दिया गया है। इससे शहरवासी गदगद हैं।
बीएचईएल के सेवानिवृत्त अभियंता पन्नालाल असर पिछले लगभग पचास सालों से लोक कला एवं लोक साहित्य के संरक्षण व संवर्धन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उनकी पुस्तक मेरी झांसी, युग साहित्य, बुंदेली रसरंग, माटी के गीत, बाल गीत, भजन कबीर, पारंपरिक लोक गीत, पारंपरिक गारी, भजन निर्गुण तथा एहसास ए गम काफी लोकप्रिय रही हैं। आकाशवाणी व दूरदर्शन पर भी उनके समय-समय पर कार्यक्रम प्रकाशित होते रहते हैं। उनकी पुस्तक मेरी झांसी और बुंदेली रसरंग स्नातक व परास्नातक के पाठ्यक्रम में शामिल हैं।
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1981 में उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कला मिलन के पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके अलावा भी उन्हें कई पुरस्कार हासिल हो चुके हैं। साहित्य और कला के क्षेत्र में पन्नालाल असर के योगदान को देखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ द्वारा लोकभूषण पुरस्कार दिया है। ये पुरस्कार प्रतिवर्ष देश भर में एक व्यक्ति को ही दिया जाता है। वहीं, राष्ट्रीय बचत योजना के उप निदेशक पद से सेवानिवृत्त वासुदेव मुहल्ला निवासी वरिष्ठ साहित्यकार ओमशंकर खरे ‘असर’ को साहित्य भूषण पुरस्कार से नवाजा है।
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उन्हें उनकी पुस्तक ‘झांसी क्रांति की काशी’ के लिए दिया गया है। यह पुस्तक राजकीय संग्रहालय झांसी द्वारा प्रकाशित कराई गई थी। एक हजार पृष्ठ की इस पुस्तक में रानी के लिए व्यक्तित्व व कृतित्व का पूरा विवरण उपलब्ध है। इसके अलावा उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक क्रांतिवीर बानपुर - चंदेरी नरेश महाराजा मर्दन सिंह जूदेव भी खासी लोकप्रिय रही। उन्होंने कागज की नाव फिल्म की स्क्रिप्ट भी लिखी।
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