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कांग्रेस : पंचायत चुनाव नजदीक, सूबे में जीत का लक्ष्य, लेकिन गुटबाजी हावी
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झांसी। प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव में दमदार उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कांग्रेस पार्टी के प्रदेश स्तरीय नेता गंभीर है। विधान सभा चुनाव 2022 में जीत का लक्ष्य है। लेकिन इससे बेफिक्र जिले के कांग्रेसियों में गुटबाजी चरम पर है। किसान आंदोलन के समर्थन में हुए भारत बंद के दौरान यह खूब नजर आई। हालांकि जिले के नेता गुटबाजी से इंकार कर रहे हैं।
कांग्रेस की राष्ट्रीय व सूबे की राजनीति में झांसी के नेताओं का समय - समय पर अहम प्रभाव रहा है। वर्तमान में राष्ट्रीय सचिव सुधांशु त्रिपाठी और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य सहित अन्य कई वरिष्ठ नेता संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से देखा यह जा रहा है कि इनके समर्थक कांग्रेसियों में खेमे बाजी जोर पकड़ने लगी है। इसके प्रभाव से जिलाध्यक्ष एवं शहर अध्यक्ष गुट भी अछूता नहीं रह गए हैं। भारत बंद के दौरान कचहरी चौराहा स्थित गांधी उद्यान में यह स्पष्ट देखा गया। जब शहर अध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष गुट में एक दूसरे से काफी दूरी बन गई।
दरअसल, इससे पहले भी इन दोनो गुटों के बीच एमएलसी चुनाव प्रचार के दौरान हुई बैठक में अध्यक्षता कौन करेगा को लेकर विवाद हुआ था। हालांकि गुटबाजी की बात को निराधार बताते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है। आंदोलन को लेकर विशेष रणनीति बनी थी। राष्ट्रीय सचिव सुधांशु त्रिपाठी ने बताया कि कहीं कोई गुटबाजी नहीं है। सभी कांग्रेसियों का लक्ष्य है, कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव जीते और उत्तर प्रदेश में सरकार बनाए। इधर, जिलाध्यक्ष भगवान दास कोरी ने कहा कि गुटबाजी के हम सख्त खिलाफ हैं। हम किसी भी गुट में नहीं है, जो अनुशासनहीनता दिखाएगा, उस पर अवश्य कार्रवाई की जाएगी। इधर, शहर अध्यक्ष अरविंद वशिष्ठ ने कहा कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है। रणनीति के तहत हम सभी ने आंदोलन में हिस्सा लिया था।
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कुछ पदाधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना
जिले में कांग्रेस पार्टी में अभी भी कई प्रकोष्ठ गठित नहीं हुए हैं। जिन प्रकोष्ठों में जिलाध्यक्ष बन गए लेकिन उनमें कार्यकारिणी तैयार नहीं हो सकी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जल्द ही कई पदाधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। जिन्होंने अभी तक कार्यकारिणी भी तैयार नहीं की है और निष्क्रिय बने हुए है। वहीं, शुक्रवार को पार्टी की एक महिला पदाधिकारी ने खुद को दरकिनार करने का आरोप लगाया और पूर्व मंत्री के सामने इस्तीफे की बात कही। हालांकि उन्हें समझा बुझा कर शांत कर दिया गया।
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कांग्रेस की राष्ट्रीय व सूबे की राजनीति में झांसी के नेताओं का समय - समय पर अहम प्रभाव रहा है। वर्तमान में राष्ट्रीय सचिव सुधांशु त्रिपाठी और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य सहित अन्य कई वरिष्ठ नेता संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से देखा यह जा रहा है कि इनके समर्थक कांग्रेसियों में खेमे बाजी जोर पकड़ने लगी है। इसके प्रभाव से जिलाध्यक्ष एवं शहर अध्यक्ष गुट भी अछूता नहीं रह गए हैं। भारत बंद के दौरान कचहरी चौराहा स्थित गांधी उद्यान में यह स्पष्ट देखा गया। जब शहर अध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष गुट में एक दूसरे से काफी दूरी बन गई।
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दरअसल, इससे पहले भी इन दोनो गुटों के बीच एमएलसी चुनाव प्रचार के दौरान हुई बैठक में अध्यक्षता कौन करेगा को लेकर विवाद हुआ था। हालांकि गुटबाजी की बात को निराधार बताते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है। आंदोलन को लेकर विशेष रणनीति बनी थी। राष्ट्रीय सचिव सुधांशु त्रिपाठी ने बताया कि कहीं कोई गुटबाजी नहीं है। सभी कांग्रेसियों का लक्ष्य है, कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव जीते और उत्तर प्रदेश में सरकार बनाए। इधर, जिलाध्यक्ष भगवान दास कोरी ने कहा कि गुटबाजी के हम सख्त खिलाफ हैं। हम किसी भी गुट में नहीं है, जो अनुशासनहीनता दिखाएगा, उस पर अवश्य कार्रवाई की जाएगी। इधर, शहर अध्यक्ष अरविंद वशिष्ठ ने कहा कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है। रणनीति के तहत हम सभी ने आंदोलन में हिस्सा लिया था।
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कुछ पदाधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना
जिले में कांग्रेस पार्टी में अभी भी कई प्रकोष्ठ गठित नहीं हुए हैं। जिन प्रकोष्ठों में जिलाध्यक्ष बन गए लेकिन उनमें कार्यकारिणी तैयार नहीं हो सकी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जल्द ही कई पदाधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। जिन्होंने अभी तक कार्यकारिणी भी तैयार नहीं की है और निष्क्रिय बने हुए है। वहीं, शुक्रवार को पार्टी की एक महिला पदाधिकारी ने खुद को दरकिनार करने का आरोप लगाया और पूर्व मंत्री के सामने इस्तीफे की बात कही। हालांकि उन्हें समझा बुझा कर शांत कर दिया गया।