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बस एक डॉक्टर के भरोसे चल रही विधायक की गोद ली पीएचसी
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झांसी। बड़ी आबादी से घिरा नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगरा एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। यहां पर प्रसव तो होते हैं मगर नवजात की देखरेख के लिए कोई बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। जो प्रभारी चिकित्साधिकारी हैं, उन्हें भी अक्सर बैठकों में जाना पड़ता है। ऐसे में सप्ताह भर तो यहां मरीज देखने वाला कोई नहीं होता है। इस पीएचसी को सदर विधायक रवि शर्मा ने गोद लिया हुआ है।
नगर पालिका परिषद द्वारा 16 अप्रैल 1997 को नगरा में प्रसूति गृह की शुरूआत हुई थी। अब ये नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में तब्दील हो चुकी है। बताया गया कि आसपास के क्षेत्र की करीब एक लाख से अधिक आबादी के इलाज का जिम्मा इसी पीएचसी पर है। रोजाना 60 से 70 मरीज ओपीडी में दिखाने के लिए आते हैं। इसके अलावा महीने में आठ से दस प्रसव होते हैं। मगर यहां पर सिर्फ एक ही डॉक्टर की तैनाती है। जबकि, दो साल से लगातार स्वास्थ्य विभाग से एक और चिकित्सक की मांग की जा रही है। मौजूदा चिकित्साधिकारी की पोस्टमार्टम ड्यूटी भी लगती है। उन्हें बैठकों में भी जाना पड़ता है। ऐसे में हर सप्ताह एक-दो दिन अस्पताल में डॉक्टर न होने से कई मरीज बैरंग लौट जाते हैं। कोई इमरजेंसी डिलीवरी केस आ जाता है तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। बताया गया कि दो साल पहले यहां पर एक बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती थी। उनके जाने के बाद कोई दूसरा डॉक्टर नहीं भेजा गया। जबकि, डिलीवरी के बाद नवजात की हालत गंभीर होने की आशंका बनी रहती है। इस मामले में सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय का कहना है कि जिन केंद्रों पर अभी डॉक्टर नहीं हैं। पहले वहां पर तैनाती होगी। इसके बाद नगरा पीएचसी में भी एक डॉक्टर भेजा जाएगा।
नौ महीने बाद मिली शुगर स्ट्रिप, आया लैब टेक्नीशियन
नगरा पीएचसी में नौ महीने बाद अब शुगर स्ट्रिप आ गई है। स्ट्रिप न होने से मरीजों को साधारण जांच के लिए भी जिला अस्पताल तक दौड़ लगानी पड़ती थी। या फिर निजी सेंटर पर जाकर पैसे खर्च करके मरीज जांच करवाते थे। वहीं, पिछले कई महीनों बाद अब लैब टेक्नीशियन भी मिला गया है। इससे सामान्य जांचें यहां पर शुरू हो गई हैं।
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ये बोले मरीज
एड़ी के पास त्वचा फट गई है। जब ओपीडी का पर्चा बनवाने गया तो कर्मचारी ने कहा कि थोड़ी देर बैठो। बाद में बनेगा। इसलिए लौट जा रहा हूं। - रामदास
डॉक्टर ने पत्नी के हीमोग्लोबिन की जांच लिखी थी। ये जांच पीएचसी में नहीं हुई तो बाहर से करवानी पड़ी। इसके लिए दो सौ रुपये खर्च हुए। - करन।
सदर विधायक द्वारा पीएचसी गोद लिए जाने के बाद यहां बहुत काम हुआ है। एक नया वार्ड बन गया है। जहां पर जल्द ही चार बेड व अन्य संसाधन आने वाले हैं। अस्पताल की रंगाई-पुताई होने से कायाकल्प हुआ है। रोगी कल्याण समिति के बजट से पर्याप्त दवाएं मिल रही हैं। - डॉ. गरिमा पुरोहित, प्रभारी चिकित्साधिकारी, नगरा पीएचसी।
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नगर पालिका परिषद द्वारा 16 अप्रैल 1997 को नगरा में प्रसूति गृह की शुरूआत हुई थी। अब ये नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में तब्दील हो चुकी है। बताया गया कि आसपास के क्षेत्र की करीब एक लाख से अधिक आबादी के इलाज का जिम्मा इसी पीएचसी पर है। रोजाना 60 से 70 मरीज ओपीडी में दिखाने के लिए आते हैं। इसके अलावा महीने में आठ से दस प्रसव होते हैं। मगर यहां पर सिर्फ एक ही डॉक्टर की तैनाती है। जबकि, दो साल से लगातार स्वास्थ्य विभाग से एक और चिकित्सक की मांग की जा रही है। मौजूदा चिकित्साधिकारी की पोस्टमार्टम ड्यूटी भी लगती है। उन्हें बैठकों में भी जाना पड़ता है। ऐसे में हर सप्ताह एक-दो दिन अस्पताल में डॉक्टर न होने से कई मरीज बैरंग लौट जाते हैं। कोई इमरजेंसी डिलीवरी केस आ जाता है तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। बताया गया कि दो साल पहले यहां पर एक बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती थी। उनके जाने के बाद कोई दूसरा डॉक्टर नहीं भेजा गया। जबकि, डिलीवरी के बाद नवजात की हालत गंभीर होने की आशंका बनी रहती है। इस मामले में सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय का कहना है कि जिन केंद्रों पर अभी डॉक्टर नहीं हैं। पहले वहां पर तैनाती होगी। इसके बाद नगरा पीएचसी में भी एक डॉक्टर भेजा जाएगा।
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नौ महीने बाद मिली शुगर स्ट्रिप, आया लैब टेक्नीशियन
नगरा पीएचसी में नौ महीने बाद अब शुगर स्ट्रिप आ गई है। स्ट्रिप न होने से मरीजों को साधारण जांच के लिए भी जिला अस्पताल तक दौड़ लगानी पड़ती थी। या फिर निजी सेंटर पर जाकर पैसे खर्च करके मरीज जांच करवाते थे। वहीं, पिछले कई महीनों बाद अब लैब टेक्नीशियन भी मिला गया है। इससे सामान्य जांचें यहां पर शुरू हो गई हैं।
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ये बोले मरीज
एड़ी के पास त्वचा फट गई है। जब ओपीडी का पर्चा बनवाने गया तो कर्मचारी ने कहा कि थोड़ी देर बैठो। बाद में बनेगा। इसलिए लौट जा रहा हूं। - रामदास
डॉक्टर ने पत्नी के हीमोग्लोबिन की जांच लिखी थी। ये जांच पीएचसी में नहीं हुई तो बाहर से करवानी पड़ी। इसके लिए दो सौ रुपये खर्च हुए। - करन।
सदर विधायक द्वारा पीएचसी गोद लिए जाने के बाद यहां बहुत काम हुआ है। एक नया वार्ड बन गया है। जहां पर जल्द ही चार बेड व अन्य संसाधन आने वाले हैं। अस्पताल की रंगाई-पुताई होने से कायाकल्प हुआ है। रोगी कल्याण समिति के बजट से पर्याप्त दवाएं मिल रही हैं। - डॉ. गरिमा पुरोहित, प्रभारी चिकित्साधिकारी, नगरा पीएचसी।