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अभिनय की कला आनी चाहिए, मंच जरूर मिलेगा : आसिफ खान
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। अभिनेता में अभिनय की कला होनी चाहिए। मंच जरूर मिलता है। मैं तो कैमरे के पीछे काम करके आगे आया हूं। लगातार दुनिया में चल रहीं घटनाओं पर बारीक नजर रखना हमें अच्छा कलाकार बनाता है। छोटे शहरों से निकले कलाकार भी बड़े शहरों में नाम कर रहे हैं। ओटीटी आने के बाद यह और बढ़ा रहा है। ये बातें पंचायत और मिर्जापुर वेब सीरीज से चर्चित अभिनेता आसिफ शेख ने कहीं। वे बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन आठवें सत्र में वक्ता के तौर पर मौजूद थे। उनसे अभिनय के कितने रंग विषय पर लेखक प्रो. मुन्ना पांडेय ने बातचीत की।
झांसी किले की तलहटी में स्थित जनरल बिपिन रावत शहीद पार्क में आयोजित फेस्टिवल में इससे पहले दिन में पहले सत्र में पीसीएस अधिकारी परमानंद सिंह ने कहा कि कहा कि देश के विकास में सिविल सेवकों की बड़ी भूमिका है। किसी गरीब को मकान और राशन दिलवाकर आत्मिक संतुष्टि मिलती है। हालांकि तैयारी के दौरान अक्सर त्वरित सफलता नहीं मिलती, लेकिन इससे घबराना नहीं है।
दूसरा सत्र प्रशासनिक सेवाओं का ताना-बाना विषय में शिक्षाविद डॉ. शैलेंद्र सिंह ने आईएएस अधिकारी गिरवर दयाल से चर्चा की। गिरवर दयाल ने कहा कि प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी करते समय टाइम ऑडिट पर ध्यान देना चाहिए।
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तीसरे सत्र में राग दरबारी पर लेखक डॉ. मुन्ना पांडेय ने लेखक व पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर जीएसटी डॉ. दीपक जायसवाल और लेखक व पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी मृत्युंजय कुमार से चर्चा की।
चौथे सत्र में साहित्य के प्रचार - प्रसार में साहित्यिक संस्थाओं के महत्व पर हिंदी अकादमी के उपसचिव ऋषि कुमार शर्मा ने कथाकार व आलोचक उर्मिला शिरीष और लेखक सुधाकर पाठक से चर्चा की।
पांचवें सत्र में साहित्य व्यंग्य पर लेखक व सामाजिक चिंतक विश्वनाथ सिंह ''राघव'' ने लेखक व व्यंग्यकार डॉ. अनूप शुक्ल, लेखक व व्यंग्यकार डॉ. आलोक पौराणिक से चर्चा की।
छठवें सत्र लेखन की डिजिटल डायरी सत्र की कमान साहित्य अध्येता आयुष श्रीवास्तव ने संभाली। इसमें वक्ता वरिष्ठ पत्रकार मंजीत ठाकुर और लेखक बाबुषा कोहली मौजूद रहीं।
सातवें सत्र में पत्रकारिता : जिम्मेदारियां बनाम चुनौतियां विषय पर वरिष्ठ पत्रकार ऋतु भारद्वाज ने वरिष्ठ पत्रकार रीमा गौतम से बात की। रीमा ने कहा कि पत्रकारिता अब 360 डिग्री बदल गयी है।
इस मौके पर परिसर में लगे बुक स्टॉल पर किताबें खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। शाम को कार्यक्रम परिसर में अथाई मंच के युवाओं ने कविता, गायन और नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनमोह लिया।
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सलमान रुश्दी की किताब नाइफ का इंग्लिश से हिंदी अनुवाद चाकू नाम से किया है। इससे पहले बंगाल में भाजपा पर किताब लिखी है। इसके अलावा झारखंड और बिहार की संस्कृति का व्याख्यान किया। इतना ही नहीं बुंदेलखंड पर भी लिख कर यहां की समस्याओं को अपने शब्दों से उकेरा है। ये जो देश है मेरा किताब में एक चैप्टर बूंद चली पाताल में यहां के किसानों का दर्द बताया है। - मनजीत ठाकुर, लेखक, दिल्ली
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आदिवासियों की जीवनशैली से लेकर उनकी उपलब्धियों को अपने शब्दों में पिरोया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी आदिवासी क्षेत्र से हैं और संघर्ष कर किस प्रकार से राष्ट्रपति बनीं। ऐसे कई ओर नाम हैं। यदि सनातन को जानना है तो पुरातन को समझना होगा और यही हमारे पुरातन हैं। - संदीप मुरारका, लेखक, जमशेदपुर
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झांसी। अभिनेता में अभिनय की कला होनी चाहिए। मंच जरूर मिलता है। मैं तो कैमरे के पीछे काम करके आगे आया हूं। लगातार दुनिया में चल रहीं घटनाओं पर बारीक नजर रखना हमें अच्छा कलाकार बनाता है। छोटे शहरों से निकले कलाकार भी बड़े शहरों में नाम कर रहे हैं। ओटीटी आने के बाद यह और बढ़ा रहा है। ये बातें पंचायत और मिर्जापुर वेब सीरीज से चर्चित अभिनेता आसिफ शेख ने कहीं। वे बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन आठवें सत्र में वक्ता के तौर पर मौजूद थे। उनसे अभिनय के कितने रंग विषय पर लेखक प्रो. मुन्ना पांडेय ने बातचीत की।
झांसी किले की तलहटी में स्थित जनरल बिपिन रावत शहीद पार्क में आयोजित फेस्टिवल में इससे पहले दिन में पहले सत्र में पीसीएस अधिकारी परमानंद सिंह ने कहा कि कहा कि देश के विकास में सिविल सेवकों की बड़ी भूमिका है। किसी गरीब को मकान और राशन दिलवाकर आत्मिक संतुष्टि मिलती है। हालांकि तैयारी के दौरान अक्सर त्वरित सफलता नहीं मिलती, लेकिन इससे घबराना नहीं है।
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दूसरा सत्र प्रशासनिक सेवाओं का ताना-बाना विषय में शिक्षाविद डॉ. शैलेंद्र सिंह ने आईएएस अधिकारी गिरवर दयाल से चर्चा की। गिरवर दयाल ने कहा कि प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी करते समय टाइम ऑडिट पर ध्यान देना चाहिए।
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तीसरे सत्र में राग दरबारी पर लेखक डॉ. मुन्ना पांडेय ने लेखक व पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर जीएसटी डॉ. दीपक जायसवाल और लेखक व पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी मृत्युंजय कुमार से चर्चा की।
चौथे सत्र में साहित्य के प्रचार - प्रसार में साहित्यिक संस्थाओं के महत्व पर हिंदी अकादमी के उपसचिव ऋषि कुमार शर्मा ने कथाकार व आलोचक उर्मिला शिरीष और लेखक सुधाकर पाठक से चर्चा की।
पांचवें सत्र में साहित्य व्यंग्य पर लेखक व सामाजिक चिंतक विश्वनाथ सिंह ''राघव'' ने लेखक व व्यंग्यकार डॉ. अनूप शुक्ल, लेखक व व्यंग्यकार डॉ. आलोक पौराणिक से चर्चा की।
छठवें सत्र लेखन की डिजिटल डायरी सत्र की कमान साहित्य अध्येता आयुष श्रीवास्तव ने संभाली। इसमें वक्ता वरिष्ठ पत्रकार मंजीत ठाकुर और लेखक बाबुषा कोहली मौजूद रहीं।
सातवें सत्र में पत्रकारिता : जिम्मेदारियां बनाम चुनौतियां विषय पर वरिष्ठ पत्रकार ऋतु भारद्वाज ने वरिष्ठ पत्रकार रीमा गौतम से बात की। रीमा ने कहा कि पत्रकारिता अब 360 डिग्री बदल गयी है।
इस मौके पर परिसर में लगे बुक स्टॉल पर किताबें खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। शाम को कार्यक्रम परिसर में अथाई मंच के युवाओं ने कविता, गायन और नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनमोह लिया।
सलमान रुश्दी की किताब नाइफ का इंग्लिश से हिंदी अनुवाद चाकू नाम से किया है। इससे पहले बंगाल में भाजपा पर किताब लिखी है। इसके अलावा झारखंड और बिहार की संस्कृति का व्याख्यान किया। इतना ही नहीं बुंदेलखंड पर भी लिख कर यहां की समस्याओं को अपने शब्दों से उकेरा है। ये जो देश है मेरा किताब में एक चैप्टर बूंद चली पाताल में यहां के किसानों का दर्द बताया है। - मनजीत ठाकुर, लेखक, दिल्ली
आदिवासियों की जीवनशैली से लेकर उनकी उपलब्धियों को अपने शब्दों में पिरोया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी आदिवासी क्षेत्र से हैं और संघर्ष कर किस प्रकार से राष्ट्रपति बनीं। ऐसे कई ओर नाम हैं। यदि सनातन को जानना है तो पुरातन को समझना होगा और यही हमारे पुरातन हैं। - संदीप मुरारका, लेखक, जमशेदपुर