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अब गर्मी का गेहूं पर कहर, पंद्रह फीसदी तक उत्पादन घटने का डर

Thu, 24 Mar 2022 10:33 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 24 Mar 2022 10:33 PM IST
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Now summer's havoc on wheat, fear of reduction in production by 15 percent
झांसी। गर्मी का कहर अब गेहूं की फसल पर भी पड़ने लगा है। 40 डिग्री सेल्सियस के करीब तापमान पहुंच जाने से देर से बोई गई गेहूं की फसल का दाना सिकुड़ने लगा है। कृषि विशेषज्ञ 15 प्रतिशत तक उत्पादन घटने का अनुमान लगा रहे हैं। यदि आगे भी ऐसा ही तापमान बना रहा तो किसानों को नुकसान संभव है।
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गेहूं की फसल की बुवाई नवंबर में होती है। बुंदेलखंड में पानी की कमी के चलते ज्यादातर किसान दिसंबर और जनवरी के प्रथम सप्ताह में बुवाई करते हैं। इस बार झांसी में 1.69 लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुवाई हुई है। इसकी 26.37 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादकता है। इस बार 4,21,237 मीट्रिक टन उत्पादन होने का अनुमान है। इस बार मार्च में ही अप्रैल जैसी गर्मी पड़नी शुरू हो गई है। ऐसे में मार्च में जो अधिकतम तापमान 35-36 डिग्री सेल्सियस रहता था, वो अब 39.7 डिग्री तक पहुंच गया है।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. मुकेश चंद्र ने बताया कि गेहूं की जिन्होंने समय से फसल बोई थी, उनकी अब कटाई होने वाली है। ऐसे में इन किसानों को गर्मी बढ़ने का ज्यादा नुकसान नहीं होगा। चूंकि, गेहूं की फसल 110-120 दिनों में पक जाती है, इसलिए दिसंबर, जनवरी में बोने वालों को अभी 20-25 दिनों का इंतजार करना है। इनकी फसल अभी से पकने लगी है और उसका दाना भी छोटा होने लगा है। कृषि विज्ञान केंद्र भरारी की प्रभारी डॉ. निशि राय ने बताया कि तेज गर्मी पड़ने से इस साल गेहूं का उत्पादन 15 प्रतिशत तक घट सकता है।
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बार-बार पानी देने में आ रही दिक्कत
बताया गया कि जहां नहरें हैं, वहां तो फसलों की सिंचाई के लिए पानी मिल जा रहा है, बाकी जगहों पर सिंचाई के लिए पानी नहीं है। ऐसे में किसानों को फसल को गर्मी से बचाने के लिए बार-बार पानी देना पड़ता है, जिसमें उन्हें दिक्कत हो रही है।

ये बोले किसान
तेज धूप की वजह से दाने सिकुड़ने लगे हैं। देर से बुवाई करने वाले फसल पकने से पहली कटाई कर रहे हैं। आसमान से आग बरसने लगी है। - पंकज पाराशर, बड़गांव।
बुंदेलखंड में पानी की कमी से ज्यादातर किसान देर से ही गेहूं की बुवाई करते हैं। इस बार इतनी गर्मी पड़ने की उम्मीद नहीं थी। उत्पादन घट सकता है। - अविनाश भार्गव, गढ़मऊ।
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