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Jhansi News: अब ज्यादा पौष्टिक और सेहतमंद बनेगा लाल कठिया गेहूं
Mon, 08 Jan 2024 02:20 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Mon, 08 Jan 2024 02:20 AM IST
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झांसी। बुंदेलखंड में पैदा होने वाला लाल कठिया गेहूं अब ज्यादा पौष्टिक और सेहतमंद होगा। साथ ही इसकी अच्छी पैदावार से किसान मालामाल होंगे। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने बुंदेलखंड के लाल कठिया गेहूं को लेकर शोध शुरू किया है। इसमें सीरिया और भारतीय लाल कठिया गेहूं की क्रॉस ब्रीडिंग कराई गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस शोध के बेहतर परिणाम सामने आएंगे। इसके बाद बुंदेलखंड में लाल कठिया गेहूं के उत्पादन में इजाफा होगा।
लाल कठिया गेहूं मधुमेह, हृदय रोगियों और बच्चों की सेहत के लिए मुफीद माना जाता है। बुंदेलखंड के झांसी और ललितपुर समेत कई जिलों में इसका उत्पादन होता है। लाल कठिया गेहूं को ज्यादा पौष्टिक बनाने और पैदावार बढ़ाने के लिए केंद्रीय कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने शोध शुरू किया है। विवि ने सीरिया के संगठन इंटरनेशनल सेंटर फॉर एग्रीकल्चर इन द ड्राई एरिया (इकार्डा) से सीरियाई प्रजाति के लाल कठिया गेहूं का जर्म प्लाज्मा लेकर उसे कृषि विश्वविद्यालय के कृषि फार्म में देसी प्रजाति के लाल कठिया गेहूं से क्रॉस कराया है। इसे कृषि वैज्ञानिक बुंदेलखंड की जलवायु के अनुसार विकसित कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि लाल कठिया गेहूं को ज्यादा पौष्टिक बनाने और उत्पादन के लिहाज से विकसित किया जा रहा है। जल्द इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
बुंदेलखंड के 45 किसानों को दी एच 1-823 और एच 1-8759 किस्म
लाल कठिया गेहूं पर शोध कर रहीं वैज्ञानिक ने बताया कि पिछले साल इंदौर से लाई गई लाल कठिया गेहूं की एच 1-823 और एच 1-8759 किस्म को झांसी जिले के विकास खंड मऊरानीपुर के 20 और बंगरा ब्लॉक के 25 किसानों को दिया है। इस किस्म से कम से कम 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज प्राप्त होगी।
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हमने सीरिया की संस्था इकार्डा से लाल कठिया गेहूं का जर्म प्लाज्मा लेकर उसे अपने देसी बीज के साथ कृषि विश्वविद्यालय के फार्म पर शोध के लिए लगाया है। इसे हम बुंदेलखंड की जलवायु के अनुकूल बनाने पर काम कर रहे हैं। इसे उपज बढ़ाने और पौष्टिक बनाने के लिए विकसित किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द इसके परिणाम सामने आ जाएंगे।
डॉ. रोमाना खान, कृषि वैज्ञानिक।
सीरियाई और देसी लाल कठिया गेहूं पर शोध कर रहे हैं। जो किसानों की आय का बेहतर साधन बनेगा। इसके अलावा प्रथम पंक्ति के 45 किसानों को इंदौर से लाई गई कठिया गेहूं की किस्म भी दी हैं, जिनके परिणाम अभी नहीं आए हैं। लेकिन, यह स्पष्ट है कि कम से कम 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज जरूर मिलेगी।
डॉ. गुंजन गुलेरिया, कृषि वैज्ञानिक।
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लाल कठिया गेहूं मधुमेह, हृदय रोगियों और बच्चों की सेहत के लिए मुफीद माना जाता है। बुंदेलखंड के झांसी और ललितपुर समेत कई जिलों में इसका उत्पादन होता है। लाल कठिया गेहूं को ज्यादा पौष्टिक बनाने और पैदावार बढ़ाने के लिए केंद्रीय कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने शोध शुरू किया है। विवि ने सीरिया के संगठन इंटरनेशनल सेंटर फॉर एग्रीकल्चर इन द ड्राई एरिया (इकार्डा) से सीरियाई प्रजाति के लाल कठिया गेहूं का जर्म प्लाज्मा लेकर उसे कृषि विश्वविद्यालय के कृषि फार्म में देसी प्रजाति के लाल कठिया गेहूं से क्रॉस कराया है। इसे कृषि वैज्ञानिक बुंदेलखंड की जलवायु के अनुसार विकसित कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि लाल कठिया गेहूं को ज्यादा पौष्टिक बनाने और उत्पादन के लिहाज से विकसित किया जा रहा है। जल्द इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
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बुंदेलखंड के 45 किसानों को दी एच 1-823 और एच 1-8759 किस्म
लाल कठिया गेहूं पर शोध कर रहीं वैज्ञानिक ने बताया कि पिछले साल इंदौर से लाई गई लाल कठिया गेहूं की एच 1-823 और एच 1-8759 किस्म को झांसी जिले के विकास खंड मऊरानीपुर के 20 और बंगरा ब्लॉक के 25 किसानों को दिया है। इस किस्म से कम से कम 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज प्राप्त होगी।
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हमने सीरिया की संस्था इकार्डा से लाल कठिया गेहूं का जर्म प्लाज्मा लेकर उसे अपने देसी बीज के साथ कृषि विश्वविद्यालय के फार्म पर शोध के लिए लगाया है। इसे हम बुंदेलखंड की जलवायु के अनुकूल बनाने पर काम कर रहे हैं। इसे उपज बढ़ाने और पौष्टिक बनाने के लिए विकसित किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द इसके परिणाम सामने आ जाएंगे।
डॉ. रोमाना खान, कृषि वैज्ञानिक।
सीरियाई और देसी लाल कठिया गेहूं पर शोध कर रहे हैं। जो किसानों की आय का बेहतर साधन बनेगा। इसके अलावा प्रथम पंक्ति के 45 किसानों को इंदौर से लाई गई कठिया गेहूं की किस्म भी दी हैं, जिनके परिणाम अभी नहीं आए हैं। लेकिन, यह स्पष्ट है कि कम से कम 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज जरूर मिलेगी।
डॉ. गुंजन गुलेरिया, कृषि वैज्ञानिक।