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थम गया चुनावी शोर, अब मतदाताओं की बारी
Sun, 28 Apr 2019 01:00 AM IST
देवेंद्र कुमार
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Sun, 28 Apr 2019 01:00 AM IST
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Raili election
- फोटो : amarujala
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झांसी। पिछले एक पखवाड़े से जारी चुनावी शोर शनिवार की शाम छह बजे थम गया। आखिरी दिन प्रत्याशियों ने हवा का रुख अपनी ओर मोड़ने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अनुराग शर्मा ने शहर में जुलूस के साथ जनसंपर्क किया, तो ललितपुर में सपा - बसपा गठबंधन प्रत्याशी श्यामसुंदर सिंह और कांग्रेस प्रत्याशी शिवशरण कुशवाहा का रोड शो हुआ। इसके अलावा अन्य प्रत्याशी भी आखिरी वक्त तक मैदान में डटे रहे। अब बारी मतदाताओं की है। 29 अप्रैल को मतदान है, मतदाताओं को जिम्मेदार नागरिक की भूमिका का निर्वहन करते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग करना है।
लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में झांसी - ललितपुर लोकसभा सीट केे लिए नामांकन प्रक्रिया दो अप्रैल से शुरू हो गई थी। निर्धारित अवधि नौ अप्रैल तक 21 प्रत्याशियों ने नामांकन किया था। लेकिन, जांच में विभिन्न कमियों के चलते दस नामांकन निरस्त कर दिए गए थे। ग्यारह प्रत्याशी मैदान में डटे रहे। नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद से ही सभी ने अपना चुनाव प्रचार शुरू कर दिया था। तब से एक पखवाड़े से अधिक समय तक प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ गली - गली और गांव - गांव में भ्रमण कर मतदाताओं के संपर्क करते रहे। अपनी पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में हवा बनाने के लिए राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं का भी आवागमन भी जारी रहा। आसमान में हेलीकॉप्टर घड़घड़ाते रहे और नीचे गूंजते रहे नारे। जनसभाएं हुईं, रोड शो हुए और जुलूस निकाले गए। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की टोलियां अपने पार्टी के नेताओं की अगुवाई में लगातार सक्रिय बनी रहीं। पूरा शहर होर्डिंगों से पटा नजर आया। प्रचार वाहन भी लाउडस्पीकरों के माध्यम से प्रचार करते रहे।
प्रचार की ये अवधि मतदान से 36 घंटे पहले शनिवार की शाम छह बजे समाप्त हो गई। निर्वाचन आयोग ने पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया। धारा 144 का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराने का आदेश जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही शहर में लगे राजनीतिक दलों के होर्डिंग उतार लिए गए। प्रत्याशियों को अब केवल घर - घर जाकर जनसंपर्क की ही अनुमति है।
लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में झांसी - ललितपुर लोकसभा सीट केे लिए नामांकन प्रक्रिया दो अप्रैल से शुरू हो गई थी। निर्धारित अवधि नौ अप्रैल तक 21 प्रत्याशियों ने नामांकन किया था। लेकिन, जांच में विभिन्न कमियों के चलते दस नामांकन निरस्त कर दिए गए थे। ग्यारह प्रत्याशी मैदान में डटे रहे। नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद से ही सभी ने अपना चुनाव प्रचार शुरू कर दिया था। तब से एक पखवाड़े से अधिक समय तक प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ गली - गली और गांव - गांव में भ्रमण कर मतदाताओं के संपर्क करते रहे। अपनी पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में हवा बनाने के लिए राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं का भी आवागमन भी जारी रहा। आसमान में हेलीकॉप्टर घड़घड़ाते रहे और नीचे गूंजते रहे नारे। जनसभाएं हुईं, रोड शो हुए और जुलूस निकाले गए। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की टोलियां अपने पार्टी के नेताओं की अगुवाई में लगातार सक्रिय बनी रहीं। पूरा शहर होर्डिंगों से पटा नजर आया। प्रचार वाहन भी लाउडस्पीकरों के माध्यम से प्रचार करते रहे।
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प्रचार की ये अवधि मतदान से 36 घंटे पहले शनिवार की शाम छह बजे समाप्त हो गई। निर्वाचन आयोग ने पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया। धारा 144 का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराने का आदेश जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही शहर में लगे राजनीतिक दलों के होर्डिंग उतार लिए गए। प्रत्याशियों को अब केवल घर - घर जाकर जनसंपर्क की ही अनुमति है।
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