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Jhansi News: अब युवा भी आ रहे लकवा की चपेट में
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डॉ. अरविंद कनकने
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अब तक माना जाता है कि लकवा की चपेट में बुजुर्गों ही आते हैं, मगर अब ऐसा नहीं है। अब तो 40 वर्ष से काम आयु के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसकी वजह बदलता खानपान, जीवनशैली, तनाव, जंक फूड का सेवन और व्यायाम नहीं करना है। यही वजह है कि मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में रोजाना औसतन सात और ओपीडी में 15 रोगी उपचार के लिए आते हैं।
न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कनकने ने बताया कि जिनको शुगर व ब्लड प्रेशर है, तो वे नियमित दवा लेते रहे अन्यथा लकवा का शिकार हो सकते हैं। यही नहीं, लकवा होने पर तुरंत उपचार शुरू होना चाहिए, क्योंकि हर सेकेंड में दिमाग की 32000 कोशिकाएं नष्ट होती हैं। उपचार में देरी से स्थायी विकलांगता या मृत्यु तक हो सकती है।
विशेषज्ञ ने बताया कि जिन लोगों का शुगर लेवल बढ़ा रहता है, उनके दिमाग की नसों में सूजन आ जाती है। इससे नसों में रक्त का प्रभाव ठीक नहीं रहता। ब्लड प्रेशर की दिक्कत होने से नसों में ब्लॉकेज अथवा फटने की आशंका बढ़ जाती है। इन रोगियों में ठंड के मौसम में नसों के सिकुड़ने से लकवा होने का खतरा बढ़ जाता है। लकवा से ज्यादा खतरनाक रोगी को समय से उपचार नहीं मिलना होता है। जिनको समय से उपचार मिलता है, उनके प्रभावित अंग से फिर सक्रिय होने की उम्मीद काफी होती है। जैसे-जैसे समय गुजरता है वैसे-वैसे उम्मीद कम हो जाती है।
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डॉ. कनकने ने बताया कि अब युवा भी लकवा की चपेट में आ रहे हैं। इसकी मुख्य वजह बदलती जीवनशैली, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, शुगर, ब्लड प्रेशर, वसा युक्त भोजन है। खास यह कि जागरूकता नहीं होने की वजह से लोग समय पर उपचार नहीं कराते, जिसका दंश रोगी को जिंदगीभर झेलना पड़ता है।
लकवा की पुष्टि के लिए खुद करें स्क्रीनिंग
लकवा की पुष्टि के लिए एफएएसटी (फस्ट) स्क्रीनिंग करें। एफ यानी चेहरे की आकृति देखें, ए यानी हाथ की चाल देखें, एस यानी आवाज देखें। इनमें बदलाव महसूस होने पर टी यानी जल्द उपचार शुरू करवाएं, ताकि अंग ज्यादा प्रभावित न हो।
ये हैं लकवा के लक्षण
-हाथ-पैरों में कमजोरी या सुन्नता, चेहरे का तिरछापन, बोलने व समझने में परेशानी, चलने में लड़खड़ाहट, देखने में तकलीफ, व्यवहार में बदलाव, सिरदर्द, चक्कर या उल्टी आना।
बचाव के उपाय
-संतुलित आहार, कम वसायुक्त भोजन
-नियमित 40-45 मिनट पैदल चलें
-तनावपूर्ण जीवनशैली में बदलाव करें
-शुगर और बीपी नियंत्रित रखें
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झांसी। अब तक माना जाता है कि लकवा की चपेट में बुजुर्गों ही आते हैं, मगर अब ऐसा नहीं है। अब तो 40 वर्ष से काम आयु के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसकी वजह बदलता खानपान, जीवनशैली, तनाव, जंक फूड का सेवन और व्यायाम नहीं करना है। यही वजह है कि मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में रोजाना औसतन सात और ओपीडी में 15 रोगी उपचार के लिए आते हैं।
न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कनकने ने बताया कि जिनको शुगर व ब्लड प्रेशर है, तो वे नियमित दवा लेते रहे अन्यथा लकवा का शिकार हो सकते हैं। यही नहीं, लकवा होने पर तुरंत उपचार शुरू होना चाहिए, क्योंकि हर सेकेंड में दिमाग की 32000 कोशिकाएं नष्ट होती हैं। उपचार में देरी से स्थायी विकलांगता या मृत्यु तक हो सकती है।
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विशेषज्ञ ने बताया कि जिन लोगों का शुगर लेवल बढ़ा रहता है, उनके दिमाग की नसों में सूजन आ जाती है। इससे नसों में रक्त का प्रभाव ठीक नहीं रहता। ब्लड प्रेशर की दिक्कत होने से नसों में ब्लॉकेज अथवा फटने की आशंका बढ़ जाती है। इन रोगियों में ठंड के मौसम में नसों के सिकुड़ने से लकवा होने का खतरा बढ़ जाता है। लकवा से ज्यादा खतरनाक रोगी को समय से उपचार नहीं मिलना होता है। जिनको समय से उपचार मिलता है, उनके प्रभावित अंग से फिर सक्रिय होने की उम्मीद काफी होती है। जैसे-जैसे समय गुजरता है वैसे-वैसे उम्मीद कम हो जाती है।
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डॉ. कनकने ने बताया कि अब युवा भी लकवा की चपेट में आ रहे हैं। इसकी मुख्य वजह बदलती जीवनशैली, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, शुगर, ब्लड प्रेशर, वसा युक्त भोजन है। खास यह कि जागरूकता नहीं होने की वजह से लोग समय पर उपचार नहीं कराते, जिसका दंश रोगी को जिंदगीभर झेलना पड़ता है।
लकवा की पुष्टि के लिए खुद करें स्क्रीनिंग
लकवा की पुष्टि के लिए एफएएसटी (फस्ट) स्क्रीनिंग करें। एफ यानी चेहरे की आकृति देखें, ए यानी हाथ की चाल देखें, एस यानी आवाज देखें। इनमें बदलाव महसूस होने पर टी यानी जल्द उपचार शुरू करवाएं, ताकि अंग ज्यादा प्रभावित न हो।
ये हैं लकवा के लक्षण
-हाथ-पैरों में कमजोरी या सुन्नता, चेहरे का तिरछापन, बोलने व समझने में परेशानी, चलने में लड़खड़ाहट, देखने में तकलीफ, व्यवहार में बदलाव, सिरदर्द, चक्कर या उल्टी आना।
बचाव के उपाय
-संतुलित आहार, कम वसायुक्त भोजन
-नियमित 40-45 मिनट पैदल चलें
-तनावपूर्ण जीवनशैली में बदलाव करें
-शुगर और बीपी नियंत्रित रखें