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Jhansi News: कोई सुनने वाला नहीं मरीजों का दर्द, जांच में हजारों हो रहे खर्च

Sun, 26 Feb 2023 07:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 26 Feb 2023 07:00 AM IST
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No one is listening to the pain of the patients, thousands are being spent in the investigation
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों को रोजाना बाहर से डेढ़ लाख रुपये की एमआरआई और सीटी स्कैन जांच करानी पड़ रही है। क्योंकि, मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग में पिछले दो महीने से दोनों मशीनें खराब पड़ी हैं। कॉलेज में रोजाना 60 मरीज ये जांच कराने आते हैं।
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मेडिकल कॉलेज में बीपीएल कार्ड धारक और आयुष्मान रोगियों के लिए सभी जांचें नि:शुल्क होती हैं। जबकि, एमआरआई जांच के लिए दो हजार और सीटी स्कैन के लिए 600 से एक हजार रुपये तक फीस लगती है। जबकि, निजी केंद्रों पर एमआरआई जांच कराने पर पांच से छह हजार रुपये लगते हैं। सीटी स्कैन जांच कराने पर डेढ़ हजार से लेकर चार हजार रुपये तक का खर्च आता है। कॉलेज में पिछले दो महीने से सीटी स्कैन मशीन खराब पड़ी हुई है। जबकि, सिर को छोड़कर कोई भी एमआरआई जांच नहीं हो पा रही है। बताया गया कि जब मशीन ठीक थीं, तब कॉलेज में रोजाना औसतन 40 सीटी स्कैन और 10 एमआरआई जांच होती थीं। अब इन मरीजों को निजी सेंटरों पर जाकर जांच करानी पड़ रही है। ऐसे में सीटी स्कैन जांच कराने पर ही मरीजों का लगभग एक लाख रुपये और एमआरआई जांच कराने पर करीब 50 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
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ये बोले मरीज
सिर में दर्द है। दो महीने से सीटी स्कैन जांच नहीं हो पा रही है। जिला अस्पताल जाओ तो वहां मशीन खराब रहती है। मेडिकल कॉलेज में भी कई दिनों से मशीन खराब है। - रजनी।
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मेडिकल कॉलेज में मेरा बच्चा प्रिंस भर्ती है। डॉक्टर ने एमआरआई जांच लिखी है। मगर कॉलेज में तो कई दिनों से एमआरआई मशीन खराब होने से जांच नहीं हो पा रही है। - अमित।

एमआरआई जांच कराने के लिए मेडिकल कॉलेज में आया था। मगर यहां मशीन खराब होने से जांच नहीं हो पाई। इतने पैसे नहीं हैं कि बाहर से जांच करा सकूं। - अजय।
एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन को ठीक कराने के लिए शासन से बजट मांगा गया है। जैसे ही बजट प्राप्त हो जाएगा, वैसे ही मशीन ठीक करवा दी जाएगी। - डॉ. सचिन माहुर, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज।
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