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Jhansi News: आगरा-झांसी रेलवे ट्रैक पर नौ खतरनाक मोड़... कम कर रहे ट्रेनों की रफ्तार, पहियों को दे रहे चोट
Sat, 06 Apr 2024 02:28 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Sat, 06 Apr 2024 02:28 AM IST
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वसीम शेख
झांसी। आगरा से झांसी रेलवे ट्रैक पर बने नौ खतरनाक मोड़ ट्रेनों की रफ्तार कम कर रहे हैं। साथ ही ट्रेनों के पहियों को भी चोट दे रहे हैं। हालात यह हैं कि 217 किमी लंबे इस ट्रैक पर जगह-जगह घुमाव के चलते ट्रेनों के पहिये घिस रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि झांसी में लगी व्हील लेथ मशीन ने दो महीने में ही 17 कोच के 136 पहियों की मरम्मत की है।
झांसी-आगरा रेलवे ट्रैक पर रोज 100 से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है, लेकिन इस पूरे ट्रैक पर यूं तो 14 घुमाव हैं, लेकिन इनमें से नौ खतरनाक मोड़ ट्रेनों के पहियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन मोड़ के चलते ट्रेनों की रफ्तार धीमी पड़ रही है। हालात यह हैं कि गतिमान एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें भी इस रेलमार्ग पर रफ्तार नहीं पकड़ पा रही हैं। साथ ही यहां घुमाव होने के चलते ट्रेन के पहिये भी खराब हो रहे हैं। अब इन पहियों की मरम्मत के लिए झांसी रेल कोच केयर सेंटर में व्हील लेथ मशीन लगाई गई है। इस मशीन पर पूरा कोच एक बार में रखकर पहियों की मरम्मत की जा रही है। इसमें 30 से 50 मिनट का समय लगता है। दो महीने (फरवरी-मार्च) में इस मशीन से 17 कोच के 136 पहिये ठीक किए जा चुके हैं।
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आगरा से निकलते ही कम हो जाती है ट्रेनों की गति
गतिमान एक्सप्रेस आगरा मंडल से झांसी तक 160 के स्थान पर अधिकतम 130 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से ही चल पाती है। आगरा कैंट से वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन तक 217 किलोमीटर की दूरी तय करने में गतिमान एक्सप्रेस को 2.40 घंटे का समय लगता है। यानि यह ट्रेन औसतन 90 किमी प्रतिघंटा की गति से चल पाती है। वहीं, हजरत निजामुद्दीन से आगरा कैंट तक 188 किलोमीटर की दूरी गतिमान एक्सप्रेस मात्र 1.40 घंटे में पूरी कर लेती है। इस मार्ग पर ट्रेन की औसत रफ्तार 134 किमी प्रतिघंटा होती है।
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इस स्थिति में खराब होते हैं पहिये
कोच में जिस सिरे से पहिये और पटरी के बीच पकड़ बनती है, उस हिस्से की मोटाई 950 एमएम होती है। यदि यह मोटाई 855 एमएम पर आ जाए तो पहिया फिर ट्रेन में लगाने लायक नहीं रह जाता है। मंडल के खतरनाक मोड़ ट्रेन के पहिये के इसी हिस्से को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस हिस्से को फ्लेंज कहते हैं।
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पहले मरम्मत के लिए यहां भेजे जाते थे पहिए
झांसी में खराब होने वाले पहियों को मरम्मत के लिए अब तक आगरा, गोरखपुर और कानपुर भेजा जाता था। इसमें रेलवे को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे। साथ ही पहियों को कोच से अलग भी करना पड़ता था।
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यहां-यहां हैं खतरनाक मोड़
धौलपुर, सिकरौदा, रायरू, हेतमपुर, ग्वालियर, आंतरी, सांक, संदलपुर, जाजौ
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वर्जन
कोच केयर सेंटर में नई व्हील लेथ मशीन लगाई गई है। यहां खराबी वाले पहियों को मिनटों में ठीक किया जा रहा है। इससे राजस्व के साथ ही समय की भी बचत हो रही है।
मनोज कुमार सिंह, मंडल रेल जनसंपर्क अधिकारी।
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झांसी। आगरा से झांसी रेलवे ट्रैक पर बने नौ खतरनाक मोड़ ट्रेनों की रफ्तार कम कर रहे हैं। साथ ही ट्रेनों के पहियों को भी चोट दे रहे हैं। हालात यह हैं कि 217 किमी लंबे इस ट्रैक पर जगह-जगह घुमाव के चलते ट्रेनों के पहिये घिस रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि झांसी में लगी व्हील लेथ मशीन ने दो महीने में ही 17 कोच के 136 पहियों की मरम्मत की है।
झांसी-आगरा रेलवे ट्रैक पर रोज 100 से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है, लेकिन इस पूरे ट्रैक पर यूं तो 14 घुमाव हैं, लेकिन इनमें से नौ खतरनाक मोड़ ट्रेनों के पहियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन मोड़ के चलते ट्रेनों की रफ्तार धीमी पड़ रही है। हालात यह हैं कि गतिमान एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें भी इस रेलमार्ग पर रफ्तार नहीं पकड़ पा रही हैं। साथ ही यहां घुमाव होने के चलते ट्रेन के पहिये भी खराब हो रहे हैं। अब इन पहियों की मरम्मत के लिए झांसी रेल कोच केयर सेंटर में व्हील लेथ मशीन लगाई गई है। इस मशीन पर पूरा कोच एक बार में रखकर पहियों की मरम्मत की जा रही है। इसमें 30 से 50 मिनट का समय लगता है। दो महीने (फरवरी-मार्च) में इस मशीन से 17 कोच के 136 पहिये ठीक किए जा चुके हैं।
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आगरा से निकलते ही कम हो जाती है ट्रेनों की गति
गतिमान एक्सप्रेस आगरा मंडल से झांसी तक 160 के स्थान पर अधिकतम 130 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से ही चल पाती है। आगरा कैंट से वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन तक 217 किलोमीटर की दूरी तय करने में गतिमान एक्सप्रेस को 2.40 घंटे का समय लगता है। यानि यह ट्रेन औसतन 90 किमी प्रतिघंटा की गति से चल पाती है। वहीं, हजरत निजामुद्दीन से आगरा कैंट तक 188 किलोमीटर की दूरी गतिमान एक्सप्रेस मात्र 1.40 घंटे में पूरी कर लेती है। इस मार्ग पर ट्रेन की औसत रफ्तार 134 किमी प्रतिघंटा होती है।
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इस स्थिति में खराब होते हैं पहिये
कोच में जिस सिरे से पहिये और पटरी के बीच पकड़ बनती है, उस हिस्से की मोटाई 950 एमएम होती है। यदि यह मोटाई 855 एमएम पर आ जाए तो पहिया फिर ट्रेन में लगाने लायक नहीं रह जाता है। मंडल के खतरनाक मोड़ ट्रेन के पहिये के इसी हिस्से को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस हिस्से को फ्लेंज कहते हैं।
पहले मरम्मत के लिए यहां भेजे जाते थे पहिए
झांसी में खराब होने वाले पहियों को मरम्मत के लिए अब तक आगरा, गोरखपुर और कानपुर भेजा जाता था। इसमें रेलवे को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे। साथ ही पहियों को कोच से अलग भी करना पड़ता था।
यहां-यहां हैं खतरनाक मोड़
धौलपुर, सिकरौदा, रायरू, हेतमपुर, ग्वालियर, आंतरी, सांक, संदलपुर, जाजौ
वर्जन
कोच केयर सेंटर में नई व्हील लेथ मशीन लगाई गई है। यहां खराबी वाले पहियों को मिनटों में ठीक किया जा रहा है। इससे राजस्व के साथ ही समय की भी बचत हो रही है।
मनोज कुमार सिंह, मंडल रेल जनसंपर्क अधिकारी।