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Jhansi News: अफसरों के घोटालों की 36 से ज्यादा जांच.... 5 साल में नहीं बढ़ीं अढ़ाई कोस

Tue, 08 Jul 2025 02:31 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 08 Jul 2025 02:31 AM IST
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More than 36 investigations of officers' scams.... not even two and a half kos increased in 5 years

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हिमांशु पांडेय

झांसी। सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) के पास विभिन्न सरकारी महकमों के अफसरों के भ्रष्टाचार संबंधी मामलों के तीन दर्जन से अधिक केस लंबित हैं। 36 से ज्यादा जांचें पांच साल से लटकी हुई हैं। कई मामलों में तो इनकी प्रारंभिक जांच तक पूरी नहीं हो सकी हैं। विवेचनाधिकारी जांच के नाम पर परचे काटने तक ही सीमित हैं। ऐसे में अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी है।



झांसी मंडल की विजिलेंस इकाई पर झांसी समेत ललितपुर, जालौन, बांदा, चित्रकूट के लोक सेवकोें के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच का जिम्मा है। पिछले 5 साल के दौरान विद्युत विभाग, जल संस्थान एवं खनिज विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय सहित कई अन्य विभागों के अफसरों के खिलाफ गड़बड़ी की शिकायतों की खुली और बंद जांचें शुरू हुईं। कई मामलों में साक्ष्यों के लिए अफसरों को तलब किया गया लेकिन, वह विजिलेंस के सामने पेश नहीं हो रहे। तमाम तरह के हथकंडे अपना कर बचने की कोशिश कर रहे हैं। साक्ष्यों और बयानों के कारण जांच पूरी नहीं हो पा रही है।
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पूर्व जिलाधिकारी, सीडीओ की जांच अब तक अधूरी



झांसी के पूर्व जिलाधिकारी रहे जगन्नाथ सिंह, चित्रकूट के पूर्व डीएम ओम सिंह देशवाल, चित्रकूट के पूर्व सीडीओ भूपेंद्र त्रिपाठी, तत्कालीन डीडीओ प्रेमचंद्र द्विवेदी समेत 5 अफसरों के खिलाफ चित्रकूट में तैनाती के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में विजिलेंस ने वर्ष 2022 में जांच शुरू की थी। इन अफसरों पर वर्ष 2004 से 2010 के बीच अवैध खनन सहित अन्य अनियमितताएं करके आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। यह जांचें अभी तक लंबित हैं। इसके अलावा पूर्व बीएसए वेदराम के खिलाफ खेलकूद उपकरणों की खरीद में गड़बड़ी के आरोप हैं। इस मामले का भी कुछ अता-पता नहीं चला। यह मामला फाइलों के नीचे दबकर गुम हो गया। कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
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बड़े घोटालों की जांच....बयान नहीं दे रहे अफसर



जल संस्थान में 500 करोड़ रुपये के गोलमाल की जांच विजिलेंस कर रही है। इसमें 3 पूर्व महाप्रबंधक, अधिशासी अभियंता और अन्य अफसर आरोपी बनाए गए हैं। विजिलेंस ने इनकी जांच वर्ष 2020 में शुरू की। इस घोटाले में शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये की फर्जी खरीद फरोख्त होना पाया गया था। विभागीय सूत्रों की मानें तो विजिलेंस ने आरोपी अफसरों को नोटिस जारी करके तलब किया लेकिन कई अफसरों ने अब तक बयान दर्ज नहीं कराए हैं। नोटिस देने के बाद भी आरोपों से घिरे अफसर पेश नहीं हो रहे हैं। इसके साथ ही वर्ष 2005 में केंद्र सरकार ने झांसी, बांदा, हमीरपुर, ललितपुर, जालौन, चित्रकूट समेत अन्य जनपदों में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के जरिए धन आवंटित किया था। इसमें करीब 150 करोड़ रुपये के घपले का आरोप है। वर्ष 2021 से विजिलेंस तत्कालीन अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता समेत 8 अभियंताओं की मिलीभगत की जांच कर रही है।




जांच के कई चरण होते हैं। कई जांचें अब अंतिम चरण में हैं। जांच की प्रक्रिया लगातार आगे चल रही है। - आलोक शर्मा, एसपी (विजिलेंस)
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