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दो सौ से अधिक अवैध निर्माणकर्ताओं की उम्मीद पर फिरा पानी
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झांसी। शासन द्वारा जारी की गई नई शमन नीति-2020 पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक के चलते झांसी विकास प्राधिकरण की सीमा में अवैध रूप से निर्मित लगभग दो सौ से अधिक भवन निर्माताओं की उम्मीद पर पानी फिर गया है।
शहर के अवैध निर्माणों को वैध करने के लिए शासन द्वारा शमन नीति को जारी किया था। जिसके तहत सशर्त शमन शुल्क जमा करने पर झांसी विकास प्राधिकरण द्वारा अवैध निर्माण व बेसमेंट के मानचित्र को स्वीकृति प्रदान करने का नियम तय किया गया था। योजना के तहत अधिक से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए झांसी विकास प्राधिकरण द्वारा काफी प्रचार-प्रसार भी किया था। योजना की अवधि छह माह तय की गई थी। जेडीए द्वारा लगभग दो सौ से अधिक अवैध भवन निर्माताओं को नोटिस जारी किए थे। नोटिस जारी होते ही लोगों ने मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन भी शुरू कर दिए थे। लेकिन योजना को चैलेंज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। जिसके तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा योजना पर विराम लगा दिया था।
इस संबंध में झांसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए लोग काफी उत्साहित थे। जेडीए द्वारा अधिक से अधिक लोगों को नोटिस भी जारी किए जा रहे थे। फिलहाल न्यायालय द्वारा रोक लगा दी गई है। लोगों को पुरानी शमन नीति के तहत ही शमन शुल्क जमा करने का अनुरोध किया जा रहा है।
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शहर के अवैध निर्माणों को वैध करने के लिए शासन द्वारा शमन नीति को जारी किया था। जिसके तहत सशर्त शमन शुल्क जमा करने पर झांसी विकास प्राधिकरण द्वारा अवैध निर्माण व बेसमेंट के मानचित्र को स्वीकृति प्रदान करने का नियम तय किया गया था। योजना के तहत अधिक से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए झांसी विकास प्राधिकरण द्वारा काफी प्रचार-प्रसार भी किया था। योजना की अवधि छह माह तय की गई थी। जेडीए द्वारा लगभग दो सौ से अधिक अवैध भवन निर्माताओं को नोटिस जारी किए थे। नोटिस जारी होते ही लोगों ने मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन भी शुरू कर दिए थे। लेकिन योजना को चैलेंज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। जिसके तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा योजना पर विराम लगा दिया था।
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इस संबंध में झांसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए लोग काफी उत्साहित थे। जेडीए द्वारा अधिक से अधिक लोगों को नोटिस भी जारी किए जा रहे थे। फिलहाल न्यायालय द्वारा रोक लगा दी गई है। लोगों को पुरानी शमन नीति के तहत ही शमन शुल्क जमा करने का अनुरोध किया जा रहा है।
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