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करगुवां खुर्द में मनरेगा के विवादित काम में गड़बड़ी की पुष्टि
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झांसी। टहरौली ब्लॉक के करगुवां खुर्द गांव में मनरेगा के कार्यों में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। डीडीओ उग्रसेन यादव की अगुवाई में जांच कमेटी ने जांच पूरी कर ली है। जल्द ही सीडीओ को वह रिपोर्ट सौंप देंगे। पिछले दिनों यहां जांच को आए अफसरों के सामने असलहे निकाल लिए गए थे।
मनरेगा की आड़ में करगुवा खुर्द में लाखों रुपये के घपले का कुछ दिनों पहले खुलासा हुआ था। यहां मिलीभगत करके बिना काम कराए ही 9.26 लाख रुपये का बंदरबाट हो गया। शुरूआती जांच में बीडीओ ने इसे सही पाया और ग्राम प्रधान, तकनीकी सहायक, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी से रिकवरी के आदेश दिए। लेकिन, ग्राम प्रधान ने इसे एक पक्षीय कार्रवाई ठहराते हुए दुबारा जांच की मांग की। इसके बाद जिला विकास अधिकारी उग्रसेन यादव की अगुवाई में दो सदस्यीय कमेटी गठित हुई। तीन फरवरी को जब जांच के लिए यह दोनों अफसर मौके पर पहुुंचे, वहां शिकायतकर्ता एवं ग्राम प्रधान पक्ष के लोग आपस में भिड़ गए। उस दौरान असलहे भी निकाल लिए गए। जांच बीच में ही छोड़कर दोनों अफसर लौट आए। इसके बाद सीडीओ के निर्देश पर एसडीएम मंजूर अली समेत पुलिस बल के साथ जांच के लिए अधिकारी वहां पहुंचे और सभी कार्यों का सत्यापन कराया। अधिकारियों के मुताबिक सत्यापन में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। जांच टीम ने वहां 14वें वित्त एवं राज्य वित्त आयोग के जरिए कराए कार्यों की भी जांच शुरू की है। इसकी जांच रिपोर्ट तैयार हो रही है। वहीं, डीडीओ उग्रसेन यादव का कहना है जल्द ही जांच रिपोर्ट सीडीओ को सौंप दी जाएगी।
बिना काम कराए ही हड़प ली गई पूरी रकम
करगुवा खुर्द में मनरेगा कार्यों की जांच में बीडीओ को तमाम अनियमितताएं मिली। बीडीओ की ओर से तैयार जांच रिपोर्ट में पुराने काम को नया बता कर पूरा पैसा हड़पने के आरोप में तत्कालीन ग्राम प्रधान, तकनीकी सहायक एवं ग्राम विकास अधिकारी को दोषी बताया गया है। ग्रामीणों का कहना है मौके पर कोई कार्य नहीं कराए गए।
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सचिव हुआ निलंबित
करगुवां खुर्द में सार्वजनिक शौचालय, पंचायत भवन के निर्माण में लेटलतीफी समेत अन्य शिकायत मिलने पर सचिव विकास वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। सीडीओ शैलेष कुमार के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है।
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मनरेगा की आड़ में करगुवा खुर्द में लाखों रुपये के घपले का कुछ दिनों पहले खुलासा हुआ था। यहां मिलीभगत करके बिना काम कराए ही 9.26 लाख रुपये का बंदरबाट हो गया। शुरूआती जांच में बीडीओ ने इसे सही पाया और ग्राम प्रधान, तकनीकी सहायक, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी से रिकवरी के आदेश दिए। लेकिन, ग्राम प्रधान ने इसे एक पक्षीय कार्रवाई ठहराते हुए दुबारा जांच की मांग की। इसके बाद जिला विकास अधिकारी उग्रसेन यादव की अगुवाई में दो सदस्यीय कमेटी गठित हुई। तीन फरवरी को जब जांच के लिए यह दोनों अफसर मौके पर पहुुंचे, वहां शिकायतकर्ता एवं ग्राम प्रधान पक्ष के लोग आपस में भिड़ गए। उस दौरान असलहे भी निकाल लिए गए। जांच बीच में ही छोड़कर दोनों अफसर लौट आए। इसके बाद सीडीओ के निर्देश पर एसडीएम मंजूर अली समेत पुलिस बल के साथ जांच के लिए अधिकारी वहां पहुंचे और सभी कार्यों का सत्यापन कराया। अधिकारियों के मुताबिक सत्यापन में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। जांच टीम ने वहां 14वें वित्त एवं राज्य वित्त आयोग के जरिए कराए कार्यों की भी जांच शुरू की है। इसकी जांच रिपोर्ट तैयार हो रही है। वहीं, डीडीओ उग्रसेन यादव का कहना है जल्द ही जांच रिपोर्ट सीडीओ को सौंप दी जाएगी।
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बिना काम कराए ही हड़प ली गई पूरी रकम
करगुवा खुर्द में मनरेगा कार्यों की जांच में बीडीओ को तमाम अनियमितताएं मिली। बीडीओ की ओर से तैयार जांच रिपोर्ट में पुराने काम को नया बता कर पूरा पैसा हड़पने के आरोप में तत्कालीन ग्राम प्रधान, तकनीकी सहायक एवं ग्राम विकास अधिकारी को दोषी बताया गया है। ग्रामीणों का कहना है मौके पर कोई कार्य नहीं कराए गए।
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सचिव हुआ निलंबित
करगुवां खुर्द में सार्वजनिक शौचालय, पंचायत भवन के निर्माण में लेटलतीफी समेत अन्य शिकायत मिलने पर सचिव विकास वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। सीडीओ शैलेष कुमार के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है।