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मिशन शक्ति बेटियों को सुरक्षा, सम्मान के प्रति जागरूक कराने का अभियान
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झांसी। बीआईईटी में एसपीआईयू के संयुक्त तत्वावधान में मिशन शक्ति 2020 पर ऑनलाइन वेबिनार श्रंखला का आयोजन किया गया। बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के अध्यक्ष इंजी. राकेश गुप्ता ने कहा कि कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में यह अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। मिशन शक्ति महिलाओं, बेटियों को अपनी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के प्रति जागरूक कराने के लिए एक विशेष अभियान है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा आज महिलाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह जागरूकता का अहम साधन है। निदेशक प्रो. वीके त्यागी ने कहा कि नारी सशक्तीकरण से जुडे़ अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर देश के नामी विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान कराए जाएंगे। महामारी से निजात मिलने पर सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी कराई जाएगी। प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की अधिक से अधिक महिलाओं, छात्राओं को इसका लाभ मिल सकता है। एसपीआईयू के एडवाइजर डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि यूपी की मिशन शक्ति से प्रेरणा लेकर अन्य प्रदेशों में भी इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य किन्हीं कारणों से प्रभावित होता है पर योग एवं मेडिटेशन से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है।
संयोजिका बीआईईटी की डीन आर एंड डी डॉ. शहनाज अयूब ने कहा कि इस तरह के वेबिनार से देश के कोने-कोने से महिलाएं, छात्राएं लाभान्वित होंगी। महिलाओं को स्वयं अपने स्वास्थ्य के लिए जागरूक होना होगा। अगर एक महिला को शिक्षित करते हैं तो एक पीढ़ी शिक्षित होती है। इसलिए हर तरह की जागरूकता महिलाओं के लिए आवश्यक है। जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रो. नावेद इकबाल ने शास्त्रीय पद्धति से साइकोलॉजी के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, लड़कियों का पीछा करना तथा भावनात्मक प्रताड़ना महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को दुर्बल बनाता है। इन समस्याओं पर सही पद्धति से काउंसलिंग की जरूरत है। वेबिनार में एनसीईआरटी की काउंसलर स्मिता ओझा ने कहा कि महिलाओं को अपने लिए 15 मिनट का ‘मी टाइम’ रखना चाहिए। डॉ. ममता जैन, डॉ. अतुल कुमार द्विवेदी ने भी विचार रखे।
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उन्होंने कहा कि शिक्षा आज महिलाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह जागरूकता का अहम साधन है। निदेशक प्रो. वीके त्यागी ने कहा कि नारी सशक्तीकरण से जुडे़ अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर देश के नामी विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान कराए जाएंगे। महामारी से निजात मिलने पर सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी कराई जाएगी। प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की अधिक से अधिक महिलाओं, छात्राओं को इसका लाभ मिल सकता है। एसपीआईयू के एडवाइजर डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि यूपी की मिशन शक्ति से प्रेरणा लेकर अन्य प्रदेशों में भी इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य किन्हीं कारणों से प्रभावित होता है पर योग एवं मेडिटेशन से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है।
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संयोजिका बीआईईटी की डीन आर एंड डी डॉ. शहनाज अयूब ने कहा कि इस तरह के वेबिनार से देश के कोने-कोने से महिलाएं, छात्राएं लाभान्वित होंगी। महिलाओं को स्वयं अपने स्वास्थ्य के लिए जागरूक होना होगा। अगर एक महिला को शिक्षित करते हैं तो एक पीढ़ी शिक्षित होती है। इसलिए हर तरह की जागरूकता महिलाओं के लिए आवश्यक है। जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रो. नावेद इकबाल ने शास्त्रीय पद्धति से साइकोलॉजी के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, लड़कियों का पीछा करना तथा भावनात्मक प्रताड़ना महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को दुर्बल बनाता है। इन समस्याओं पर सही पद्धति से काउंसलिंग की जरूरत है। वेबिनार में एनसीईआरटी की काउंसलर स्मिता ओझा ने कहा कि महिलाओं को अपने लिए 15 मिनट का ‘मी टाइम’ रखना चाहिए। डॉ. ममता जैन, डॉ. अतुल कुमार द्विवेदी ने भी विचार रखे।
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