फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   medical collage tendar

मशीन को आए बजट से ठेका कंपनी का भुगतान

Wed, 20 Apr 2016 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 20 Apr 2016 01:08 AM IST
विज्ञापन
medical collage tendar
medical collage, jhansi hindi news - फोटो : demo
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में विवादोंमें घिरे वरिष्ठ बाबू का एक और मामला प्रकाश में आया है। पहले से ही दो आरोपों में घिरे वरिष्ठ बाबू ने अब रेडियोलॉजी विभाग में एमआरआई मशीन की एएमसी/ सीएमसी के लिए आए बजट से ठेका कंपनी का भुगतान करा दिया, जो वित्तीय अनियमितता है।
विज्ञापन

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य द्वारा शासन को पत्र लिखकर रेडियोलॉजी विभाग की एमआरआई मशीन की एएमसी/ सीएमसी के लिए बजट मांगा गया था।

इस पर शासन द्वारा 16 व्यवसायिक मद में 35 लाख रुपये रिलीज कर दिए गए। साथ ही चिकित्सा-शिक्षा महानिदेशक द्वारा लिखे पत्र में स्पष्ट किया गया कि प्राचार्य द्वारा भेजे गए पत्र के क्रम में यह बजट जारी किया गया है। बजट आने के बाद वरिष्ठ बाबू ने अपनी चतुराई से एक बार फिर अधिकारियों को गुमराह कर दिया। कॉलेज प्राचार्य से बाबू ने 16 व्यावसायिक मद में पैसा जारी होने की बात कहते हुए ठेका कंपनी के कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान करवा दिया।
विज्ञापन


बाद में जब मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा शासन स्तर पर बात कर रेडियोलॉजी विभाग के बजट को लेकर जानकारी हुई, तब मामले का खुलासा हुआ। शासन से जवाब मिला कि जो पैसा 16 व्यावसायिक मद में जारी किया गया था, वही रेडियोलॉजी विभाग के लिए था।
विज्ञापन
विज्ञापन


तो क्या चला कमीशन का खेल?
यह बात तो सभी को पता है कि सरकारी विभागों में बिलों का भुगतान कराना टेढ़ी खीर होती है। वहीं, बाबू द्वारा अधिकारियों को गुमराह करने के पीछे कमीशन के खेल की बू आ रही है। सूत्र बता रहे हैं कि जब शासन के पत्र में एएमसी/ सीएमसी का जिक्र था, तब ठेका कंपनी को क्यों भुगतान करा दिया गया। भुगतान कराने के पहले एक बार अधिकारियों की सलाह लेनी चाहिए थी। आखिर इतनी भी जल्दी क्या थी कि अधिकारियों को जीओ तक नहीं दिखाया गया।


भुगतान कराते समय वरिष्ठ बाबू द्वारा जीओ नहीं दिखाया गया। सिर्फ यह बताया गया कि 16 व्यवसायिक मद में 35 लाख रुपये आया है। यह सही है कि पत्र में एएमसी/ सीएमसी का जिक्र था। वहीं, दूसरी तरफ एएमसी/ सीएमसी करने वाली कंपनी भी अपना बिल नहीं दे पाई।
- डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed