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झांसी और उरई के डॉक्टर हिंदी में लिख रहे एमबीबीएस की किताबें
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झांसी। बुंदेलखंड के दो मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर मिलकर एनाटॉमी (शरीर रचना) विषय की किताब हिंदी में तैयार कर रहे हैं। मार्च 2023 तक तीन संस्करणों की किताब एमबीबीएस के छात्रों के लिए बाजार में आ जाएगी। डॉक्टरों का कहना है कि इस विषय की अंग्रेजी में लिखी किताबों में कई तकनीकी शब्द लैटिन और ग्रीक भाषा के हैं। ऐसे में हिंदी मीडियम से पढ़कर आए एमबीबीएस छात्रों को पढ़ाई करने में बहुत समस्या होती है। इसी वजह से उन्होंने मातृभाषा में किताब लिखने का फैसला किया। इनमें एक डॉक्टर झांसी और एक उरई मेडिकल कॉलेज के हैं।
मध्य प्रदेश (एमपी) हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। ये फैसला भले ही एमपी सरकार ने हाल ही में लिया हो लेकिन इससे चार महीने पहले ही झांसी और उरई मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा शिक्षकों ने एनाटॉमी विषय की किताब हिंदी में लिखनी शुरू कर दी थी। झांसी मेडिकल कॉलेज के उप प्राचार्य डॉ. अंशुल जैन इस किताब के संपादक तो उरई मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. रघुवीर सिंह मंडलोई लेखक हैं। डॉ. रघुवीर ने बताया कि वह खुद हिंदी मीडियम से पढ़े हैं। ऐसे में जब उनका प्रवेश एमबीबीएस में हुआ तो अंग्रेजी में किताबें होने से पढ़ाई में काफी परेशानी हुई।
उन्होंने कहा कि आजकल अंग्रेजी भाषा का चलन बहुत ज्यादा हो गया है। इसके बावजूद हिंदी मीडियम के जो छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए आते हैं, उन्हें विषय को समझने में बहुत समस्या होती है। पिछले कुछ वर्षों से कई छात्र अंग्रेजी में एनाटॉमी विषय समझ में न आने की समस्या बता रहे थे। इस विषय की किताब में कई तकनीकी शब्द लैटिन और ग्रीक भाषा के हैं। ऐसे में उन्होंने डॉ. अंशुल से बात करके छात्रों की परेशानी बताई। उप प्राचार्य ने साथ मिलकर हिंदी में किताब लिखने के लिए प्रेरित किया। जून 2022 से दोनों चिकित्सा शिक्षकों ने मिलकर किताब लिखनी शुरू कर दी।
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तीन संस्करण हिंदी में आएंगे
झांसी। बताया गया कि एनाटॉमी को तीन भागों में बांटकर पढ़ाया जाता है। एक किताब में सिर, गला और मस्तिष्क, दूसरी में सीना व पेट और तीसरी में हाथ-पैर के बारे में जानकारी होती है। ऐसे में तीनों संस्करण की किताबें हिंदी में आएंगी। पहली किताब अगले महीने पूरी हो जाएगी।
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मध्य प्रदेश (एमपी) हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। ये फैसला भले ही एमपी सरकार ने हाल ही में लिया हो लेकिन इससे चार महीने पहले ही झांसी और उरई मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा शिक्षकों ने एनाटॉमी विषय की किताब हिंदी में लिखनी शुरू कर दी थी। झांसी मेडिकल कॉलेज के उप प्राचार्य डॉ. अंशुल जैन इस किताब के संपादक तो उरई मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. रघुवीर सिंह मंडलोई लेखक हैं। डॉ. रघुवीर ने बताया कि वह खुद हिंदी मीडियम से पढ़े हैं। ऐसे में जब उनका प्रवेश एमबीबीएस में हुआ तो अंग्रेजी में किताबें होने से पढ़ाई में काफी परेशानी हुई।
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उन्होंने कहा कि आजकल अंग्रेजी भाषा का चलन बहुत ज्यादा हो गया है। इसके बावजूद हिंदी मीडियम के जो छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए आते हैं, उन्हें विषय को समझने में बहुत समस्या होती है। पिछले कुछ वर्षों से कई छात्र अंग्रेजी में एनाटॉमी विषय समझ में न आने की समस्या बता रहे थे। इस विषय की किताब में कई तकनीकी शब्द लैटिन और ग्रीक भाषा के हैं। ऐसे में उन्होंने डॉ. अंशुल से बात करके छात्रों की परेशानी बताई। उप प्राचार्य ने साथ मिलकर हिंदी में किताब लिखने के लिए प्रेरित किया। जून 2022 से दोनों चिकित्सा शिक्षकों ने मिलकर किताब लिखनी शुरू कर दी।
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तीन संस्करण हिंदी में आएंगे
झांसी। बताया गया कि एनाटॉमी को तीन भागों में बांटकर पढ़ाया जाता है। एक किताब में सिर, गला और मस्तिष्क, दूसरी में सीना व पेट और तीसरी में हाथ-पैर के बारे में जानकारी होती है। ऐसे में तीनों संस्करण की किताबें हिंदी में आएंगी। पहली किताब अगले महीने पूरी हो जाएगी।