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लॉकरों में बंद अपने के आने का इंजतार कर रहीं है 70 लोगों की अस्थियां
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लॉकरों में बंद अपनों के आने का इंतजार कर रहीं हैं 70 लोगों की अस्थियां
झांसी। कोरोना की दूसरी लहर के हमले से हुई मौतों ने लोगों को काफी दहशत में डाल दिया था। जिसके चलते लोग कोरोना काल के दौरान अपनों की अंतिम यात्रा में भी जाने से परहेज कर रहे थे। परिजन भी किसी तरह से दाह संस्कार की रस्म को अदा कर रहे थे। आलम यह है कि शहर के श्मशान घाटों के लॉकरों में लगभग सत्तर से अधिक लोगों की अस्थियां रखी हुई हैं। जिनको लेने अब तक उनके परिवार का कोई नहीं आया है।
किसी भी व्यक्ति की मौत के दौरान अंतिम संस्कार कर विधि विधान के साथ अस्थियों को तीर्थ स्थानों पर बहने वाली पवित्र नदियों में विसर्जित किया जाता है। संक्रमण की दूसरी लहर के दस्तक देते ही मरीजों की संख्या में दिन प्रतिदिन इजाफा देखने को मिल रहा था। वहीं, मौतों के आंकड़े भी तेजी से बढ़ रहे थे। शहर वासियों में कोरोना का खौफ इतना था कि लोग सामान्य तरीके से हुई मौत के बाद उनकी शवयात्रा में जाने से बच रहे थे। संक्रमण व सामान्य मौत होने पर भी परिजनों द्वारा मुक्तिधाम में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा अंतिम संस्कार कराया जा रहा था। ऐसे में शहर के श्मशानों में लोगों की अस्थियों का जमावड़ा शुरू हो गया था। संक्रमण की गति थमते ही अब कई लोग अस्थियां लेने के लिए पहुंचे हैं। लेकिन शहर के कई मुक्तिधाम में अब तक सत्तर से अधिक लोगों की अस्थियां लॉकरों में रखी हुई हैं, जिन्हें अब तक लेने कोई नहीं आया है। नंदनपुरा स्थित मुक्तिधाम के केयर टेकर विशाल किशोर ने बताया की संक्रमण चरम पर होने के दौरान मौतें भी अधिक हो रही थी। जिसके चलते लोग शमशान के अंदर तक आने से बच रहे थे। पहले कई लोगों की अस्थियां रखी हुईं थी।
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झांसी। कोरोना की दूसरी लहर के हमले से हुई मौतों ने लोगों को काफी दहशत में डाल दिया था। जिसके चलते लोग कोरोना काल के दौरान अपनों की अंतिम यात्रा में भी जाने से परहेज कर रहे थे। परिजन भी किसी तरह से दाह संस्कार की रस्म को अदा कर रहे थे। आलम यह है कि शहर के श्मशान घाटों के लॉकरों में लगभग सत्तर से अधिक लोगों की अस्थियां रखी हुई हैं। जिनको लेने अब तक उनके परिवार का कोई नहीं आया है।
किसी भी व्यक्ति की मौत के दौरान अंतिम संस्कार कर विधि विधान के साथ अस्थियों को तीर्थ स्थानों पर बहने वाली पवित्र नदियों में विसर्जित किया जाता है। संक्रमण की दूसरी लहर के दस्तक देते ही मरीजों की संख्या में दिन प्रतिदिन इजाफा देखने को मिल रहा था। वहीं, मौतों के आंकड़े भी तेजी से बढ़ रहे थे। शहर वासियों में कोरोना का खौफ इतना था कि लोग सामान्य तरीके से हुई मौत के बाद उनकी शवयात्रा में जाने से बच रहे थे। संक्रमण व सामान्य मौत होने पर भी परिजनों द्वारा मुक्तिधाम में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा अंतिम संस्कार कराया जा रहा था। ऐसे में शहर के श्मशानों में लोगों की अस्थियों का जमावड़ा शुरू हो गया था। संक्रमण की गति थमते ही अब कई लोग अस्थियां लेने के लिए पहुंचे हैं। लेकिन शहर के कई मुक्तिधाम में अब तक सत्तर से अधिक लोगों की अस्थियां लॉकरों में रखी हुई हैं, जिन्हें अब तक लेने कोई नहीं आया है। नंदनपुरा स्थित मुक्तिधाम के केयर टेकर विशाल किशोर ने बताया की संक्रमण चरम पर होने के दौरान मौतें भी अधिक हो रही थी। जिसके चलते लोग शमशान के अंदर तक आने से बच रहे थे। पहले कई लोगों की अस्थियां रखी हुईं थी।
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