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लॉकडाउन ने सरकार को लगाई अरबों की चपत

Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 26 Apr 2020 12:30 AM IST
lockdown : big loss in tax
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झांसी। वाणिज्य कर विभाग ने मार्च का लक्ष्य 5269 करोड़ तय रखा था, जिसके सापेक्ष सिर्फ 1498 करोड़ राजस्व ही सरकार को मिल सका। जो लक्ष्य से 3769 करोड़ कम है। इससे लॉकडाउन में सरकार को टैक्स के मामले में तगड़ा नुकसान हुआ है। प्रदेश सरकार का खजाना भरने में वाणिज्य कर विभाग का साठ फीसदी योगदान रहता है।
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वाणिज्य कर विभाग के अंतर्गत अभी प्रदेश में 14.56 लाख पंजीकृत व्यापारी हैं। विभाग ने प्रदेश के 75 जिलों को 20 जोन में बांट रखा है। इसमें लखनऊ प्रथम, लखनऊ द्वितीय, कानपुर प्रथम, कानपुर द्वितीय, गौतम बुद्ध नगर, आगरा, मेरठ, झांसी, वाराणसी प्रथम, वाराणसी द्वितीय, मुरादाबाद, प्रयागराज, सहारनपुर, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, इटावा व गोरखपुर हैं। विभाग ने मार्च का लक्ष्य 5269 करोड़ निर्धारित किया था। मगर लॉकडाउन के चलते कारोबार ठप पड़ गए। लॉकडाउन में किराना, दवा और दूध को छोड़कर अन्य सभी व्यापारियों को खासा नुकसान हो रहा है। इससे वे टैक्स नहीं भर पा रहे हैं। मार्च का टैक्स 20 अप्रैल तक जमा होना था, लेकिन इस अवधि में 1498 करोड़ राजस्व ही प्राप्त हो सका। टैक्स कम मिलने से अधिकारी चिंतित हैं।

- झांसी जोन को मार्च का टैक्स कितना मिला, अभी मुख्यालय से इसके आंकड़े प्राप्त नहीं हुए हैं। मगर प्रदेश भर के आंकड़े के हिसाब से अभी 3769 करोड़ टैक्स कम मिला है।
प्रदीप कुमार सिंह, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन।
4762 करोड़ की करनी होगी भरपाई
वाणिज्य कर विभाग ने वित्तीय सत्र 2016-20 में 77640 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया था। मगर तय अवधि तक 72878 करोड़ का राजस्व मिल सका। इस हिसाब से सरकार को वित्तीय वर्ष का लक्ष्य पूरा करने के लिए 4762 करोड़ और जुटाने होंगे। अभी यह नुकसान चल रहा है।
व्यापारियों को दे रखीं हैं ये सुविधाएं
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प्रदेश सरकार ने कारोबारियों को तीन भागों में बांट दिया है। इसमें पहले में शून्य से डेढ़ करोड़ रुपये तक, दूसरे में डेढ़ से पांच करोड़ और तीसरे में पांच करोड़ और इससे अधिक टर्नओवर रखने वाले कारोबारियों को रखा है। पहले व दूसरे भाग के कारोबारी फरवरी का 30 जून, मार्च का तीन जुलाई व अप्रैल का छह जुलाई तक रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। उनसे कोई ब्याज नहीं लिया जाएगा और न ही विलंब शुल्क लिया जाएगा। इसी तरह तीसरे भाग के कारोबारी फरवरी, मार्च व अप्रैल का रिटर्न 24 जून तक जमा कर सकते हैं। कोई विलंब शुल्क नहीं लिया जाएगा। साथ ही 24 जून के पंद्रह दिन बाद तक ब्याज भी 18 प्रतिशत की जगह नौ प्रतिशत लिया जाएगा।

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