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बसों से भेजा जा रहा है मजदूरों को घर
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भोजला मंडी में विभिन्न प्रदेशों से आए मजदूरों की जांच कर उनके गंतव्य को भेजा जा रहा है।
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झांसी। लॉकडाउन में फंसे मजदूरों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उन्हें बसों द्वारा घरों तक पहुंचाने के लिए भोजला मंडी में की गईं व्यवस्था चरमराई हुई हैं। औपचारिकताओं के नाम पर मजदूरों को 10 से 12 घंटे मंडी में ही भटकना पड़ रहा है। इस दौरान उन्हें या तो लाइन में लगना पड़ता है या भीषण गर्मी में मजबूरन बस के अंदर बैठना पड़ रहा है। यहां सामाजिक दूरी का भी पालन नहीं हो रहा है। मजदूरों के अनुसार खाने-पीने की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। बच्चे भूख-प्यास से बिलख रहे हैं। बड़े भी परेशान हैं। अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहे।
गोरखपुर निवासी आनंद मध्य प्रदेश के रतलाम में प्राइवेट नौकरी करते हैं। बस से सुबह चार बजे वह झांसी आए। उनके साथ बस में 40 लोग और थे, जिनको यूपी के अलग- अलग जिलों में अपने घर जाना था। सुबह सात बजे उनको कतार में लगा दिया गया। तीन घंटे तक उनकी लिखा पढ़ी चलती रही। दस बजे दोबारा उनको गोरखपुर जाने वाली बस में बिठा दिया गया। सरकारी लिखा पढ़ी पूरी न होने के कारण दोपहर दो बजे तक बस को रवाना नहीं किया गया। तपती धूप में बस में पल- पल गुजारना मुश्किल हो रहा था। भूख- प्यास से लोगों का बुरा हाल था। बच्चे गर्मी से रोए जा रहे थे। कुछ ऐसा ही हाल दूसरी बसों में बच्चों के साथ बैठे गोरखपुर के धरमपुर निवासी बन्नेलाल चौधरी, बलिया के रविदास, अयोध्या निवासी श्यामलाल समेत 200 से अधिक लोगों का था। चालक भी परेशान हो रहे थे।
दरअसल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फंसे लोगों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए भोजला मंडी में केंद्र बनाया गया है। मगर प्रशासन बस से आ रहे लोगों के साथ इतनी औपचारिकताएं कर रहा है कि वे घंटों बसों में फंसे रहते हैं। गर्मी में लोगों के लिए पल- पल काटना मुश्किल रहता है।
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‘बाहर से आए छह हजार लोगों को प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बसों के जरिए भेजा गया। सबका डेटा तैयार किया गया, ये डेटा संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को भेजा जा रहा है, ताकि वहां पहुंचने पर वे इनका परीक्षण करा सकें। एक या दो सवारी होने पर पूरी बस रवाना नहीं की जा सकती। सम्मानजनक संख्या होने पर तत्काल संबंधित जिलों को बस रवाना कर दी गईं। समय पर खान-पान दिया जा रहा है।’
निखिल टीकाराम फुंडे, सीडीओ
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गोरखपुर निवासी आनंद मध्य प्रदेश के रतलाम में प्राइवेट नौकरी करते हैं। बस से सुबह चार बजे वह झांसी आए। उनके साथ बस में 40 लोग और थे, जिनको यूपी के अलग- अलग जिलों में अपने घर जाना था। सुबह सात बजे उनको कतार में लगा दिया गया। तीन घंटे तक उनकी लिखा पढ़ी चलती रही। दस बजे दोबारा उनको गोरखपुर जाने वाली बस में बिठा दिया गया। सरकारी लिखा पढ़ी पूरी न होने के कारण दोपहर दो बजे तक बस को रवाना नहीं किया गया। तपती धूप में बस में पल- पल गुजारना मुश्किल हो रहा था। भूख- प्यास से लोगों का बुरा हाल था। बच्चे गर्मी से रोए जा रहे थे। कुछ ऐसा ही हाल दूसरी बसों में बच्चों के साथ बैठे गोरखपुर के धरमपुर निवासी बन्नेलाल चौधरी, बलिया के रविदास, अयोध्या निवासी श्यामलाल समेत 200 से अधिक लोगों का था। चालक भी परेशान हो रहे थे।
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दरअसल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फंसे लोगों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए भोजला मंडी में केंद्र बनाया गया है। मगर प्रशासन बस से आ रहे लोगों के साथ इतनी औपचारिकताएं कर रहा है कि वे घंटों बसों में फंसे रहते हैं। गर्मी में लोगों के लिए पल- पल काटना मुश्किल रहता है।
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‘बाहर से आए छह हजार लोगों को प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बसों के जरिए भेजा गया। सबका डेटा तैयार किया गया, ये डेटा संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को भेजा जा रहा है, ताकि वहां पहुंचने पर वे इनका परीक्षण करा सकें। एक या दो सवारी होने पर पूरी बस रवाना नहीं की जा सकती। सम्मानजनक संख्या होने पर तत्काल संबंधित जिलों को बस रवाना कर दी गईं। समय पर खान-पान दिया जा रहा है।’
निखिल टीकाराम फुंडे, सीडीओ