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जिला पंचायत की बैठक फिर स्थगित, विकास प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jan 2018 01:07 AM IST
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meeting, jhansi news
- फोटो : demo
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कोरम पूरा न होने की वजह से शनिवार को जिला पंचायत बोर्ड की बैठक दुबारा स्थगित हो गई। इससे 14.45 करोड़ रुपये के कार्यों पर फैसला नहीं हो पाया। इस स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में विकास प्रभावित बना हुआ है।
जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों के बीच चल रही आपसी रस्साकसी का खामियाजा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में 14.45 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य किए जाने हैं। इसके लिए बोर्ड की स्वीकृति आवश्यक है। इसके लिए 28 अक्तूबर 2017 को बैठक आयोजित की गई थी। लेकिन, इसमें कोरम पूरा नहीं हो पाया था। शनिवार को एक बार फिर बैठक आयोजित की गई, लेकिन इस बार भी वही स्थिति रही। दो-तीन सदस्यों को छोड़कर कोई भी बैठक में नहीं पहुंचा। बैठक बारह बजे शुरू होनी थी। अधिकारी दोपहर डेढ़ बजे तक कोरम पूरा होने का इंतजार करते रहे, लेकिन बात नहीं बन पाई। ऐसे में एक बार फिर बैठक स्थगित कर दी गई।
कोरम के लिए 22 सदस्य जरूरी
जिला पंचायत के 43 सदस्य हैं। इनमें 24 निर्वाचित और बाकी पदेन सदस्य हैं। पदेन सदस्यों में आठ ब्लाक प्रमुख, चार विधायक, तीन एमएलसी और तीन सांसद हैं। चूंकि, बोर्ड की बैठक में कार्ययोजना का प्रस्ताव पारित होना था। ऐसे में न्यूनतम 22 सदस्यों का उपस्थित रहना जरूरी था।
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अब कोरम का नहीं होगा इंतजार
जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी कमलेश सिंह ने बताया कि नियमानुसार दो बैठक स्थगित होने के बाद तीसरी बैठक में बगैर कोरम पूरा हुए ही प्रस्ताव पारित किए जा सकते हैं। जल्द ही अगली बैठक की तिथि घोषित कर दी जाएगी।
यह काम हैं प्रभावित
गांवों को दूसरे गांवों से और मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए नये संपर्क मार्गों का निर्माण और पुराने रास्तों का जीर्णोद्धार किया जाना है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा जानवरों से निपटने के लिए जिला पंचायत की बीस कांजी हाउस शुरू करने की योजना है। पंचायत के पास इसके लिए भवन भी हैं, जिनकी मरम्मत की जानी है। लेकिन, बैठक स्थगित होने की वजह से कोई फैसला नहीं हो सका।
अध्यक्ष के साथ अपनी पार्टी भी नहीं
जिला पंचायत में समाजवादी पार्टी का बहुमत है। चौबीस निर्वाचित सदस्यों में से चौदह सपा, छह भाजपा और चार बसपा के हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिमा सिंह भी सपा से हैं। बावजूद, उन्हें अपने दल के सदस्यों का भी साथ नहीं मिल रहा है। इस विरोधाभास की शुरुआत पंचायत चुनाव के दरम्यान ही हो गई थी। स्थानीय नेता प्रतिमा के पक्ष में नहीं थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर उन्हें साथ देना पड़ा था। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अब अविश्वास प्रस्ताव लाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। जानकारों का कहना है कि इसमें भाजपा के नेता सपा के कुछ सदस्यों को भी अपने खेमे में लाने में जुटे हैं।
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जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों के बीच चल रही आपसी रस्साकसी का खामियाजा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में 14.45 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य किए जाने हैं। इसके लिए बोर्ड की स्वीकृति आवश्यक है। इसके लिए 28 अक्तूबर 2017 को बैठक आयोजित की गई थी। लेकिन, इसमें कोरम पूरा नहीं हो पाया था। शनिवार को एक बार फिर बैठक आयोजित की गई, लेकिन इस बार भी वही स्थिति रही। दो-तीन सदस्यों को छोड़कर कोई भी बैठक में नहीं पहुंचा। बैठक बारह बजे शुरू होनी थी। अधिकारी दोपहर डेढ़ बजे तक कोरम पूरा होने का इंतजार करते रहे, लेकिन बात नहीं बन पाई। ऐसे में एक बार फिर बैठक स्थगित कर दी गई।
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कोरम के लिए 22 सदस्य जरूरी
जिला पंचायत के 43 सदस्य हैं। इनमें 24 निर्वाचित और बाकी पदेन सदस्य हैं। पदेन सदस्यों में आठ ब्लाक प्रमुख, चार विधायक, तीन एमएलसी और तीन सांसद हैं। चूंकि, बोर्ड की बैठक में कार्ययोजना का प्रस्ताव पारित होना था। ऐसे में न्यूनतम 22 सदस्यों का उपस्थित रहना जरूरी था।
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अब कोरम का नहीं होगा इंतजार
जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी कमलेश सिंह ने बताया कि नियमानुसार दो बैठक स्थगित होने के बाद तीसरी बैठक में बगैर कोरम पूरा हुए ही प्रस्ताव पारित किए जा सकते हैं। जल्द ही अगली बैठक की तिथि घोषित कर दी जाएगी।
यह काम हैं प्रभावित
गांवों को दूसरे गांवों से और मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए नये संपर्क मार्गों का निर्माण और पुराने रास्तों का जीर्णोद्धार किया जाना है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा जानवरों से निपटने के लिए जिला पंचायत की बीस कांजी हाउस शुरू करने की योजना है। पंचायत के पास इसके लिए भवन भी हैं, जिनकी मरम्मत की जानी है। लेकिन, बैठक स्थगित होने की वजह से कोई फैसला नहीं हो सका।
अध्यक्ष के साथ अपनी पार्टी भी नहीं
जिला पंचायत में समाजवादी पार्टी का बहुमत है। चौबीस निर्वाचित सदस्यों में से चौदह सपा, छह भाजपा और चार बसपा के हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिमा सिंह भी सपा से हैं। बावजूद, उन्हें अपने दल के सदस्यों का भी साथ नहीं मिल रहा है। इस विरोधाभास की शुरुआत पंचायत चुनाव के दरम्यान ही हो गई थी। स्थानीय नेता प्रतिमा के पक्ष में नहीं थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर उन्हें साथ देना पड़ा था। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अब अविश्वास प्रस्ताव लाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। जानकारों का कहना है कि इसमें भाजपा के नेता सपा के कुछ सदस्यों को भी अपने खेमे में लाने में जुटे हैं।