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Jhansi: सरकारी दफ्तरों के पेंशन सेक्शन में तय है हर फाइल का ‘दाम’, सेवानिवृत्त कर्मी बनते हैं सबसे अधिक शिकार

Wed, 14 Jan 2026 08:22 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Wed, 14 Jan 2026 08:22 AM IST
सार

सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने बताया कि रिटायर होने के कई माह बाद तक जानबूझकर पेंशन के कागज नहीं बनाए जाते। शुरुआत में नाममात्र की ग्रेच्युटी दी जाती है। शेष भुगतान के लिए संबंधित बाबू के चक्कर काटने पड़ते हैं।

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Jhansi: The price of every file is fixed in the pension section of government offices.
घूसखोरी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोक निर्माण विभाग ही नहीं बल्कि अधिकांश सरकारी दफ्तरों के पेंशन सेक्शन में बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता। हर फाइल के यहां रेट तय हैं। पटल बाबू बाकायदा चढ़ावे की मांग करते हैं। इसके बिना आलमारी से फाइल नहीं निकलती। इनकी शिकायत पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती। इस वजह से अधिकांश सरकारी दफ्तरों में पेंशन, ग्रेच्युटी, एरियर, पीपीएफ, जीपीएफ भुगतान जैसे मामलों की फाइलों के अंबार लगे रहते हैं।
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लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने बताया कि रिटायर होने के कई माह बाद तक जानबूझकर पेंशन के कागज नहीं बनाए जाते। शुरुआत में नाममात्र की ग्रेच्युटी दी जाती है। शेष भुगतान के लिए संबंधित बाबू के चक्कर काटने पड़ते हैं। एरियर भुगतान के लिए इसका 10 प्रतिशत मांगा जाता है। स्वास्थ्य प्रतिपूर्ति की फाइल बिना रिश्वत दिए पास नहीं होती। सेवा संबंधी फाइल तय करने के लिए अगल-अलग रेट तय है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों से अधिक पैसा मांगा जाता है जबकि सेवारत कर्मचारियों का भी बिना पैसा दिए काम नहीं होता। नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, जल निगम, सिंचाई विभाग, बिजली विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, मंडी जैसे बड़े विभागों में यह शिकायतें आम हैं। कई बार यह अफसरों तक पहुंचती हैं लेकिन पेंशन बाबू के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। एंटी करप्शन टीम की धरपकड़ के बाद ही ऐसे मामले खुलते हैं। शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा मामले पकड़े गए।
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