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Jhansi: छात्रा से दुष्कर्म के मामले में दस साल की सजा, चार साल पुराने मामले में आया न्यायालय का फैसला

Fri, 13 Mar 2026 09:57 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: दीपक महाजन Updated Fri, 13 Mar 2026 09:57 AM IST
सार

इसी मामले में मारपीट एवं धमकाने के आरोपी उसके परिवार के पांच सदस्यों के खिलाफ साक्ष्य न मिलने पर कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
 

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Jhansi: Ten years' imprisonment in the case of a student, decision came in a four-year-old case.
कोर्ट फैसला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

घर में घुसकर छात्रा से दुष्कर्म के मामले में अपर न्यायाधीश अनुभव द्विवेदी ने रक्सा निवासी अखिलेश पाल को दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसी मामले में मारपीट एवं धमकाने के आरोपी उसके परिवार के पांच सदस्यों के खिलाफ साक्ष्य न मिलने पर कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक, रक्सा के ग्राम सिमरा निवासी अखिलेश पाल (हाल निवासी दतिया गेट के बाहर नकटा चौपड़ा) के खिलाफ कोतवाली में छात्रा ने दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह बीए प्रथम वर्ष की छात्रा थी। कॉलेज जाते समय रास्ते में आरोपी उसका पीछा करने के साथ छेड़खानी करता था। अखिलेश के परिजनों से यह बात बताने पर वे भी गाली-गलौज करते हुए धमकाने लगे।
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10 अप्रैल 2022 की दोपहर दो बजे उसके माता-पिता बाजार गए थे। छात्रा घर में अकेली थी। आरोप है कि उसी दौरान अखिलेश घर में आ घुसा और दुष्कर्म किया। यह बात किसी से बताने पर चेहरे को तेजाब से जला देने की धमकी देते हुए भाग निकला। डर कर छात्रा चुप रही। आरोपी उसे रोजाना धमकी भरे मैसेज भेजता था। घबराकर उसने यह बात अपने परिजनों को बताई।
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इसके बाद छात्रा ने 10 अगस्त 2022 को कोतवाली में अखिलेश पाल समेत उसके पिता गुरुदयाल, मां उर्मिला, चाचा सेवाराम, चाची गीता एवं अवसर के खिलाफ दुष्कर्म समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट 22 सितंबर 2022 को दाखिल कर दी। अभियोजन पक्ष की ओर से अखिलेश के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्य को विश्वसनीय मानते हुए कोर्ट ने उसे दोषी पाया और सजा सुनाई। वहीं, गुरुदयाल, उर्मिला, सेवाराम, गीता एवं अवसर पाल के खिलाफ कोई साक्ष्य न मिलने पर उन्हें बरी कर दिया।

 
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