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Jhansi: सड़कों पर सरपट दौड़ रहे ई-वाहन, चार्जिंग स्टेशन बेदम, बैटरी खत्म होने पर भटकते रहते हैं वाहन चालक
Wed, 30 Sep 2026 12:44 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Wed, 30 Sep 2026 12:44 PM IST
सार
खासकर दूसरे शहरों और राज्यों से आने वाले लोग वाहनों की चार्जिंग खत्म होने की नौबत आने पर भटकते रहते हैं। कोई होटल जाकर अपने वाहन को चार्ज करता है तो कोई कार के सर्विस सेंटर पहुंचकर।
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नई बस्ती स्थित रघुनाथ महल के पीछे गली में बंद पड़ा ई वाहन चार्जिंग पॉइंट।
- फोटो : संवाद
विस्तार
महानगर की सड़कों पर ई-वाहन तो दौड़ रहे हैं लेकिन चार्जिंग स्टेशन बेदम हैं। ऐसे में खासकर दूसरे शहरों और राज्यों से आने वाले लोग वाहनों की चार्जिंग खत्म होने की नौबत आने पर भटकते रहते हैं। कोई होटल जाकर अपने वाहन को चार्ज करता है तो कोई कार के सर्विस सेंटर पहुंचकर।
जिले में लगातार ई-वाहनों की संख्या में इजाफा हो रहा है। झांसी में मौजूदा समय में लगभग सात हजार ई-वाहन हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर करीब पौने तीन साल पहले झांसी विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने महानगर में 10 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए निजी कंपनी से अनुबंध किया था। बाद में इन स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन लगवाए गए।
इन जगहों पर बंद मिले चार्जिंग स्टेशन
अमर उजाला टीम ने मंगलवार को कुछ चार्जिंग स्टेशनों की पड़ताल की। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे आरटीओ कार्यालय के पास स्थित चार्जिंग स्टेशन बंद पड़ा था। इसमें लगे जाले और धूल साफ बता रहे थे कि इसका महीनों से किसी ने उपयोग ही नहीं किया है। आसपास मौजूद लोगों ने भी बताया कि चार्जिंग स्टेशन बंद पड़ा रहता है। इसलिए कोई भी यहां ई-वाहन चार्ज करने नहीं आता है। शाम सवा चार बजे अटल एकता पार्क के सामने भी चार्जिंग स्टेशन बंद मिला। हालांकि, पार्क घूमने आने वाले लोगों ने बताया कि यहां कभी-कभार ई-वाहन चार्ज होते दिखाई देता है, लेकिन अक्सर यह भी बंद रहता है। इसके अलावा रघुनाथ राव महल के पास समेत अन्य चार्जिंग स्टेशनों की भी यही स्थिति है, जो कि बंद पड़े हैं।
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जेडीए को भी आय में हिस्सा मिलने का है प्रावधान
चार्जिंग स्टेशन के लिए जेडीए की ओर से जमीन दी गई है। ऐसे में स्टेशन स्थापित करने वाली निजी कंपनी को प्रति यूनिट बिजली खपत पर ई-वाहन चालकों से होने वाली आय में कुछ हिस्सा जेडीए को भी देना है। चूंकि, अधिकांश समय चार्जिंग स्टेशन बंद ही रहते हैं। ऐसे में कंपनी को भी बहुत आय नहीं हो रही है। इसलिए जेडीए को भी पैसा नहीं मिल पा रहा है।
यह बोले जेडीए उपाध्यक्ष
चार्जिंग स्टेशन की स्थापना संबंधी नियमों को देखा जाएगा। अगर किसी एजेंसी द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - हिमांशु गौतम, उपाध्यक्ष, जेडीए।
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जिले में लगातार ई-वाहनों की संख्या में इजाफा हो रहा है। झांसी में मौजूदा समय में लगभग सात हजार ई-वाहन हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर करीब पौने तीन साल पहले झांसी विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने महानगर में 10 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए निजी कंपनी से अनुबंध किया था। बाद में इन स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन लगवाए गए।
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इन जगहों पर बंद मिले चार्जिंग स्टेशन
अमर उजाला टीम ने मंगलवार को कुछ चार्जिंग स्टेशनों की पड़ताल की। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे आरटीओ कार्यालय के पास स्थित चार्जिंग स्टेशन बंद पड़ा था। इसमें लगे जाले और धूल साफ बता रहे थे कि इसका महीनों से किसी ने उपयोग ही नहीं किया है। आसपास मौजूद लोगों ने भी बताया कि चार्जिंग स्टेशन बंद पड़ा रहता है। इसलिए कोई भी यहां ई-वाहन चार्ज करने नहीं आता है। शाम सवा चार बजे अटल एकता पार्क के सामने भी चार्जिंग स्टेशन बंद मिला। हालांकि, पार्क घूमने आने वाले लोगों ने बताया कि यहां कभी-कभार ई-वाहन चार्ज होते दिखाई देता है, लेकिन अक्सर यह भी बंद रहता है। इसके अलावा रघुनाथ राव महल के पास समेत अन्य चार्जिंग स्टेशनों की भी यही स्थिति है, जो कि बंद पड़े हैं।
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जेडीए को भी आय में हिस्सा मिलने का है प्रावधान
चार्जिंग स्टेशन के लिए जेडीए की ओर से जमीन दी गई है। ऐसे में स्टेशन स्थापित करने वाली निजी कंपनी को प्रति यूनिट बिजली खपत पर ई-वाहन चालकों से होने वाली आय में कुछ हिस्सा जेडीए को भी देना है। चूंकि, अधिकांश समय चार्जिंग स्टेशन बंद ही रहते हैं। ऐसे में कंपनी को भी बहुत आय नहीं हो रही है। इसलिए जेडीए को भी पैसा नहीं मिल पा रहा है।
यह बोले जेडीए उपाध्यक्ष
चार्जिंग स्टेशन की स्थापना संबंधी नियमों को देखा जाएगा। अगर किसी एजेंसी द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - हिमांशु गौतम, उपाध्यक्ष, जेडीए।