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Jhansi: छह करोड़ की चपत लगा चुके साइबर जालसाज, अपराधियों तक नहीं पहुंच सकी पुलिस
Sun, 19 Oct 2025 08:08 AM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sun, 19 Oct 2025 08:08 AM IST
सार
पूर्व डिप्टी एसपी राजेश त्रिपाठी का कहना है कि हरियाणा और यूपी बार्डर से जुड़े कुछ इलाकों में तकनीकी के जानकार युवकों ने अपने ठीहे बनाकर ठगी के लिए गिरोह बना रखा है। ठगी के लिए तेजी से पैटर्न बदल लेने की वजह से उन्हें पकड़ पाना आसान नहीं होता।
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साइबर क्राइम।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
साइबर ठगों के शिकार हुए लोगों के सिर्फ यही मामले नहीं हैं बल्कि झांसी रेंज में सैकड़ों लोग साइबर जालसाजों के हाथों अपनी पसीने की कमाई गवां चुके हैं। परिक्षेत्र में ही साइबर अपराधी जालसाजी करके करीब छह करोड़ रुपये से अधिक की ठगी हो चुकी लेकिन साइबर ठगों तक पहुंच पाने में पुलिस कामयाब नहीं हो सकी। इस तरह के दर्जनों ठगी के मामलों में अभी भी खुलासे का इंतजार है।
कोविड के बाद से साइबर ठगी के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। पूर्व डिप्टी एसपी राजेश त्रिपाठी का कहना है कि हरियाणा और यूपी बार्डर से जुड़े कुछ इलाकों में तकनीकी के जानकार युवकों ने अपने ठीहे बनाकर ठगी के लिए गिरोह बना रखा है। ठगी के लिए तेजी से पैटर्न बदल लेने की वजह से उन्हें पकड़ पाना आसान नहीं होता। पुलिस जब तक पैटर्न समझती है, ठग नए पैटर्न का इस्तेमाल करने लगते हैं। पुलिस के आंकड़ों की मानें, अब तक परिक्षेत्र में करीब छह करोड़ रुपये की चपत साइबर जालसाज लगा चुके हैं। इनमें से चुनिंदा मामलों को छोड़कर किसी मामले का खुलासा नहीं हो सका। हालांकि, एसपी सिटी प्रीति सिंह का कहना है कि साइबर अपराधों की रोकथाम एवं जालसाजों तक पहुंचने को पुलिस निरंतर काम करती है। कुछ मामलों के खुलासे भी किए गए।
24 लाख की ठगी करने वाले जालसाजों से मिले अहम सुराग
प्रेमनगर पुलिस ने 24 लाख की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए प्रेमनगर निवासी देव सागर, नीरज अहिरवार एवं अंकुश को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद उन लोगों ने आवास विकास निवासी इमरान एवं नंदनपुरा निवासी ध्रुव रायकवार का नाम भी बताया था। पुलिस इनको तलाश रही है लेकिन अभी तक इनका भी पता नहीं चल सका है। पकड़े गए तीनों जालसाजों ने पुलिस को बताया कि झांसी में भी साइबर अपराध करने वालों ने अपना ठिकाना बनाया है।
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कोविड के बाद से साइबर ठगी के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। पूर्व डिप्टी एसपी राजेश त्रिपाठी का कहना है कि हरियाणा और यूपी बार्डर से जुड़े कुछ इलाकों में तकनीकी के जानकार युवकों ने अपने ठीहे बनाकर ठगी के लिए गिरोह बना रखा है। ठगी के लिए तेजी से पैटर्न बदल लेने की वजह से उन्हें पकड़ पाना आसान नहीं होता। पुलिस जब तक पैटर्न समझती है, ठग नए पैटर्न का इस्तेमाल करने लगते हैं। पुलिस के आंकड़ों की मानें, अब तक परिक्षेत्र में करीब छह करोड़ रुपये की चपत साइबर जालसाज लगा चुके हैं। इनमें से चुनिंदा मामलों को छोड़कर किसी मामले का खुलासा नहीं हो सका। हालांकि, एसपी सिटी प्रीति सिंह का कहना है कि साइबर अपराधों की रोकथाम एवं जालसाजों तक पहुंचने को पुलिस निरंतर काम करती है। कुछ मामलों के खुलासे भी किए गए।
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24 लाख की ठगी करने वाले जालसाजों से मिले अहम सुराग
प्रेमनगर पुलिस ने 24 लाख की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए प्रेमनगर निवासी देव सागर, नीरज अहिरवार एवं अंकुश को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद उन लोगों ने आवास विकास निवासी इमरान एवं नंदनपुरा निवासी ध्रुव रायकवार का नाम भी बताया था। पुलिस इनको तलाश रही है लेकिन अभी तक इनका भी पता नहीं चल सका है। पकड़े गए तीनों जालसाजों ने पुलिस को बताया कि झांसी में भी साइबर अपराध करने वालों ने अपना ठिकाना बनाया है।
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