फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Jhansi: Clerks are making prescriptions, Ayush doctors are handling bills.

झांसी: लिपिक बना रहे पर्चे, आयुष डॉक्टर देख रहे बिलों का काम, स्वास्थ्य व्यवस्था में जिम्मेदारियों की उलटबांसी

Wed, 11 Feb 2026 09:36 PM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Wed, 11 Feb 2026 09:36 PM IST
सार

अधिकारियों की मनमानी से खफा कर्मचारियों का कहना है कि स्पष्ट कार्य विभाजन न होने से तकनीकी और चिकित्सकीय दक्षता का दुरुपयोग हो रहा है। आयुष डॉक्टरों को जहां मरीज देखने चाहिए, वहीं वे फाइलों और बिलों में उलझे हैं।

विज्ञापन
Jhansi: Clerks are making prescriptions, Ayush doctors are handling bills.
सीएमओ, कार्यालय, झांसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में जिम्मेदारियों की ऐसी उलटबांसी देखने को मिल रही है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लिपिक जहां पर्चे तैयार कर दवाएं बांट रहे हैं। वहीं आयुष चिकित्सकों से बिलों की जांच और भुगतान से जुड़ा काम कराया जा रहा है। सीएचसी पर हेल्थ सुपरवाइजर लिपिक का काम कर रहे हैं। सीएमओ दफ्तर में तकनीकी कर्मी फाइलें निपटा रहे हैं। अव्यवस्था की यह स्थिति सिर्फ सीएमओ कार्यालय तक सीमित नहीं, बल्कि पीएचसी और सीएचसी स्तर तक है।
विज्ञापन



आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि सीएमओ दफ्तर में रीतेश कुमार सिंह को प्रशासनिक अधिकारी के रूप में तैनात किया गया है। पद के अनुरूप कार्य नहीं देने को लेकर रीतेश कुमार ने कई बार सीएमओ को पत्र लिखा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उसके बाद अपर निदेशक व मंडलायुक्त को पत्र लिखा गया। अपर निदेशक ने सीएमओ को शासन की मंशानुसार प्रशासनिक कार्य कराने का पत्र लिखा है। सूत्रों ने यह भी बताया कि पिछले साल सितंबर महीने में जिले में 24 कनिष्ठ सहायकों को तैनात किया गया जिनमें से 21 की तैनाती पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पर की गई है। कनिष्ठ लिपिकों ने बताया कि पीएचसी पर लिपिक का कोई काम नहीं है। इसलिए जरूरत पड़ने पर वे पर्चे बनाते हैं तो कभी दवा भी बांटनी पड़ती है। बाकी समय फोन पर गुजार देते हैं। वहीं, सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों) पर बेसिक हेल्थ सुपरवाइजर या हेल्थ सुपरवाइजरों से लिपिक का काम कराया जा रहा है।
विज्ञापन




यही नहीं, सीएचसी बरुआसागर में तैनात आयुष चिकित्सक सीएमओ दफ्तर में डीजल-पेट्रोल की पर्ची बनाने आदि का काम करते हैं। यहां तक कि मलेरिया निरीक्षक, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, अपर शोध अधिकारी भी लिपिक का काम कर रहे हैं। खास बात यह कि पांच फार्मासिस्ट को सीएमओ दफ्तर के कंट्रोल रूम में तैनात किया गया है। वहीं अधिकारियों की मनमानी से खफा कर्मचारियों का कहना है कि स्पष्ट कार्य विभाजन न होने से तकनीकी और चिकित्सकीय दक्षता का दुरुपयोग हो रहा है। आयुष डॉक्टरों को जहां मरीज देखने और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की निगरानी करनी चाहिए, वहीं वे फाइलों और बिलों में उलझे हैं। हालांकि सीएमओ ने आयुष चिकित्सक से बिल का काम कराने और फील्ड के कर्मियों से लिपिक का काम लेने के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन



तकनीकी कर्मचारी लिपिक का काम कर सकता है। रही बात नवनियुक्त कनिष्ठ सहायक लिपिकों की पीएचसी पर तैनाती की तो उन्हें काम सिखाया जा रहा है।- डॉ. सुधाकर पांडेय, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed