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Jhansi: अंग्रेजों के जाने के 78 साल बाद खंगाली जा रही 223 नजूल लीज, खत्म होने के बावजूद कर दिया गया बैनामा

Thu, 08 Jan 2026 09:34 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Thu, 08 Jan 2026 09:34 AM IST
सार

प्रशासन रकबा नंबर के हिसाब से इनकी पैमाइश कराने के साथ लीज अवधि जांचेगा। संभावना जताई जा रही कि अधिकांश लीज अवधि खत्म हो चुकी है। ऐसे में यह भूमि नगर निगम के खाते में मानी जाएगी।
 

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Jhansi: 78 years after the British left, 223 Nazul leases are being scrutinized.
नगर निगम, झांसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंग्रेज जिस नजूल संपत्ति की लीज कर गए उसका कोई रिकॉर्ड नगर निगम के पास नहीं है। अंग्रेजों के जाने के 78 बाद निगम अफसरों की नींद अब टूटी है। निगम सीमा में कुल 223 नजूल संपत्तियों का पता चला है। निगम प्रशासन रकबा नंबर के हिसाब से इनकी पैमाइश कराने के साथ लीज अवधि जांचेगा। संभावना जताई जा रही कि अधिकांश लीज अवधि खत्म हो चुकी है। ऐसे में यह भूमि नगर निगम के खाते में मानी जाएगी।
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आजादी की पहली लड़ाई के दौरान झांसी इसका प्रमुख केंद्र रहा था। इसके बाद अंग्रेजों ने पलटवार किया। रानी झांसी की मृत्यु के बाद तमाम जमींदारों को अंग्रेजों ने यहां से खदेड़ दिया। उनकी पूरी जमीन को राजसात कर लिया। वर्ष 1947 में देश छोड़कर जाते समय अंग्रेजों ने राजसात में ली इस जमीन को अपने लोगों को 60-99 साल की लीज पर दे दिया। इसे नजूल की जमीन माना गया। इस जमीन का स्वामित्व राज्य सरकार के पास है जबकि निगम रखरखाव करता है। इसके लिए बाकायदा नगर निगम में नजूल रजिस्टर होता है, इसमें इसका पूरा विवरण है। झांसी के नजूल रजिस्टर में 223 संपत्तियां दर्ज हैं। इनकी लीज अवधि भी लिखी है लेकिन लीज अवधि खत्म होने के बाद मौजूदा हाल का कोई विवरण नहीं है।
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नजूल संपत्तियों को खंगाला जा रहा
पुराने शहर के कई मोहल्लों समेत लहरगिर्द, बिजौली, गरियागांव, मैरी गांव में नजूल संपत्ति है। निगम सूत्रों का कहना है कि तमाम नजूल संपत्ति की लीज खत्म हो चुकी। इनको फ्री होल्ड नहीं कराया गया। इसके बावजूद निगम की इजाजत लिए बिना जमीनों का धड़ल्ले से बैनामा कर दिया गया। प्रारंभिक जांच में पुराने शहर में तमाम जमीन ऐसी मिली जिसका कई बार सौदा किया जा चुका है। नजूल रजिस्टर में यह भी नहीं है कि कितनी नजूल संपत्ति पर अवैध कब्जा है। कुछ दिनों पहले अवैध कब्जों का मामला उजागर होने के बाद निगम प्रशासन की नींद टूटी। अब इन नजूल संपत्तियों को खंगाला जा रहा है। प्रभारी अधिकारी संपत्ति एवं अपर नगर आयुक्त राहुल यादव का कहना है कि महानगर में स्थित सभी नजूल संपत्तियों की जांच शुरू कराई गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई के बारे में कुछ कहा जा सकेगा।
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50 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर कब्जा
महानगर में न सिर्फ नजूल जमीन पर बल्कि सीलिंग के सरप्लस में निगम के खाते में आई जमीन पर भी बड़े पैमाने पर कब्जे हैं। वर्ष 2002 में नगरपालिका से नगर निगम में तब्दील होने पर निगम के स्वामित्व में ग्राम समाज समेत सीलिंग की 1200 हेक्टेयर जमीन मिली थी। शुरुआत में इसकी पैमाइश नहीं कराई गई। इस वजह से बाड़बंदी नहीं कराई जा सकी। निगम सीमा में शामिल होने के बाद तमाम जगहों पर कब्जे कर लिए गए। जब खोज-खबर शुरू हुई तो 50 हेक्टेयर से भी अधिक जमीन पर कब्जे पाए गए थे। पिछले तीन साल के दौरान 20 एकड़ से अधिक जमीन पर अवैध कब्जे भी हटवाए गए।
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